Aug 24, 2012

=> इस शहर में धड़ल्ले से हो रही है पत्नियों की अदला-बदली


                       शादी होने के बाद एक महिला से उनका पति यही कामना करता है कि उनकी पत्नी सदा पतिव्रता का धर्म निभाएगी। मगर जब एक पति ही अपनी पत्नी को अपने दोस्त के साथ संबंध बनाने की कहे तो उक्त महिला क्या करे।
                      वह भी इसलिए कि उक्त युवती के पति ने शादी से पहले अपने दोस्त की पत्नी के साथ संबंध बनाए थे। जिले में पिछले तीन महीने में इस तरह के तीन सनसनीखेज मामले आए हैं। खास बात यह है कि ये तीनों मामले हाईप्रोफाइल की बजाय मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं।

आगे आएं पीड़ित
महिला प्रोटेक्शन अधिकारी हरबंस कौर ने कहा कि इस तरह के मामले हमने हाईप्रोफाइल परिवारों के बारे में तो सुने थे, लेकिन उनकी ओर से भी कभी शिकायत नहीं आई। मगर ये तीनों युवतियां तो मध्यमवर्गीय परिवारों से संबंधित हैं। आखिर लोग अपनी पत्नियों और उनकी भावनाओं की कद्र क्यों नहीं कर रहे यह बात समझ से परे है। इसके लिए पीड़ित महिलाओं को समय रहते सही जगह पर शिकायत करनी होगी।
वहीं पीड़ित महिलाओं का कहना है कि वे नहीं चाहती कि उनकी समस्या लोगों के सामने जाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो समाज में इस तरह की प्रवृत्ति कम होने की बजाय और बढ़ेगी। इसलिए इन पर अंकुश लगाने के लिए पीड़ितों को खुद आगे आना होगा।

किस्सा नंबर 1
शादी के तुरंत बाद डाला दबाव
                    राजू की शादी एक साल पहले ही हुई है। वह अपनी पत्नी संजना से कह रहा है कि तुम्हें उसके दोस्त राजन के साथ शारीरिक संबंध बनाने होंगे। संजना ने मना किया तो उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। संजना को न चाहते हुए भी गैर मर्द के साथ हम बिस्तर होना पड़ा। वहीं उसका पति अपने दोस्त की पत्नी से हम बिस्तर हो रहा था। आखिर उसने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया। 

किस्सा नंबर 2 
आखिर अदालत में उगल दिया सच
                     सतवंती की शादी को चार साल हो गए। शादी के दो साल बाद पति ने दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह उनके दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाए। विरोध पर उसे पीटा गया। उनका मामला भी अदालत पहुंचा। वहां उसने पति की करतूत पर जुबान खोल दी। उसने बताया कि उसके पति ने दोस्त की मर्जी से उसकी पत्नी के साथ इस शर्त पर संबंध बनाए कि वह उसे भी पेश करेगा। 

=> आपका पासवर्ड तो नहीं हुआ हैक, जानने के लिए यहां करें लॉग इन


                         आज के दौर में ढेर सारे काम ऑनलाइन किए जाने लगे हैं। इस फेर में ढेरों यूजर नेम समेत पासवर्ड बनाने पड़ते हैं। इन्हें न सिर्फ याद रखना चुनौती है, बल्कि किसी आपात स्थिति में परिवार तक इनकी पहुंच हो, यह सुनिश्चित करना भी काफी मुश्किल है। लेकिन इसका रास्ता दिखाया है एक कंपनी क्वेस्टली ने। 
                         वसीयत की तरह अपने सारे पासवर्ड परिवार के सुपुर्द करने के लिए आपको वेबसाइटwww.passmywill.com पर लॉग इन करना होगा। यहां आप ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन से लेकर अन्य महत्वपूर्ण साइट्स के सारे पासवर्ड रख सकेंगे। ताकि आपके न होने पर परिवार के सदस्यों तक उनकी पहुंच हो सके। इस सेवा के लिए कंपनी आपसे निर्धारित शुल्क लेगी। 

