Dec 7, 2010

=> प्रेग्नेंसी की मुश्किल

                                            पढ़ाई और गोल्डन फ्यूचर की चाहत में गर्ल्स इस कदर अपने आपको व्यस्त कर लेती हैं कि कब शादी, प्रेग्नेंसी की सही उम्र निकल जाती है, पता ही नहीं चलता। एक बार सही एज निकलने के बाद या तो प्रेग्नेंसी कन्सीव नहीं होती या होती भी है तो कभी मिसकेरेज और हाइपर टेंशन की समस्या देखने को मिलती है। कभी-कभी तो कंडीशन इतनी खराब हो जाती है कि मां और बच्चे को बचा पाना भी मुश्किल होने लगता है। विशेषज्ञ का मानना है कि ये सारी कंडीशन क्रिएट न हो, इसलिए ऎसी परिस्थितियों से बचना चाहिए तथा प्रोफेशनल के साथ पर्सनल लाइफ पर भी ध्यान देना चाहिए।


डाउन सिण्ड्रोम की समस्या
                                                              नॉर्मल डिलेवरी की उम्र 25 से 30 वर्ष तक होती है, लेकिन कॅरियर में ग्रोथ की चाहत ने शादी के साथ प्रेग्नेंसी भी लेट होती जा रही है। ऎसे में लेट प्रेग्नेंसी के दौरान कम एज की महिलाओं की अपेक्षा अधिक एज की महिलाओं के बच्चे में बर्थ डिफेक्ट जैसे डाउन सिण्ड्रोम की समस्या अधिक देखने को मिलती है।
                                                            विशेषज्ञ का कहना है कि 25 उम्र की 1250 महिलाओं के बच्चों में यदि डाउन सिण्ड्रोम की समस्या एक होती है। 30 साल उम्र की 1000 महिलाओं के बच्चों में से एक, 35 वर्ष की 400 महिलाओं के बच्चों में से एक तथा 40 वष्ाü की 100 महिलाओं के बच्चों में एक डाउन सिण्ड्रोम से ग्रसित होता है। इस तरह बढ़ती उम्र में प्रेग्नेंसी से डाउन सिण्ड्रोम बच्चे के ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है।


हार्मोनल डिस्टरबेस
लेट प्रेग्नेंसी की वजह से बॉडी में इस्ट्रोजन हार्मोस की अधिकता होने से फाइब्रोइड, एन्डोमीट्रिओसिस होने की आशंका बढ़ जाती है। प्रेग्नेंसी कन्सीव हो भी गई तो 32 से ऊपर की महिलाओं में मिसकैरेज की आशंका 20 प्रतिशत अधिक हो जाती है।



जान का खतरा

                                      - प्रेग्नेंसी में डिफिकल्टी आ सकती है
  - ओवम फॉर्मेशन की कैपिसिटी कम
 - मां और बच्चे की जान को खतरा
    - मिसकेरेज की आशंका अधिक होना
         - बर्थ डिफेक्ट्स की आशंका
               - प्रेग्नेंसी इंडयूस्ड हाइपर टेंशन   
- प्री एक्लेम्सिया
                    - बच्चे का वजन कम होना
          - डिलीवरी में समस्या
                                     - सिजेरियन की आशंका बढ़ जाती है।



सलाह

- प्रोफेशनल के साथ पर्सनल लाइफ पर ध्यान दें
- हो सके तो 30 के पहले ही गर्भधारण करें
- प्रेग्नेंसी के बाद सावधानी रखें
- संतुलित आहार लें
- फोलिक एसिड का नियमित सेवन करें
- कॉफी, अल्कोहल, स्मोकिंग न करें
- चेकअप नियमित रूप से कराना चाहिए

Dec 1, 2010

=> क्या बुढापा अब दूर की कौड़ी होगा ?

                              जरा सोचिए कभी ऐसा हो तो.. एक बुजुर्ग व्यक्ति की ढीली पड चुकी चमडी फिर से सख्त होने लग जाए, चेहरे की झुर्रियाँ खत्म हो जाए, बाल फिर से आने लगे, झुकी हुई कमर फिर से सीधी हो जाए... यानी की बुढापा रिवर्स गीयर में चला जाए.

                              एक वैज्ञानिक ने इस चमत्कार को सत्य साबित कर दिया है. हावर्ड विश्वविद्यालय के ओंकोलोजिस्ट रोनाल्ड डिपीन्हो और उनकी टीम ने अपनी शोध के बाद पाया की एक विशेष एंजाइम को प्रभावित कर बढती उम्र के असर को रोका जा सकता है. इससे इंसान दीर्घायु प्राप्त कर सकता है और उसका बुढापा भी "जवानी" की तरह बीत सकता है. यही नहीं इससे कई घातक बीमारियों जैसे कि अल्ज़ायमर और हृदय संबंधित बीमारियों के होने का खतरा घट जाता है.

परीक्षण -
                           इस शोध के लिए एक बुढे चूहे को एक विशेष ड्रग दिया गया. दो महिने के ड्रग सेवन के दौरान उसके शरीर के एक एंजायम को प्रभावित किया गया और इससे उसके शरीर में नए कोष जन्म लेने लगे. उसकी चमडी कठोर हो गई. यही नहीं उसकी प्रजनन क्षमता भी फिर से सुचारू हो गई और उसने कई बच्चों को जन्म भी दिया.

टेलोमेरेज़ -
                             यह शोध जिस आधार पर विकसित की गई है वह है शरीर में पाए जाने वाले टेलोमेरेज़. ये बायोलोजिकल घडियाँ होती हैं जो क्रोमोज़ोम को खत्म होने से रोकती है. समय के साथ ये छोटी और छोटी होती रहती हैं और इससे उम्र संबंधित बीमारियाँ होने लगती है. धीरे धीरे टेलोमेरेज़ इतनी छोटी हो जाती है कि कोष मरने लगते हैं. टेलोमेराज़ नामक एंजायम टेलोमेर को फिर से जागृत कर सकता है परंतु वह शरीर में बंद किया हुआ होता है. डिपीन्हो की टीम ने इस एंजायम को जागृत करने में सफलता पाई और इससे टेलोमेर फिर से जागृत हुए और कोषों में भी नवजीवन का संचार हुआ.

तो क्या बुढापा अब दूर की कौड़ी होगा -
                                 नहीं,  इस शोध से यह पता चला है कि एक विशेष एंजायम को प्रभावित कर कोषों में नया जीवन भरा जा सकता है. झुर्रियाँ हटाई जा सकती है और इंसान स्वस्थ महसूस कर सकता है. परंतु उम्र के बढने के साथ कई और लक्षण भी उत्पन्न होते हैं जिन्हें नहीं रोका जा सकता. यानी कि इंसान की अवश्यम्भावी मृत्यु को तो नहीं रोका जा सकता परंतु उसे दुखदायी बनने से रोका जा सकता है.
                                  परंतु इसका अभी और परीक्षण होना बाकी है ?

Nov 13, 2010

=> समलैगिकता:-नैतिक पतन का लक्षण

                                         चूंकि समलैंगिक लोग हमेशा ही विषमलिंगी लोगों की तुलना में नगण्य रहे हैं अत: उनको कभी भी सामाजिक मान्यता नहीं मिली थी. इतना ही नहीं, अधिकतर धर्मों में समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध था एवं इसे नैतिक पतन का लक्षण माना जाता था. इस कारण पकडे जाने पर समलैंगिकों को हमेशा कठोर सजा दी जाती थी!

