Jun 2, 2011

=> प्रेम का जादुई अहसास


प्रेम कई तरह से आपको छूता है, स्पर्श करता है.
आपकी साँसों को महका देता है।
और यह सब इतने महीन और नायाब तरीकों से होता है
कि कई बार आप उसे समझ नहीं पाते।
यह एक तरह का जादू है।
यह कभी भी, कहीं भी फूट पड़ता है, खिल उठता है, महक उठता है।
इसी जादुई अहसास से जब प्रेमी अपनी आँखों से जो कुछ भी देखता है
उसे वह प्रेममय जान पड़ता है।
कभी-कभी कोई बहुत ही सादी सी बात दिल को छू जाती है।
और मामला यदि प्रेम कविता को हो तो इसमें सादी सी बात कुछ गहरे असर करती है।
दिल में गहरे उतरकर देर तक गूँजती रहती है।
उस गूँज से आप कुछ खोए-खोए से रहते हैं।
जैसे बहुत ही गहरी और हरे रंग में खिली
किसी घाटी में छोटे छोटे पीले फूलों के बीच आप सब कुछ भुलाए बैठे हों।
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एक कवी की कुछ पंक्तियाँ पेस कर रहा हूँ-
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एक ऐसी भी घड़ी आती है
जिस्म से रूह बिछुड़ जाती है

अब यहाँ कैसे रोशनी होती
ना कोई दीया, ना बाती है

हो लिखी जिनके मुकद्दर में खिजां
कोई रितु उन्हें ना भाती है

ना कोई रूत ना भाये है मौसम
चांदनी रात दिल दुखाती है

एक अर्से से खुद में खोए हो
याद किसकी तुम्हें सताती है

=> अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार

बिना टिकट के ट्रेन में चले पुत्र बलवीर
जहाँ ‘मूड’ आया वहीं, खींच लई ज़ंजीर
खींच लई ज़ंजीर, बने गुंडों के नक्कू
पकड़ें टी. टी. गार्ड, उन्हें दिखलाते चक्कू
गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार बढ़ा दिन-दूना
प्रजातंत्र की स्वतंत्रता का देख नमूना !

    

          - काका हाथरस्सी का हास्य काव्य