Mar 27, 2010

=> सपनों से डर लगता है तो ध्यान दें!!!

आप अनंत गहराई में गोता लगाते जा रहे हैं, कोई खूंखार दैत्य पीछा कर रहा है, बेतहाशा भागे जा रहे हैं, लकवा मार गया है, चिल्लाना चाहते हैं पर आवाज नहीं निकलती, किसी अहम अपॉइंटमेंट में लेट हो गए हैं या आपका सबसे करीबी मर रहा है ... ये कुछ ऐसे बुरे सपने हैं, जिनसे हो सकता है आप कभी दो-चार हुए हों और बहुत मुमकिन है कि सपना टूटते ही आप अचानक उठ गए हों और खुद को पसीने से तर पाया हो। लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ऐसे सपनों को कभी महसूस ही न किया हो। वैज्ञानिक इन बुरे सपनों के पीछे की हकीकत जानने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने एक सर्वे किया, जो बताता है कि इन दु:स्वप्नों का सीधा नाता आपके रोजमर्रा के कामकाज से नहीं है, बल्कि ये बहुत कुछ आपकी भावनाओं और चिंताओं से जुड़ाव रखते हैं।
शिकागो स्थित इंटरनैशनल असोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ ड्रीम्स ने करीब 2000 महिलाओं और पुरुषों से उनके सपनों के बारे में पूछा। इस दौरान इनके सपनों की थीम और उनकी भावनाओं व डर के बीच एक लिंक देखने को मिला। इनसे पता चला कि हर 10 में एक व्यक्ति को साल में बहुत बुरे सपने आते हैं। हर 20 में एक तो हर पखवाड़े ऐसे सपनों से डरकर उठ जाता है। अच्छी बात यह है कि सवेर् में 48 पर्सेंट लोगों ने दावा किया कि उन्हें कभी भी बुरे सपने नहीं आए।
डेली मेल के मुताबिक, बुरे सपनों में कम उम्र में बालों का झड़ना यानी एकदम गंजा हो जाना, दांतों का गिर जाना, बहुत ही कम उम्र में एग्जाम में बैठना भी काफी कॉमन है। पुरुषों में नौकरी से निकालने का डर सबसे ज्यादा होता है, तो महिलाओं में प्रियजन को खोने और यौन उत्पीड़न का डर सबसे ज्यादा होता है। वैसे गंजे होने या दांत टूटने का ज्यादा डर भी महिलाओं को ही होता है। इनमें नैन-नक्श को खो देना भी बुरे सपनों में अहम पायदान पर आता है। महिलाओं को बुरे सपने ज्यादा आने की वजह हामोर्न से जुड़ी है। वे अक्सर पीरियड से पहले हिंसक सपनों को देखती हैं।
डॉ. श्रेडल कहते हैं कि रात में किसी दैत्य के पीछा करने का सपना दरअसल यह दिखाता है कि दिन में आपको ऐसा काम करने को कहा जा रहा है, जो आपके मन का नहीं है। ड्रीम एक्सपर्ट डेविना मैकेल कहती हैं कि बुरे सपने आपकी जिंदगी का अनसुलझा पहलू हैं या कुछ ऐसी पहेलियां जो सुलझ नहीं सकीं। आप दिन में अपने आप से झूठ बोल सकते हैं, पर रात में सपनों में नहीं।