                                      लेकिन जिस तरह शराब और वेश्यावृत्ति को बुरा माने जाने के बावजूद, एवं इन बातों को सामाजिक मान्यता न मिलने के बावजूद, ये समाज में बने रहे उसी तरह समलिंगी लोग भी हजारों साल से विभिन्न रूपों में समाज में बने रहे हैं. इतना ही नहीं, बुरा समझे जाने के बावजूद जब तक शराबखाने एवं वेश्यावृत्ति के अड्डे समाज से हट कर अपने निर्दिष्ट स्थान पर रहे और जब तक वे आम जनता के लिये सरदर्द न बने तब तक समाज उनको सहन करता रहा, उसी तरह तमाम तरह के समलैंगिक समूहों को भी बुरा समझने के बावजूद सारी दुनियां में समाज झेलता आया है!
                                                          हिंदी में मलद्वार से संबंधित जो गालियां है (गाँ.. मारना, गाँ..पन आदि) वे पुरुष मैथुन की ओर संकेत करते हैं और यह इत्तिला भी देते हैं कि शराबियों एवं वेश्याओं के समान ये लोग भी समाज में यदा कदा पाये जाते हैं. यह इस बात की भी इत्तिला है कि जिस तरह अन्य गालियों मे (बहन, मां, बेटी) कही गई बातें समाज को स्वीकार्य नहीं है, उसी तरह समलैंगिक मैथुन को भी समाज सामान्य मैथुन के रूप में स्वीकार नहीं करता है!
                                           प्राचीन भारत से जो मिथुन मूर्तियां बची हैं उनमे भी यदा कदा समलैंगिक संबंधो की ओर इशारा किया गया है, लेकिन उनको सामाजिक मान्यता नहीं दी गई है. यही हिसाब लगभग सब राष्टों के इतिहास में दिखता है: जब तक समलैंगिक लोग समाज के रास्ते आडे नहीं आये, तब तक समाज उनको बर्दाश्त करता रहा. लेकिन जिस तरह शराबखोरी एवं वेश्यावृत्ति को सामाजिक मान्यता नहीं मिली उसी तरह समलैगिकता को भी सामाजिक रूप से मान्य एक कृत्य नहीं समझा गया!  



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Oct 21, 2010

=> कामवासना का विरोध क्यों?

                                    यह जीवन के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह मूल जीवन-ऊर्जा से संबंधित है। कामवासना...यह शब्द ही अत्यंत निंदित हो गया है। क्योंकि समस्त धर्म उन सब चीजों के दुश्मन हैं, जिनसे मनुष्य आनंदित हो सकता है, इसलिए काम इतना निंदित किया गया है। उनका न्यस्त स्वार्थ इसमें था कि लोग दुखी रहें, उन्हें किसी तरह की शांति, थोड़ी सी भी सांत्वना, और इस रूखे-सूखे मरुस्थल में क्षण भर को भी मरूद्यान की हरियाली पाने की संभावना शेष न रहे। धर्मों के लिए यह परम आवश्यक था कि मनुष्य के सुखी होने की पूरी संभावना नष्ट कर दी जाए।

                                      यह उनके लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों था? यह महत्वपूर्ण था क्योंकि वे तुम्हें, तुम्हारे मन को किसी और दिशा में मोड़ना चाहते थे-परलोक की ओर। यदि तुम सच में ही यहां आनंदित हो-इसी लोक में, तो भला तुम क्यों किसी परलोक की चिंता करोगे? परलोक के अस्तित्व के लिए तुम्हारा दुखी होना अत्यंत आवश्यक है। उसका स्वयं अपने आप में कोई अस्तित्व नहीं है, उसका अस्तित्व है तुम्हारे दुख में, तुम्हारी पीड़ा में, तुम्हारे विषाद में।

                                        दुनिया के सारे धर्म तुम्हारे अहित करते रहे हैं। वे ईश्वर के नाम पर, सुंदर और अच्छे शब्दों की आड़ में तुममें और अधिक पीड़ा और अधिक संताप, और अधिक घृणा, और अधिक क"ोध, और अधिक घाव पैदा करते रहे हैं। वे प्रेम की बातचीत करते हैं, मगर तुम्हारे प्रेमपूर्ण हो सकने की सारी संभावनाओं को मिटा देते हैं।

                                           मैं काम का शत्रु नहीं हूं। मेरी दृष्टि में काम उतना ही पवित्र है, जितना जीवन में शेष सब पवित्र है। असल में न कुछ पवित्र है, न कुछ अपवित्र है; जीवन एक है-सब विभाजन झूठे हैं, और काम जीवन का केंद्र बिंदु है।

                                           इसलिए तुम्हें समझना पड़ेगा कि सदियों-सदियों से क्या होता आ रहा है। जैसे ही तुम काम को दबाते हो, तुम्हारी ऊर्जा स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए नये-नये मार्ग खोजना प्रारंभ कर देती है। ऊर्जा स्थिर नहीं रह सकती। जीवन के आधारभूत नियमों में से एक है कि ऊर्जा सदैव गत्यात्मक होती है, गतिशीलता का नाम ही ऊर्जा है। वह रुक नहीं सकती, ठहर नहीं सकती। यदि उसके साथ जबरदस्ती की गई, एक द्वार बंद किया गया, तो वह दूसरे द्वारों को खोल लेगी, लेकिन उसे बांधकर नहीं रखा जा सकता। यदि ऊर्जा का स्वाभाविक प्रवाह अवरुद्ध किया गया, तो वह किसी अप्राकृतिक मार्ग से बहने लगेगी। यही कारण है कि जिन समाजों ने काम का दमन किया, वे अधिक संपन्न और समृद्ध हो गए। जब तुम काम का दमन करते हो, तो तुम्हें अपने प्रेम-पात्र को बदलना होगा। अब स्त्री से प्रेम करना तो खतरनाक है, वह तो नरक का द्वार है। चूंकि सारे शास्त्र पुरुषों ने लिखे हैं, इसलिए सिर्फ स्त्री ही नरक का मार्ग है। पुरुषों के बारे में क्या खयाल है?

                                           मैं हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों से कहता रहा हूं कि अगर स्त्री नरक का मार्ग है, तब तो फिर केवल पुरुष ही नरक जा सकते हैं, स्त्री तो जा ही नहीं सकती। मार्ग तो सदा अपनी जगह रहता है, वह तो कहीं आवागमन नहीं करता। लोग ही उस पर आवागमन करते हैं। यूं कहने को तो हम कहते हैं कि यह रास्ता फलां जगह जाता है, लेकिन इसमें भाषा की भूल है। रास्ता तो कहीं आता-जाता नहीं, अपनी जगह आराम से पड़ा रहता है, लोग ही उस पर आते-जाते हैं। यदि स्त्रियां नरक का मार्ग हैं, तब तो निश्चित ही नरक में केवल पुरुष ही पुरुष भरे होंगे। नरक “सिर्फ पुरुषों का क्लब” होगा।

                                               स्त्री नरक का मार्ग नहीं है। लेकिन एक बार तुम्हारे दिमाग में यह गलत संस्कार बैठ जाए, तो तुम किसी और वस्तु में स्त्री को प्रक्षेपित करने लगोगे; फिर तुम्हें कोई और प्रेम-पात्र चाहिए। धन तुम्हारा प्रेम-पात्र बन सकता है। लोग पागलों की तरह धन-दौलत से चिपके हैं, जोरों से पकड़े हैं, क्यों? इतना लोभ और लालच क्यों है? क्योंकि दौलत ही उनकी प्रेमिका बन गई। उन्होंने अपनी सारी जीवन ऊर्जा धन की ओर मोड़ ली।