हैक तो नहीं पासवर्ड
                 कैसे पता चलेगा कि आपका पासवर्ड किसी साजिश का शिकार हुआ है? इसके लिएwww.shouldichangemypassword.comपर जाना होगा। इसमें ई-मेल डालना होगा। इसके बाद साइट हैकरों द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारियों के डाटा बैंक को खंगालेगी। अगर ई-मेल अकाउंट के साथ कोई छेड़-छाड़ की गई है, तो वह आपको जानकारी देने के साथ पासवर्ड सुरक्षित बनाने के टिप्स भी देगी।

सुरक्षित पासवर्ड
                    यह पता लगाने का एक जरिया माइक्रोसॉफ्ट पासवर्ड चैकर (http://goo.gl/BB0zC)है। साइट पर दिए गए बॉक्स में आपको अपना पासवर्ड टाइप करना होगा। इसके बाद पता चल जाएगा कि पासवर्ड कमजोर, सुरक्षित या अति सुरक्षित है। अगर साइट पासवर्ड कमजोर बताए, तो उसे मजबूत बना लें।

बनाएं सेफ पासवर्ड
                     ई-सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो अब पास‘फ्रेज’ का जमाना है। इससे हैकरों को पासवर्ड चुराने में दिक्कत आती है। यानी एक ऐसा वाक्य चुनें जिसे आप याद रख सकें। इसे और जटिल बनाने के लिए शुरुआती कुछ अक्षर बड़े और बाद के छोटे कर लें। साथ में नंबरों का भी प्रयोग करें।

कैसे याद रखेंगे

                      इस तरह बने बेतुके पास‘फ्रेज’ को याद रखना खासा मुश्किल होगा। ऐसे में मददगार बनेगा पासवर्ड मैनेजर। इसके लिए लॉग इन करें www.lastpass.comजो एक फ्री सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की सुविधा देता है। यह सॉफ्टवेयर आपके सिस्टम और वेब ब्राउजर के साथ मिल कर काम करेगा। शुरुआत में आपको लास्टपास वेबसाइट पर अपने ई-मेल से एक अकांउट खोलना होगा और एक मास्टर पासवर्ड देना होगा। लॉग इन के बाद अपने अकाउंट में सारे पासवर्ड डाल दें। इसके बाद आप जब भी संबंधित साइट खोलेंगे, तो पासवर्ड अपने आप ही दर्ज हो जाएगा। 
                       इस सुविधा का एक रोचक पहलू यह भी है कि यह जरूरत पड़ने पर पासवर्ड को और सुरक्षित बना कर उसे स्टोर कर लेगा। यही नहीं, सारे पासवर्ड आपके पीसी तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आप कहीं से भी इस सुविधा का फायदा उठा सकेंगे। यह साफ्टवेयर इंटरनेट एक्सप्लोरर समेत फायरफॉक्स, क्रोम जैसे ब्राउजर्स और विंडोज 7, सिंबियन, ब्लैकबेरी जैसे ओएस प्लेटफॉर्म पर भी चलेगा। इसके अलावा रोबोफॉर्म(www.roboform.com)भी यही सुविधा देता है, लेकिन यहां आपको इसके लिए कुछ शुल्क देना होगा।

पासवर्ड वॉल्ट
 अगर आपको विभिन्न पासवर्ड याद रखने में दिक्कत आती है, तो आपके लिए पासवर्ड वॉल्ट के रूप में भी एक विकल्प है। मान लीजिए आप विंडोज 7 पर काम करते हैं, तो आप इसके क्रेडेंशियल मैनेजर की सुविधा लें। इस पर आप विभिन्न साइट्स के यूजर नेम और पासवर्ड सुरक्षित रख सकते हैं। ये पासवर्ड के लिए वॉल्ट की तरह काम करता है। विंडोज 7 पर इस तक पहुंचने के लिए आपको सिर्फ क्रेडेंशियल मैनेजर टाइप भर करना होगा। मोजिला फायरफॉक्स पर भी मास्टर पासवर्ड वॉल्ट उपलब्ध हैं। इसके अलावा पासवर्ड सेफ(http://passwordsafe.sourceforge.net) और कीपास (www.keepass.info)भी यह सुविधा देता है।

Aug 21, 2012

=> मंदी के दौर में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर करें रुख