=> Science News

अमेरिकी रिसर्चरों ने डेंगू और चिकनगुनिया रोकने का एक नायाब तरीका खोज निकाला है। वह इसके लिए मच्छरों के सू-सू करने पर रोक लगाने जा रहे हैं। अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट कहते हैं कि खून पीते समय मच्छरों को बहुत तेजी से अपने शरीर से तरल पदार्थ को यूरीन के रूप में निकालना पड़ता है। ऐसा करके वे अपने शरीर में मौजूद तरल और नमक के बैलेंस को बनाए रखते हैं। अगर वे ऐसा न करें तो मर जाएंगे।
एक टीम ने पाया कि अगर डेंगू फैलाने वाले एडिस इजिप्टी मच्छरों को ऐसा करने से रोक सकें तो उनके शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाएगी और वे भारी होने की वजह से उड़ नहीं पाएंगे। ऐसे में या तो वे अपने शिकार के हाथों मारे जाएंगे या खुद शिकार बन जाएंगे। इसके लिए रिसर्च टीम ने उनके शरीर में एक ऐसे प्रोटीन खोजा है जो उन्हें मूत्र त्यागने को प्रेरित करता है।
वैज्ञानिक अब ऐसी दवा बनाने की फिराक में हैं जो उनके इस प्रोटीन को काम करने से रोक सके और मच्छरों का काम तमाम हो सके। ऐसा में न रहेगा मच्छर और न होगा डेंगू, चिकनगुनिया।

Mar 15, 2010

=> आखिर क्यों नहीं जिम में बनती बॉडी

सलमान खान, जान अब्राहम, आमिर खान ये कुछ नाम हैं जिन्हें लोग न सिर्फ एक कलाकार के रूप में जानते हैं बल्कि उनकी आकर्षक बॉडी के लिए भी जानते हैं। कई युवा इनके जैसी बॉडी बनाने की ख्वाहिश लेकर जिम तो पहुंचते हैं पर बिना बॉडी बनाए निराश होकर लौट जाते हैं। आज युवा जंक्शन में आपको मैं बताता हूं कि आखिर क्यूं नहीं बना पाते युवा जिम में बॉडी।

अक्सर जिम ज्वाइन करने वाले युवा बंदे के जिम में प्रवेश करते ही उसे ऐसे लोग नजर आते हैं जो बड़े-बड़े डंबल से व्यायाम कर रहे होते हैं। उनके सामने छोटा डंबल उठाने में उस नए व्यक्ति को शर्म आती है। पर वह बड़ा वेट उठा नहीं सकता क्योंकि उसमें इतनी शक्ति (स्टेमना) नहीं होती। ऐसे में वह ट्रेनर के पास जाकर अपने डाइट के बारे में पूछता है जवाब में उसे बॉडी सप्लीमेंट के रूप में एक सलाह मिलती है। पर रिजल्ट दो दिन में तो नहीं बदल सकता।

बेचारा युवा निराश होकर हतोत्साहित भरे मन से जिम में व्यायाम शुरू करने के बाद शुरू हुई पीड़ा से कराहकर अलविदा हो जाता है। यही कारण है कि बहुत सारे युवा जिम में न तो बॉडी बना पाते हैं न ही अपने को स्वस्थ रखने के लिए एक जरूरी व्यायाम कर पाते हैं। हां कुछ युवक ऐसे भी हैं जो जिम लड़कियां देखने के मकसद से आते हैं। जिम में व्यायाम के बजाय अपनी बातों और अदाओं से लड़कियों को रिझाने के प्रयास में समय बिताकर चले जाते हैं। पर भइया! सिर्फ जिम में जाने से बॉडी नहीं बन जाती न ही उसका तब तक कोई फायदा होता है जब तक कि उसके लिए आपके मन में समर्पण न हो।

जब ये सब बता दिया तो आइए ये भी ज्ञान ले लीजिए जब आप जिम ज्वाइन करें तो सिर्फ मन में ये ठान लें कि नियमित तौर पर एक निश्चित समय पर जिम जाएंगे। व्यायाम की शुरुआत ट्रेनर के कहे अनुसार छोटे डंबल और कम वेट से करें। अपने पूरे व्यायाम का एक चार्ट तैयार करें। अगर आप प्रोफेशनल तौर पर बॉडी नहीं बनाना चाहते तो एक दिन में सिर्फ एक बॉडी पार्ट करें। एक सप्ताह में छह दिन का शेड्यूल तैयार करें। इसमें बैक, शोल्डर, चेस्ट, बाईसेप्स, ट्राईसेप्स और लेग्स शामिल होने चाहिए। रविवार का दिन आराम का होना चाहिए। इन सभी बॉडी पार्ट के साथ 15 से 20 मिनट का समय एब्स को दें। ऐसा करके आप भी आदर्श काया के धनी हो सकते हैं।