                                                अब यदि कोई उनसे धन त्यागने को कहे, तो वे बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे। फिर राजनीति से उनका प्रेम-संबंध जुड़ जाएगा। राजनीति में सीढ़ी दर सीढ़ी ऊपर चढ़ते जाना ही उनका एकमात्र लक्ष्य हो जाएगा। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद की ओर, राजनीतिज्ञ ठीक उसी लालसा से देखता है, जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका की ओर देखता है। यह विकृति है।

                                               कोई व्यक्ति किन्हीं और दिशाओं में जा सकता है, जैसे शिक्षा; तब पुस्तकें उसकी प्रेम की वस्तुएं हो जाती हैं। कोई आदमी धार्मिक बन सकता है, तब परमात्मा उसका प्रेम-पात्र बन जाता है...तुम अपने प्रेम को किसी भी काल्पनिक चीज पर प्रक्षेपित कर सकते हो, लेकिन स्मरण रहे, उससे तुम्हें परितृप्ति नहीं मिल सकती।


ओशो
फ्रॉम डार्कनेस टु लाइट

Oct 19, 2010

=> संक्रमण की रोकथाम और उपचार



सर्दियों के दिनों में बहुत से लोग जुकाम का शिकार होते हैं। जुकाम लगने पर लोगों को सिरदर्द, ज्वर, खांसी और नाक बंद होने की शिकायत होती है और वे आम जीवन और काम में कठिनाई महसूस करते हैं।
अनेक लोग जुकाम को मामूली बीमारी समझते हैं। वे अस्पताल जाने के बजाय इसके इलाज के लिए स्वयं औषधि की किसी दुकान से दवा खरीदते हैं। लेकिन इन दुकानों पर जुकाम की अलग-अलग दवाएं बिकती हैं और गलत दवा खाने से बीमारी दूर नहीं होती, बल्कि स्वास्थ्य को क्षति पहुंचती है। इसलिए जुकाम के उपचार में दवाओं का वैज्ञानिक प्रयोग ही किया जाना चाहिये।
यहां हम आम जुकाम की चर्चा कर रहे हैं, फ्लू की नहीं। आम जुकाम में विषाणु की वजह से श्वास नली सूज जाती है। कई लोग साल में कई बार जुकाम के शिकार होते हैं। लेकिन इससे यह भी नहीं कहा जा सकता कि जुकाम कोई हल्की बीमारी नहीं है। पेइचिंग के तुंगरेन अस्पताल के डाक्टर चेन के अनुसार जुकाम का समय पर इलाज न किये जाने से शरीर के दूसरे भागों पर भी कुप्रभाव पड़ सकता है। जुकाम से प्रभावित होने वाली श्वासनली शरीर का ऊपरी भाग है, पर इससे कान, फेफड़े, दिल, यहां तक कि गुर्दे भी प्रभावित हो सकते हैं।
जुकाम की दवा का कोई साधारण नुस्खा नहीं होता, इससे लोग दवा की दुकानों से खुद दवा खरीद सकते हैं। लेकिन जुकाम की दवा चुनना कोई सरल बात नहीं है। पेइचिंग की दवा की एक दुकान की बिक्रेता सुश्री वांग के अनुसार आम तौर पर लोग जुकाम की दवा के कारगर होने तथा उस के पश्चप्रभाव पर ध्यान देते हैं। वे मशहूर कंपनियों द्वारा उत्पादित दवा खरीदना पसंद करते हैं, जबकि इन कंपनियों की दवाएं विज्ञापनों के कारण मशहूर रहती हैं। वास्तव में महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग अपनी विशेष स्थिति के अनुसार उचित दवा चुनें। आजकल दुकानों में जुकाम की जो दवाएं हैं उनमें आम तौर पर ज्वररोधी दवाएं, खून की नलियों को सिकोड़ने वाली दवाएं तथा अतिसंवेदनशीलता रोधी दवाएं शामिल हैं, जिनसे खांसी और बंद नाक की शिकायत दूर की जा सकती है। लेकिन जुकाम की दवाओं के अक्सर पश्चप्रभाव होते हैं। मिसाल के लिए ज्वर को दूर करने वाली जुकाम की दवा खाने से आम तौर पर जिगर और गुर्दे को क्षति पहुंचती है , दिल के रोगियों को खून की नलियों को सिकोड़ने वाली दवा नहीं खानी चाहिये और अतिसंवेदनशीलता रोधी दवा खाने से लोगों को नींद आ सकती है, इसलिए ऐसी दवा दिन में काम के समय नहीं खानी चाहिये।
बहुत से रोगी जुकाम लगने पर रोगाणुरोधी दवा खाते हैं, पर वास्तव में यह ठीक नहीं है. क्योंकि जुकाम के विषाणुओं का कारगर मुकाबला करने वाली रोगाणु रोधी दवा अभी नहीं बनाई जा सकी है। आम रोगाणुरोधी दवा जुकाम को दूर करने में अर्थहीन रहती है और गलत दवा खाने से शरीर को क्षति भी पहुंचती है। इसलिए जुकाम के साथ निमोनिया न होने पर रोगाणु रोधी दवा खाने की जरूरत नहीं है।
चीन की परंपरागत चिकित्सा पद्धति जुकाम के उपचार में बहुत कारगर साबित हुई है। परंपरागत चीनी चिकित्सा पद्धति के अनुसार जुकाम के रोगियों का रोग बलगम आने और नाक बंद होने की शिकायत के आधार पर तय किया जा सकता है। इस तरह तय रोग के मुकाबले के लिए तय दवा का प्रयोग किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि जुकाम के रोगियों को इलाज के लिए सबसे पहले अपने रोग की किस्म जाननी चाहिये। इससे पहले बेवजह दवा खाना ठीक नहीं है। पर अगर रोगी के शरीर का तापमान 38 डिग्री से अधिक हुआ, तो उसे जल्द से जल्द अस्पताल में भरती हो जाना चाहिये।
चीन टी बी से गम्भीर ग्रस्त रहा है , हर वर्ष में एक लाख तीस हजार व्यक्तियों की मृत्यु इसी बीमारी से होती है । चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने हाल ही में प्रेस जगत के सम्मुख कहा कि वर्तमान चीन में टी बी की रोकथाम और उस के इलाज के सामने गम्भीर चुनौतियां मौजूद हैं , चीनी स्वास्थ्य विभाग जन समुदाय को टी बी की रोकथाम व उस के इलाज के बारे में जानकारी दिलाने , अपने आप की आत्मरक्षा करने की चेतना उन्नत करने और टी बी की नियंत्रित रणनीति को व्यवस्थित करने के लिये सिलसिलेवार कदम उठायेंगे ।
टी बी सांस नली का संक्रामक रोग है और वह मुख्यतः फेफड़े में पैदा होता है । समूचे विश्व में टी बी इतने व्यापक तौर पर फैल गया है कि अब वह एक गम्भीर सार्वजनिक स्वास्थ्य सवाल और सामाजित सवाल का रूप ले चुका है । चीन विश्व में टी बी से गम्भीर ग्रस्त होने वाले देशों में से एक है , हर वर्ष में दस लाख लोग टी बी से पीड़ित हैं , यह संख्या भारत के बाद विश्व में दूसरे नम्बर पर आती है ।
ऐसी टी बी के फैलाव को काबू में पाने के लिये चीन सरकार ने लगातार अधिक धन राशि का अनुदान दिया है । गत वर्ष में चीनी केंद्रीय वित्त ने टी बी के इलाज व उस की रोकथाम में कुल 40 करोड़ चीनी य्वान का खर्चा किया है , जो इस के पूर्व वर्ष से तीस प्रतिशत से अधिक है । चीन सरकार ने टी बी की रोकथाम व उस के इलाज की योजना बनायी , साथ ही टी बी से ग्रस्त रोगियों को मुफ्त में देवाएं बांटी हैं और टी बी की रोकथाम व उस के इलाज से जुड़े मामलों के ठोस प्रबंधन के लिये इस रोग के फैलाव से संबंधित सूचना वैब भी स्थापित की है । चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के रोग की रोकथाम व निरोध ब्यूरो के उप प्रधान श्री श्याओ तुंग लाओ ने इस का परिचय देते हुए कहा चीन ने राष्ट्र , प्रांत , प्रिफेक्चर , कांऊटी , टाऊशिप और गांव स्तरीय बहुदेशीय टी बी रोग निरोध सेवा प्रणाली संपूर्ण बना ली है । इधर पांच सालों में कुल 20 लाख 50 हजार टी बी ग्रस्त रोगियों का पता लगाया गया है और उन का इलाज भी किया गया है , जिस से करोड़ों स्वस्थ व्यक्ति टी बी बीमारी लगने से बच गये हैं और हर वर्ष में लगभग 8 अरब य्वान की आर्थिक क्षति भी बचायी गयी है ।
श्री श्याओ तुंग लाओ ने कहा कि चीन ने हालांकि टी बी की रोकथाम व इलाज में कुछ उपलब्धियां हासिल की हैं , पर निम्न गम्भीर चुनौतियां फिर भी सामने खड़ी हुई हैं कि इस बीमारी की रोकथाम व निरोध में संबंधित धन राशि की कमी रही है , बुनियादी टी बी निरोधक संस्थाओं व व्यवसायिक व्यक्तियों की कार्यक्षमता उन्नत करने की जरूरत है और टी बी व एड्ज से साथ साथ ग्रस्त रोगी भी सामने आयेहैं , जिस से टी बी की रोकथाम व इलाज को और कठीन बनाया गया है ।
उपरोक्त समस्याओं को ध्यान में रखकर चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय सकारात्मक कदम उठाने में लगा हुआ है । मसलन चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय चालू व अगले वर्ष में टी बी की दवाओं के बेअसर होने के बारे में राष्ट्रीय सर्वक्षण अभियान चलायेगा , ताकि टी बी निरोध रणनीति को सुव्यवस्थित बनाने के लिये आधार तैयार किया जा सके ।
यह सर्वेक्षण अभियान समूचे चीन के 31 प्रांतों , स्वायत्त प्रदेशों व केंद्र शासित शहरों में किया जायेगा , स्वास्थ्य मंत्रालय इस अभियान में एक करोड़ 70 लाख से अधिक य्वान का विशेष अनुदान भी देगा । वर्तमान में विभिन्न सर्वेक्षण केंद्रों का तैयारी काम मूलतः पूरा हो गया है , आगामी एक अप्रैल को समूचे चीन में इस सर्वेक्षण अभियान शुरू होने की योजना है । स्वस्थ्य मंत्रालय इस सर्वेक्षण अभियान का फायदा उठाकर समुचे देश में क्रमशः टी बी पर निष्प्रभावकारी दवाओं का निरीक्षण कर देगा ।
इस के अलावा चीन देश भर में टी बी की रोकथाम व उस के इलाज के बारे में जानकारियों का सर्वेक्षण भी करेगा , संबंधित विभाग फिर सर्वेक्षण परिणाम के अनुसार व्यवहारिक कदम उठाएंगे , ताकि स्वस्थ्य शिक्षा और स्वस्थ्य संवर्द्धन रणनीति को व्यवस्थित किया जा सके ।