                          महंगाई के कारण लोगों ने खरीदारी का विचार त्याग दिया है या उचित समय का इंतजार कर रहे हैं। इससे खासकर शहरों में उत्पादों की बिक्री प्रभावित हुई है। वास्तव में इस समस्या का समाधान हमारे देश के ग्रामीण इलाकों या शहरों में तब्दील होते कस्बों या गांवों में निहित है। इनकी संख्या देशभर में 5000 के लगभग है। यहां के लोग बड़े शहरों में खरीदारी के लिए आते हैं। इसे देखते हुए पैराशूट ब्रांड तेल बनाने वाली मैरिको लिमिटेड की सीईओ सौगता गुप्ता की बात विचारणीय हो जाती है। उनका मानना है कि उभरते शहरों की आबादी खर्च करने को तैयार है, लेकिन एफएमसीजी उत्पाद बनाने वाली कंपनियां उन तक पहुंच नहीं पा रही हैं। इसे समझते हुए ही कंपनी ने खास रणनीति बनाई है।

                          भारत के ग्रामीण इलाकों के अलावा दुनिया के कुछ ऐसे देश भी हैं, जो उचित उत्पादों पर पैसा खर्चने के लिए तैयार हैं। सब-सहारा देश, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीकी महाद्वीप इत्यादि कुछ ऐसे केंद्र हैं, जहां लोग मध्य कीमतों के कंज्यूमर उत्पादों की राह देख रहे हैं। अब जरा एक नजर डालिए त्वरित सेवा देने वाले रेस्त्रां व्यवसाय पर। इनके लिए छोटे का मतलब ही बड़ा है। इसी सिद्धांत पर वे व्यवसाय में छाई मंदी को छांटने का प्रयास कर रहे हैं। इन्होंने समोसों को ऐसा आकार दिया, जो पांच रुपए के लिहाज से मुफीद हो। इसी तरह पिज्जा, कचौरी, सैंडविच, बर्गर को भी दस रुपए के खांचे में फिट करने वाला आकार दिया गया। भले ही इनका आकार छोटा हो, लेकिन लोगों की तेज भूख शांत करने में यह अब भी सफल हैं। इसी तर्ज पर पूरी थाली के सत्तर रुपए कीमत वाले लघु संस्करण की बिक्री में सत्तर फीसदी का इजाफा देखा गया है।

                            डोमिनोज और मैक्डोनल्ड भी खाद्य उत्पादों के लघु संस्करण पेश कर रहे हैं, जो लोगों की जेब में समा सकें। यद्यपि इन शृंखलाओं में खाने को शेयर करने की प्रवृत्ति कम हुई है, लेकिन वैयक्तिक तौर पर खरीदारों की संख्या बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि इन्होंने तुरंत खाने की इच्छा रखने वालों के लिए कम कीमत में उत्पाद पेश किए हैं। भारत में मैक्डोनल्ड के 257 रेस्त्रां में से दस फीसदी हाईवे पर स्थित हैं। कंपनी के प्रबंधकों ने अपने ब्रांड को इन जगहों पर नए सिरे से स्थापित करने की रणनीति बनाई है। हाईवे पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली आबादी की शिरकत बढ़ी है। अब इन हाईवे आउटलेट से कंपनी को बीस फीसदी तक आय हो रही है।

                            डोमिनोज और मैक्डोनल्ड सरीखे ब्रांड के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी छवि को बदलना है। अभी तक इसके खाद्य उत्पादों को कुलीन तबके से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब यह ब्रांड इन्हें आमजन तक पहुंचाना चाहते हैं। गौरतलब है कि 87 फीसदी भारतीय सड़क मार्ग से यात्रा करते हंै। ऐसे में इन जैसे ब्रांड के लिए जरूरी हो गया है कि वे त्वरित खाद्य पदार्थ देने वाले उत्पाद के तौर पर सड़क किनारे अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएं। इससे ही मध्य वर्ग कहीं आसानी के साथ इनसे जुड़ाव स्थापित कर पाएगा। इसी रणनीति पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे वैश्विक ब्रांड भी अमल कर रहे हैं। कॉफी वल्र्ड, पिज्जा कॉर्नर, क्रीम एंड फज ने इस रणनीति पर अमल करते हुए ही अपनी बिक्री में 15 फीसदी का इजाफा किया है। यानी आकार में छोटा और कीमत में सर्वसुलभ उत्पाद लोगों तक तेजी से पहुंच बना रहा है।