अब आइए आपको कुछ ऐसी घटनाओं से रूबरू करवाते हैं जिससे पता चलता है कि युवा जिम के प्रति कितनी गंभीरता दिखाता है। जब ओम शांति ओम आई तो नौजवानों के अरमानों को एक प्रेरणा मिली हर कोई शाहरुख जैसी बॉडी बनाने को बेताब नजर आने लगा। आप को जानकर हैरानी होगी इस फिल्म के रिलीज होने के दो तीन दिन बाद मेरे जिम में खड़े होने की जगह नहीं बची। मैंने अपने ट्रेनर से सवाल किया भाई पिछले दो दिनों में यहां कितने नए बॉडी बनाने के इच्छुक नौजवानों ने प्रवेश लिया? जवाब मिला 120। इस सवाल और इसके जवाब के बीच आई यह संख्या यह बताने के लिए पर्याप्त है कि बॉडी बनाने की चाहत रखने वाले किस कदर देश भर के जिम में उस समय सिक्स पैक्स की चाहत लेकर पहुंचे।

मात्र दो दिन में जिम की कमाई अपने सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़ चुकी थी। पर इस रिकॉर्ड के जश्न के थमने से पहले इस संख्या में से 80 फीसदी लोग जिम से डिसअपीयर हो गए। कारण ये था कि उन्हें व्यायाम की महिमा समझ में आ गई साथ ही शाहरुख की मेहनत का अंदाजा भी उन्हें लग गया। कुछ ने तो इसी दौरान यह भी प्रतिक्रिया दी कि हमें कौन सा फिल्म में हीरो बनना है, तो कुछ ने यह कहकर जिम को अलविदा कहा कि भाई हम तो खाते पीते घर के लोग हैं हम क्यों अपनी सेहत खराब करें।

खैर समय बीता धारणाएं बदलीं, शाहरुख के सिक्स पैक्स का जादू भी लोगों में उसी तरह बासी हो गया जैसे कि दो दिन पहले बना खाना रेफ्रीजरेटर में न रखने से बासी हो जाता है। यह बात यहां समझ में आई की आज का युवा पाना सबकुछ पाना चाहता है पर उसमें उसे मेहनत न करना पड़े उसकी यह पहली शर्त होती है। बॉडी बनने पर किस तरह से पर्सनालिटी निखरती है इसका अहसास युवाओं को तब होता है जब वे किसी फिल्म में किसी हीरो के डोले-सोले से साक्षात्कार करते हैं। पर अब इन फिल्म वालों को कौन समझाए कि इससे हमारे युवाओं को कितनी मुश्किल उठानी पड़ती है।

ओम शांति ओम के बाद एक और खान ने नए बॉडी को तरासकर गजनी फिल्म के माध्यम से लोगों के सामने परोस दिया। पर इस बार जिम वाले सतर्क हो गए थे उन्हें लगा कि जब आमिर खान बनने का भूत लोगों पर सवार होगा तो उसकी अच्छी कीमत क्यूं न ली जाए। इस बार फिल्म के साथ-साथ जिम के पोस्टर भी तैयार हुए, जिसमें कुछ यूं लिखा गया था। आमिर जैसी बॉडी बनाएं सिर्फ दो महीने में..। मुझे यह नहीं पता कि इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितने कमाए पर यह जरूर पता है कि गजनी की आग में एक बार फिर जिमों में कुछ दिनों की हरियाली आई। पर इससे मुझे सत्य का ज्ञान हुआ और पता चला कि इसलिए नहीं बना पाते ढेर सारे युवा जिम में बॉडी।