Oct 5, 2010

=> Eco-Friendly City

                                         अपने शहर को Eco -frendly बनाने के लिए हमें अपने कुछ बुनियादी जरूरतों पे ध्यान देना होगा...जैसे सड़क, परिवहन,स्वास्थ्य सुबिधांये,बिजली,पानी व रहने सम्बन्धी आवश्यकताओं पे नजर डालना ही होगा.......
                                                  
1 -Polethene का बहिस्कार किया जाए -  polethene ऐसे chemicals से मिलकर prepaire  जाती है जो हजारो-लाखो साल में भी नहीं गलते अतः polethene का प्रयोग न कर के हमे bag व कागज के थैलों का उपयोग करना चाहिए.

2-Prevent Polution- हमें अनावश्यक रूप से होने वाली प्रदुषण को रोकना चाहिए.मनोरंजन के लिए  indoor ब्यवस्था रखनी चाहिए और music,video निर्धारित देसिब्ले में ही बजाना चाहिए. गाडियों में प्रेस्सर-

3-Pay the role of an Ideal Nationals- सडको पे पड़े ईट पत्थर को स्वयं ही हटाने की कोसिस करता हूँ और दूसरों को भी सलाह देता हूँ की ऐसा करने में शर्म न महसूस करें! कूड़ा उचित स्थान पर ही डालें. यदि कोई disable  ब्यक्ति रास्ता पर करना चाह रहा है तो खुद रूक कर उसे रास्ता क्रोस करने में मदद करें!

4-Be a part of Traffic Police- यदि रोड पर जाम लगा है तो खुद ही व्यवस्था संभालनी चाहिए यदि ऐसा संभव न हो तो Traffic पोलिसे को सूचित करना चाहिए.

5- traffic rules Must be fallowed- रूल्स ऑफ़ द रोड को ध्यान में रख कर गाडी चलायें,तथा गाड़ियों को नियमित चेकिंग  करते रहे ताकि वो धुंवे के रूप में वायु प्रदुषण न करें, क्योंकि इनमे co2,co व अन्य बिशैली गैसें होती है जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं.

6-Car Pooling- कर पूलिंग से समय पैसा व सामन तीनो की सुरक्षा होती है.petrole भी बचाता है अतः कार पूलिंग करें तो यह एक बेहतर बिकल्प होगा pollutiopn रोकने का!

7-Plantation- पोध रोपण City को Eco-Friendly बनाने में मदद करता है. अतः इस कार्य को एक अभियान के तहत किया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा हरियाली युक्त धरती का निर्माण किया जा सके.

8-water Harwesting-बरसात का पानी नदियों के रास्ते बहकर समुद्र में  ब्यर्थ न बह जाए इसके लिए हमें water harwesting plan अपनाने की जरूरत है.

9- Each one Teach one फार्मूला - city को शिक्षित बनाने के लिए each-one teach-one  के नीयम पर कार्य करें यानि के प्रत्येक ब्यक्ति अपने जिम्मेदारी पर एक गरीब बच्चे को पदाने ka जिम्मा ले तो सहर से अशिक्षा जल्द ही दूर हो जाएगी.

10-Select proper way to Oppose-  आजकल किसी भी दुर्घटना या घटना के होने पर आम पब्लिक रोड जाम तथा तोड़-फोड़ करती है और असभ्य ब्यवहार अपनाकर सरकारी संपत्ति को नुक्सान पहुचाते है जिससे वे खुद ही और परेशां हो जाते है बजाय के कोई हल पांए! एकजूट होकर सम्बंधित अधिकारी के सामने अपनी समस्या लेकर जांए और अपनी बात मजबूती से रक्खें तो जरूर ही कोई न कोई राह निकल आएगी.
        याद रहे उबलते जल में चेहरा देखना मुस्किल होता है जबकि शांत जल में आसन यानी गुस्से में हमें पता नहीं चलता और हम अपना ही नुक्सान कर बैठते हैं.

11-ज्यादा से ज्यादा शिक्षार्जन करें क्योंकि देश की सम्ब्रिद्धि इसके नागरिको के साक्षरता पर आधारित होती है. मीडिया के तमाम माध्यमो से जुड़कर हम दिन-प्रति-दिन होने वाले समाचारों से रूबरू रह सकते हैं.

12-  Social Interaction- समय-समय पर सामजिक समस्यानो व अब्यवास्थाओं को दूर करने के लिए एक बिचार मंच का आयोजन कर लोगो की राय समझें! ऐसा ब्यक्ति, संगठन व पार्टी जो समाजहित में कुछ अच्छा किया हो उसे प्रोत्साहित करें इससे ज्यादा से ज्यादा लोग अच्छे कार्य करने के लिए उत्साहित होंगे! और समाज को अच्छा सन्देश जाएगा!

13- एक भावी पत्रकार होने के नाते मैं अपने द्वारा प्रसारित लेख,समाचार में लोगों के हित व समझाने योग्य बातें ही प्रसारित करूंगा! यदि मैं TV Journalist  हुआ तो vulgarity &; adulthood programs को दूर करने या उनका समय नीयत करने के पक्ष में रहूँगा!यदि  Photo-Journalist  हुआ तो ऐसे फोटो या  footage दिखाने के पक्ष में रहूँगा जो असामाजिक तत्वों को सन्देश देने वाला हो; जैसा की आजकल मीडिया रोड जाम,तोड़फोड़ व पुलिस से हुई झड़प में ऐसी फोटो Publish करता है जो असामाजिक तत्वों को  Dominate करती हैं जिससे प्रशासन व पुलिस बौनी दिखाई पड़ती है ऐसा करने से गलत लोगो का हौसला और बढ़ जाता है अतः वे और घटिया करतूत करने को उतावले होते हैं! हमें प्रशासन व पुलिस की मजबूती लोगों को दिखाना होगा ताकि व्यवस्थाएं अपने रास्ते पर चल सकें!

14-आजकल लोग जागरूक हुए हैं मगर गलत धारणाएं अभी भी फल-फूल रही हैं लोग लड़के व लड़की को असमान नजरिये से देखते हैं जोकी बदलने की जरूरत है...सच तो यह है की लड़की लड़कों से कहीं आगे हैं!
एक बात याद रहे की पुरुष हमेश हर बात में गणित लगाता रहता है जबकि महिला हर बात को प्यार व भाईचारा के निगाह से देखती, घर चलाने के लिए प्यार की जरूरत होती है न की गणित की!

15- आज कल न्याय व्यवस्था को दोष दिया जाता है के यह सही नहीं है मगर इस स्थित के जिम्मेदार हम स्वयं हैं! हम ego  में आकर छोटी-छोटी बातों में झगडा कर लेते हैं और बात  न्यायलय तक पहुंचती है यही कारण है की छोटी अदालतों से लेकर बड़ी अदालतों तक मुकदमो की भरमार लगी पड़ी है! हमें आपसी मामलों को मिल बैठकर सुलझा लेना चाहिए ताकि अदालत का बोझ कम किया जा सके!
                           इसके अलावा अपने शहर को Eco-Friendly  बनाने के लिए खुद को सम्भालना पड़ेगा और सुधारना पड़ेगा इसके बाद ही दूसरों को सिखा व सन्देश देने की बारी आएगी! इसी के साथ आपको बहुत-बहुत नमस्कार जय-हिंद!

Sep 29, 2010

=> चैन-ए-अमन

क्या फर्क पड़ता अगर मस्जिद बना होता?


क्या असर होता अगर मन्दिर बना होता?

      'श्री राम' न रहते मन्दिर मेँ,

      न 'खुदा' रहता है मस्जिद मेँ।

जहाँ बने हजारोँ मन्दिर हैँ एक और न बनता क्या होता?

      वो मूर्ति-महल कुछ खास नही,

      जिन्हेँ इन्सान बनाया करता है।

     तूँ देख महल 'जगवाले' का जो,

      इन्सान बनाया करता है।

क्या फर्क पड़ जाता अगर 'खाली-जगह' होता?

अन्तर न कुछ होता मगर चैन-ए-अमन होता॥

Sep 1, 2010

=> न्याय चले धीमा रफ्तार।

धीमी गति व धीमी चाल,न्याय चले धीमा रफ्तार।

जिनपे है पैसा अपरम्पार
न्याय करे उनकी जयकार
हम ठहरे जनरल आदमी
हमारी क्या औकात
न्याय-व्यवस्था धीरे-धीरे
मेरे पहुँच से दूर हि जात,

धीमी गति व धीमी चाल,न्याय चले धीमा रफ्तार।

'मुकदमा ठोक दूँगा,शान से लड़ूँगा
और कट जायेगी इसकी जिन्दगी पूरी'
लेकिन वे यह नही जानते कि
मौत किसी से रिस्ता नही निभाता
एक दिन ये सबको ले जाता
जान-समझ कर सब करते हैँ ये अपराध

धीमी गति व धीमी चाल,न्याय चले धीमा रफ्तार।

केस साल्व होने मेँ लगता बीस साल
और जज का आता फरमान
'त्रिनाथ' मुकदमा जीते हैँ और ईन्हे मिलेगा
ओर बिपछ्छी तीन महीने ज़ेल खटेगा
मगर उसे खुश करने की वे चाल चले हैँ
ज़ेल के बदले जुर्माना लेने को खड़े हैँ
मीडिया के सामने बिपछ्छी हँस पड़े हैँ
दाँत फाड़ के उसी 'न्याय' से कह रहे हैँ
मैँ तो अपने दर से ऊपर उठ आया हूँ
कल हि चुनाव लड़ने का टिकट पाया हूँ
ये सब सुनकर आप हो रहे हैँ हैरान

धीमी गति व धीमी चाल,न्याय चले धीमा रफ्तार।

न्याय नहि करता ये गौर
डग भरुँ मै थोड़ा तेज और
जल्दी से गलत सही देखूँ
बुझदिल व कायर दानव का
पल भर मेँ सपना तोड़ूँ
कुछ करने से पहले इन्सान
सोचे कम से कम एक हि बार

धीमी गति व धीमी चाल,न्याय चले धीमा रफ्तार।

Jul 27, 2010

=> बने अच्छे वक्ता

                             आवाज हमारे व्यक्तित्व का अहम हिस्सा है, जिसके बिना हमारी पर्सनॉलिटी अधूरी है। यदि आप दिखने में बहुत आकर्षक हैं, लेकिन आपकी आवाज या बोलने के तरीके में कोई खामी है, तो इसका आपके व्यक्तित्व पर विपरीत असर पड़ सकता है। जरूरी नहीं कि आवाज अच्छी हो। आप वॉइस मॉड्यूलेशन से आवाज को बेहतर बना सकते हैं।

वॉइस क्वालिटी
                                आप दूसरों को अपने लुक्स से कहीं ज्यादा अपने बोलने के लहजे से लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। आपका आत्मविश्वास आपकी आवाज व बोलने के ढंग से तुरंत दिख जाता है। धीरे- धीरे शांति से अपनी बात रखने वाले व्यक्ति से कोई भी डर जाता है। अमिताभ बच्चन और सुष्मिता सेन जैसी हस्तियों की सफलता का बहुत बड़ा राज उनकी वॉइस क्वालिटी है।
communication skills


सही गैपिंग जरूरी
                                   बोलते समय अपने शब्द और वाक्यों के बीच सही गैपिंग रखें। इससे आपकी बातों में आपकी भावनाएं बेहतर तरीके से व्यक्त हो सकेंगी। पीच को धीमी रखें, लेकिन इतनी धीमी आवाज में भी बात न करें कि लोगों तक आपकी आवाज ही न पहुंच पाए। बोलते समय यदि कोई आपसे प्रश्न करता है, तो उसे अपनी बात रखने का पूरा मौका दें। भाषा ऎसी उपयोग करें, जो बड़े वर्ग को समझ में आए। कठिन भाषा के इस्तेमाल से बचें और हो सके तो बोलते समय अपने सेंस ऑफ ±यूूमर का पूरा उपयोग करें। इससे आप श्रोताओं को बांध सकेंगे। साथ ही बोलते समय सही आई कॉन्टेक्ट रखें, जिससे आत्मविश्वास झलके।

गार्बेज वर्डस दूर करें
                                    अच्छे वक्ता की खासियत होती है कि वह ओह, श..., जैसे गार्बेज वड्र्स से अपने उद्बोधन को दूर रखता है। आप कितना ही अच्छा भाषण दे रहे हों, लेकिन बीच में इस तरह के शब्दों का प्रयोग वैसा होता है मानों खाने के बीच में मुंह में कंकड़ आ जाना। साथ ही आवाज की पिच को भी नियंत्रित करें।

जल्दबाजी सही नहीं
                                        कोशिश करें अपनी बात कम शब्द और धीमी गति में बोलें। जल्दबाजी से आपकी बातें वह प्रभाव नहीं डाल पाएगी, जो आप चाहते हैं। बोलते समय अपने विषय पर एकाग्रता रखें। इससे आपकी आवाज में जो पैशन और आकर्षण पैदा होगा, उसका कोई तोड़ नहीं होगा।

टिप्स

  1. बोलते समय आपका उद्बोधन रूम में उपस्थित सभी लोगों से हो।
  2. बोलते समय अपनी भावनाओं के साथ-साथ आवाज में परिवर्तन करें और इसमें शरमाएं नहीं।
  3. बोलते समय ऑडियंस के बीच चलते-फिरते रहें और उन्हें भी अपनी बातचीत में शामिल करें।
  4. बोलते वक्त बीच में आराम जरूर लें।

Jul 23, 2010

=> Important Days of The World

January


01 - New Year Day
Road Safety Week

11 - APSRTC Establishment Day

12 - National Youth Day

13 - World Laughter Day

15 - Army Day

21 - Manipur Day
Meghalaya Day
Tripura Day

23 - Desh Prem Divas

25 - Himachal Pradesh Day

26 - Indian Republic Day
Jammu & Kashmir Day
International Customs Day

30 - Martyr's Day

Sarvodaya Day

February

14 - Valentines Day

24 - Central Excise Day

28 - National Science Day



March

08 - Mothers Day

13 - No Smoking Day

15 - World Disabled Day

17 - St. Patricks Day

21 - International Day for the Elimination of Racial Discrimination

22 - World Water Day

23 - World Meteorological Day

27 - World Stage ArtistsDay

31 - Financial Year Ending



April

01 - Fools Day

05 - National Maritime Day

07 - World Health Day

18 - World Heritage Day

22 - World Earth Day

23 - Easter Day

24 - World Lab Animals Day

25 - National Administrative Professionals Day



May

01 - Gujarat Statehood Day
International Labour Day
Maharastra Statehood Day

03 - International Sun Day
World Asthma Day
World Press Freedom Day

04 - Coal Miner's Day

05 - World Athletics Day

07 - National Institute of Sports Founder's Day

08 - World Red Cross Day

11 - National Resurgence Day
Technology Day

12 - International Nurses Day
Mothers Day

13 - International Criminal Court Day
National Solidarity Day

15 - International Day of Families

16 - Sikkim Day

17 - World Telecommunications Day

20 - World Metrology Day

21 - Anti Terrorism Day

22 - International Day for Biological Diversity

24 - Commonwealth Day

28 - Official Language Day
Telugu People's Self-respect Day

30 - Goa Statehood Day

31 - World No-Tobacco Day



June

01 - International Children's Day

03 - World Naturist Day

04 - International Day for Innocent Children Victims of Aggression

05 - World Environment Day

16 - Father's Day

21 - Hugging Day
World Music Day

23 - International Olympic Day
Rath Yatra

26 - International Anti - Drugs Day
International Day against Drug Abuse and illicit Trafficking

27 - World Diabetes Day



July

01 - Architecture Day
Doctor's Day
International Jokes Day
Vana Mahotsav Week 1-7

02 - World Sports Journalists Day

04 - Free 4th of July

06 - World Zonnosis Day

07 - International day of Co-Operatives

11 - World Population Day

20 - Man Walks on the Moon

26 - Kargil Vijay Divas



August

01 - World Breast-feeding Week

03 - Liberation Day

05 - Friendship Day

06 - Hiroshima Day

09 - August Kranti Divas
International day of the world'sIndigenous People
International day of Solidarity with the strugleof Women in South Africa
Nagasaki Day

10 - Dengue Prevention Day

12 - International Youth Day
Librarians Day

13 - Left Hander's Day

15 - Indian Independence Day
West Bengal Day

19 - World Photography Day

20 - World Mosquito Day

24 - Kolkata's Birth Day
Sanskrit Day

26 - Women's Equality Day

29 - National Sports Day
Telugu Language Day



September

01 - Nutrition Week 1-7

04 - Minority Welfare Day

05 - Teachers Day

08 - World Literacy Day

10 - Haryana Statehood Day
Punjab Statehood Day

14 - Hindi Day

15 - Engineers Day

16 - International Day of the Preservation of the Ozone Layer

18 - International Day of Peace

21 - Biosphere Day
World Alzheimer's Day

22 - Girl Child Week 22-26

24 - Girl Child Day
World Heart Day

26 - CSIR Foundation Day

27 - World Tourism Day

28 - Gunners Day



October

01 - International Music Day
International Day for Older Persons
National Voluntary Blood Donation Day
World Habitat Day(1st Monday)

02 - Gandhi Jayanthi
Human Rights Protection Day
Prisoner's Day
World Ostony Day
World Wide Life Week (2-8)

03 - World Animal Day

04 - International Mental Health Health Week (4-10)
World Space Week(4-10)

08 - Air Force DayRapid Action Force Raising Day

09 - National Postal Week(9-14)
World Postal Day

10 - World Disaster Reduction Day (2nd Wednes Day)
World Mental Health Day

12 - World Sight Day

13 - World Arthritis Day

14 - World Standards Day

15 - World White Cane Day

16 - World Anaesthesiologists Day
World Food Day

17 - International Day for the Eradication of Poverty

21 - Global Iodine Deficiency Disorders Day
Police Commemoration Day

24 - Disarmament Week(24-30)
United Nations Day

27 - Infantry Day

30 - World Thrift Day

31 - Halloween Day
National Integration Day



November

01 - Andhra Pradesh Formation Day
Haryana, Karnataka, Kerala, Madhya Pradesh, Punjab States Formation Day

05 - International Week of Science & Peace (5-11)

09 - Legal Services Day
Uttaranchal State Formation Day

10 - Forest Martyrs Day

11 - Armistice Day
Education Day

12 - National Broadcasting Day

14 - Cooperative Week
National Book Week
National Land Resources Conservation Week (14-20)
National Library Week
Universal Children's Day
World Diabetes Day

15 - Jharkhand State Formation Day
New Born Week (15-21)
Thanks Giving Day

16 - International Day for Tolerance
Pharmacy Week (16-22)
National Press Day

17 - National Day for the Deaf

18 - Territorial Army Day

19 - National Integration Day
World Heritage Week (19-25)

20 - Africa Industrialization Day

21 - World Fisheries Day
World Hello Day
World Television Day

25 - Flag Day
International Day against Violence against Women

26 - National Law Day



December

01 - Border Security Force (BSF) Raising Day
Nagaland Day
World AIDS Day

02 -International Day for Abolition of Slavery (UNO)

03 - International Day of Disabled Persons
World Conservation Day

04 - Chemical Disaster Prevention Day
Navy Day

05 - International Volunteers Day

06 - Armed Forces Day
Civil Defence Day

07 - International Civil Aviation Day

08 - Handicrafts week (8-15)
Home Guards Raising Day
Submarine Day

09 - National Immunization Day

10 - Human Rights Day
International Childrens Day of Broadcasting

11 - UNICEF Day

12 - Assam Rifles Raising Day

14 - National Energy Conservation Day

16 - Vijay Divas

17 - Pensioner's Day

18 - International Migrants Day
Minorities Rights Day

22 - Mathematics Day

23 - Kisan Day

24 - National Consumer Day

25 - X-Mas Day

26 - Boxing Day

28 - Central Reserve Police Force Anniversary

29 - International Day for Biological Diversity

Jul 15, 2010

=> हे अम्बे (कविता)

हे अम्बे दे दो एक शक्ति के मेरा मन संभल जाए
करो कुछ क़र्ज़ ऐसा की अँधेरा खुद ब खुद जाए
                                     हे अम्बे दे दो एक शक्ति ........................
माँ तू बैभवशाली है
तू ही दुर्गा काली है
चामुंडी-सतचंडी तू
तुन ही पालनहारी है
करूँ कैसे तेरी भक्ति ये बालक ज्ञान से हरे
                                      हे अम्बे दे दो एक शक्ति .........................
                                       तू शिव की दाहिनी है
                                       महिसासुर मर्दिनी है
                                       तेरे दरबार में माँ
                                      नहीं कोई कमी है
करूँ कैसे तेरा दर्शन ये अँधा आँख से हारे
                                        हे अम्बे दे दो एक शक्ति ........................
                                        तू माता है हमारी
                                       कमलवत चरणों वाली
                                       ममतामयी जननी है तू
                                       दुखो को हरने वाली
पहाड़ों पे बसी है तू ये लंगड़ा पैर से हारे
                                          हे अम्बे दे दो एक शक्ति .......................
                                       जो हैं निर्धन जगत में
                                      तू बसी उनके मन में
                                      फेर दे एक नजर गर
                                      खुशियाँ भर दे झोली में
रहूँ कैसे खुसी माता ये बझिन लाल से हारे
                                            हे अम्बे दे दो एक शक्ति .................... 

                                      त्रिनाथ मिश्रा
                                  फ्रीलांस जर्नलिस्ट  

Jul 10, 2010

=> सच्चा प्यार क्या है

क्या है सच्चा प्यार ?
आओ सुनो एक कहानी
एक चिडिया को एक सफ़ेद गुलाब से प्यार हो गया ,
 उसने गुलाब को प्रपोस किया ,
गुलाब ने जवाब दिया की जिस दिन मै लाल हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा ,
जवाब सुनके चिडिया गुलाब के आस पास काँटों में लोटने लगी और उसके खून से गुलाब लाल हो गया,
ये देखके गुलाब ने भी उससे कहा की वो उससे प्यार करता है
पर

तब तक



चिडिया मर चुकी थी..........................
.......................!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!


इसीलिए कहा गया है की सच्चे प्यार का कभी भी इम्तहान नहीं लेना चाहिए,
क्यूंकि सच्चा प्यार कभी इम्तहान का मोहताज नहीं होता है ,
ये वो फलसफा; है जो आँखों से बया होता है ,
ये जरूरी नहीं की तुम जिसे प्यार करो वो तुम्हे प्यार दे ,
बल्कि जरूरी ये है की जो तुम्हे प्यार करे तुम उसे जी भर कर प्यार दो, फिर देखो ये दुनिया जन्नत सी लगेगी प्यार खुदा की ही बन्दगी है,
खुदा भी प्यार करने वालो के साथ रहता है!

Jul 9, 2010

=> Know It! 17 Years Old & 7 Kids

                                 Argentine teenager Pamela Villarruel poses with her seven children outside her parents' home in the town of Leones in Cordoba Province, northern Argentina, May 11, 2008. (Pics courtesy: AP)

                                 Pamela, 17, bore all seven children in just three pregnancies, having her first boy in 2005 when she was 14 and the other six girls in two deliveries of triplets in the following two years.
                                 Pamela and her children currently sleep in the living room of her mother Magdalena who supports them all by house cleaning.
                                 The father of Pamela's first son abandoned them, the father of the first set of triplets was forced out of the house by the family for beating her, and Pamela refuses to identify the father of the more recent triplets.
                                 Magdalena requested to have her daughter's fallopian tubes tied to avoid any further pregnancies, but was denied as Argentine law prohibits the procedure to be done on minors.

                    है न कमाल की बात! ताज्जुब है बाबा!

Jul 3, 2010

=> मोबाइल फ़ोन बचाएगा गोरिल्ला को?

मोबाइल फ़ोन की एक ऐपलिकेशन का इस्तेमाल कॉंगो में विलुप्त हो रहे पहाड़ी गोरिल्ला को बचाने के लिए किया जाएगा.
आई-फ़ोन और आई-पैड में ‘आई-गोरिल्ला’ नाम की एक नई ऐपलिकेशन जोड़ी गई है. इसकी मदद से कॉंगो के विरुंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाने गोरिल्लाओं के जीवन पर नज़र रखी जा सकेगी.
इसका इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को क़रीब चार डॉलर की क़ीमत चुकानी होगी.
कॉंगो में पाए जाने वाले गोरिल्ला की आबादी वनों के घटने, अवैध शिकार, बीमारी और देश में चल रही अस्थिरता की वजह से काफ़ी कम हो गई है.
अब इनकी आबादी 720 तक सिकुड़ कर रह गई है. इनमें से 211 विरुंगा के राष्ट्रीय उद्यान में रहते हैं.
मोबाइल फ़ोन का ये नया फ़ीचर विरुंगा नेशनल पार्क ने ही शुरु किया है. इस सुविधा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता अपने लिए एक गोरिल्ला परिवार का चयन करने के बाद लगातार उसके बारे में जानकारी ले सकते हैं.
उपभोक्ता इस परिवार की तस्वीरें,वीडियो और उनके जीवन के बारें रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं.
क़रीब 7800 वर्ग किलोमीटर का विरुंगा राष्ट्रीय उद्यान डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कोंगो, रवांडा और उगांडा में फ़ैला हुआ है. इसे 1979 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था.

Jun 3, 2010

=> शिक्षा

किसी देश के लिए शिक्षा उतना ही जरूरी है जितना न्जीवन के लिए वायु, प्रगति तभी हो सकती है जब प्रत्येक ब्यक्ति शिक्षित हो! किसी बस्तु या विचार के सीखने की इक्षा को ही शिक्षा कहते है दूसरे शब्दों में मन की आवाज़ को पहचानना व समझाना ही शिक्षा कहलाती है! शिक्षित मनुष्य ही श्वास्त्य समाज की नव रख सकता है, शिक्षा के शेत्र में भारत एक अग्रणी मन जाता रहा है जिनमे नागार्जुन, चरक, आर्याभात्ता व महात्मा बुद्ध जैसे लोंगो ने भारत को एक नै दिशा दिखाई वाही स्वामी विवेकानंद, विनोवा भावे व भाररेंदु हरिश्चंद व प्रेमचाँद जैसे महापुरुषों ने इशे प्रगतिशील युग में तब्दील कर दिया!
आज भारतीय लोकतंत्र मंदिर-मस्जिद,नेता-अभिनेता अदि मुद्दों में उलझा हुआ हईसी बीच ६३ सावन बीत गए हैन्मागर शिक्षा व प्रगति का हर सवाल संशय युक्ता नजर आता है!एक तरफ दिन दूनी रात चौगनी प्रगति करता भारत मगर दूसरी तरफ्वाही गुलाम भारत जो ट्रस्ट है भुखमरी, गरीबी,व अशिक्षा से; एक साथ दो भारत का मर्म रहस्यमयी है.शिक्षा को ब्यावाशय बना लिया गया हैओर सरेआम इसकी तावाहीनी की जा रही है! पैसा कमाने की अंधी दौर ने अयोग्य लोंगो कोशिक्षा के चेत्र में धकेल दिया है और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए लोग शर्त कट का सहारा ले कर किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं!
शिक्षा का गिरत अस्तर पूरे मानव जीवन के लिए खतरा बना हुआ है! सन-२००८ के बिश्वा बैंक सर्वेक्षण के अनुसार हर साल एक-करोड़ युवा ग्रादुअते होते हैन्मागर ९०% ग्रादुअते युवा नौकरी लायक नहीं हैं! इश बदतर इस्थित का जिम्मेदार पूरा समाज मन जा सकता है! देश के ९०% कॉलेज ग्राडिंग एक्साम में फेल हो जाते हैं जो काफी हैं इन सभी की कुँलिटी को बिस्तर देने में!

शिक्षा के प्रकार:-
शिक्षा कितने तरह की होती है और इसका उद्देश्य क्या है यह स्पस्ट करने की आवस्यकता है! शिक्षा कई तरह की होती है,
पहली शिक्षा माँ-बाप के द्वारा दी जाती है जो बहद बुनियादी मणि जाती हैबच्चे की भाभिस्य की ईमारत इसीपर टिकी होती है!
दूसरी शिक्षा या द्वतीय चरण किताबी ज्ञान है यानि स्कूलिंग इसमे बच्चो को बोलने की आदत व भले बुरे के पहचान की जानकारी दी जाती!
तीसरा चरण बच्चों को नैतिक, सामाजिक व पारिवारिक पहलुओं से अवगत कराया जाता है जिससे इनमे चतुएयता व सामजिक कर्तब्यों के निर्वहन की क्षमता का विकाश होता!
चौथे चरण में बच्चों कोअपने कर्तब्यों, देश व सामाजिक दैत्यों की गहन व बिस्तृत जानकारी दी जाती है, उनके रहन सहन, बत्चेत व बिभिन्न गतिबिधियों के बारे में बताया जाता है व उनके स्वयं के द्रिस्तिकोद से अवगत कराया जाता है!
इन सबके अलावां महत्वापूर्न्व पांचवा चरण प्रायोगिक ज्ञान भी है क्योंकि रति-रटाई चीजों को परखने के लिए यही उपयोग में लाया जाता है, अनुभव व प्रायोगिक ज्ञान पर खरा उतरने पर ही कोई बचा शिक्षित कहाकता है! इस प्रकार शिक्षा चतुर्मुखी विकाश का पर्याय है जो सही दिशा व संतुलित तरीके से चले तोपूरे विस्वा का कल्याण हो सकता है!

शिक्षा के लाभ:-
शिक्षा एक भर-रहित अस्त्र है जिससे अति सक्तिसली बस्तुओं का संघर किया जा सकता है, इसे न तो चोर चुरा सकता है न तो खंडो में बिभाजित किया जा सकता है, शिक्षित होने से हम ठगी के शिकार नहीं हो सकता और नहीं कोई हमारा दुरुपयोग कर सकता है! पारिवारिक विकाश शिक्षित सदस्यों से संभव है, स्वयं शिक्षित होने से परिवार का विकाश और क्रमशः समाज,राज्य,देश व इसके इतर पूरे बिश्वा का कल्याण संभव है!
किसी योजना का लाभ शिक्षित वर्ग ही ले पायेगा, शिक्षित रहने से जागरूकता आएगी और हम एक नए स्वर्ग रुपी कल्पित समाज को साकार रूप देने में समर्थ हो सकेंगें,अतः मानव उत्थान का एक मात्र उपाय शिक्षा है!

May 11, 2010

=> Co-education Bad or Good!!!

Meaning of Co-education:-

                           Co-Education means the teaching of both boys and girls in the same school and under the same roof. It also means imparting the same education to both the sexes without any distinction. This system of education aims at bringing boys and girls together. It allows free mixing of sexes without any inhibition.
                           The great Greek philosopher, Plato had propagated the system of co-education in the ancient times. He believed that co-education will create a feeling of comradeship between boys and girls. Plato was a great supporter of the education of women. Therefore, he wanted them to be educated with men in the same institutions. He felt that if men and women are taught together, it will develop their personality to the maximum. They will not feel any shyness from each other. He advocated that it was the only method in which both could become useful members of the society.
                           Plato in reality was much influenced by the co-educational system of Sparta, a city of Greece. There the boys and girls were given both the academic and physical education together. The girls and boys studied and played together. They were both taught the art of fighting, horse riding, archery etc. Thus the women of Sparta were not in any inferior to men.
                             In ancient India also, there was no segregation between boys and girls in the Aryan society. In the modern times, co-educational system is prevalent in Europe and USA. In India also, now-a-days more and more co-educational schools and colleges are being established.

Advantages of Co-Education:-
                             There are many advantages and hardly any disadvantages in the co-educational system of education. The first advantage is that if boys and girls are taught together, there will not be any need for opening separate schools for boys and girls. Co-education is an economical system, because both boys and girls can study in same schools and they can be taught by the same staff.
                             Secondly, boys and girls have to live together in the society in their later lives and if they are taught together from the very beginning, they can understand each other well. The girls will not feel shy in the presence of boys. The boys will also not tease the girls.
                            Again if they are taught together, it will create a sense of healthy competition among them. In this manner, they will work hard and pay serious attention to their studies. A feeling of comradeship will also develop between the boys and girls. The boys will not indulge in in eve-teasing and the girls will bot be afraid of boys. Thus they will have a balanced development of their personality.
                            It is also a common experience that the boys behave decently in the company of girls. They do not use rough and abusive language in the presence of girls. They also dress properly and talk mannerly. Similarly, the girls will also lose their fear of the boys if they are taught with them. On the other hand if boys and girls are taught in separate schools, boys misbehave with the girls. they boys always have a curiosity to know about them. But when they study together, their curiosity is satisfied and they do not consider girls as strange creatures.
                             Thus if co-education is introduced, there will be no problem of discipline among the students. In the western countries, there is no separation between boys and girls in the schools.

Dis-advantages of Co-Education:-
Of course certain conservative people criticize the system of co-education. According to them, this system is against our tradition. They also fear that co-education will develop immoral relationships between boys and girls. They believe that in this system both the boys and girls will be spoilt. But these arguments do not hold much water.
The fact is that there are so many advantages of co-education when boys and girls have to live later on as husband and wife, there is no need of separating them in schools. Rather it will give them the opportunity to come close to each other and understand each other fully. We should not believe in the morality of the medieval ages. The world is changing fast today and women are being given an equal status with men in the society. Let us, therefore accept the changing order and open more and more co-educational institutions in future and say good bye to separate institutions.