Oct 19, 2013

=> 'नन्ही कलम' पर विजिटर्स की संख्या बढी

आप सभी मित्रों को यह जानकर अति प्रसन्नता होगी की मेरे ब्लॉग www.trinathm.blogspot.com की वर्ल्ड वाइड रेटिंग 14,040,676 पर पहुँच गयी है और यूएस में 14,078,676 पर पहुँच चुकी है, 


इस बात की जानकारी गूगल पर trinathm के नाम से सर्च करने पर आसानी से मिल जाएगी। यह सफलता आप सभी के निरंतर सहयोग से प्राप्त हुयी है जिसके लिए मै आप सबका तहेदिल से आभार प्रकट करता हूँ और आशा करता हूँ की इसी तरह आप सब अपना प्रेम और आशीष देते रहेंगे।
मुख्य डिटेल्स निम्नवत हैं-
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आमंत्रण: 
            आप सभी बंधुओं से निवेदन है की नन्ही कलम के लिए अपने लेख सुझाव और रचनाओं को मेरे ई-मेल tnraj007@gmail.com पर भेजने की कृपा करें, पसंद आने पर जनहित में नन्ही कलम के जरिये जन-जन तक पहुंचाने  का प्रयास किया जायेगा। 

Oct 7, 2013

=> मेरठ में महिलाओं के खिलाफ बढता अपराध



सफेद पेश कददावर नेता, खाकी धारी तथा गुण्डे, मवालियों का आपसी तल मेल इस प्रकार स ेचल रहा है की मेरठ में पिछले डेढ़ सालों में कुल 1016 घटनाओं चुकी है। ये घटनाए जनवरी 2012 से जून 2013 तक की है। चार हजार से ज्यादा घटनाएं महिलाओं के साथ हिंसा, छेड़छाड़ आदि की दजौ हुई है। आरटी आई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के द्धारा माॅगे गये जवाब में यह खुलासा हुआ है। 
लेडी गैंग खुद छेड़खानी की शिकर:- पीएल जी यानी पुलिस लेडी गैंग एसएसपी द्धारा गठित आॅफिसों में तैनात महिला पुलिस कर्मियों का गु्रप है जो सादी वर्दी में शहर के चैराहो, स्कूल-कालेजों के बाहर तैनात रहती है मगर मजे की बात तो यह है की पीएलजी स्तयम् छेड़खानी का शिकार हो जाती है। और मनचले तेजी से भाग निकलते है।

=> सभ्यता की पराकाष्ठा:

मथुरा जिला में लगे एक सरकारी विज्ञापन के बोर्ड पर सरकार के सभ्य और क्वालिफाइड व्यक्तियों द्वारा लिखित यह स्लोगन सरकार के भावी सोच पर सोचने को मज़बूर कर रहा है। 

=> Happy Navaratri




Oct 6, 2013

=> लड़कियों ने फिर मारी बाज़ी


वाद-विवाद प्रतियोगिता में बच्चों की तन्मयता और बेबाक टिप्पड़ी के सभी हुए कायल
           "राष्ट्रीय एकता में जातिवाद और धर्म बाधक तत्त्व?" विषय पर एक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन 'सूर्योदय कल्याण समिति' की तरफ से आर्य समाज सदर मेरठ में किया गया? कार्यक्रम की शुरुआत समिति की सचिव सुधा शर्मा ने किया तथा अध्यक्षता लक्ष्मी नारायण वशिष्ठ ने किया। कार्यक्रम में मेरठ के कई स्कूल व विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
           अपनी अच्छी प्रस्तुति और संवाद शैली के कारण आर्य कन्या इंटर कालेज की छात्रा भानु ने प्रथम जबकि बीके माहेश्वरी स्कूल की छात्रा हिना सैनी ने द्वतीय स्थान हासिल किया, इसी क्रम में स्माइल नेशनल महिला महाविद्यालय की छात्रा आफरीन गाँजी ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस दौरान प्रतिभागियों के वक्तव्यों का अर्थ यह निकला की जातिवाद और धर्म राष्ट्रीय एकता में बिलकुल भी बाधक नहीं हैं, यदि हर मनुष्य शिक्षित और जागरूक हो जाए। एक छात्रा की टिप्पड़ी, "बेटा अपने बाप से क्यों लड़ता है?" से सभागार में उपस्थित सभी चकित हो गए, जबकि दूसरी छात्रा ने टुकड़ों में बटकर अपनी ऊर्जा को एकत्रित न कर पाने का कारण जाती और धर्म को ही बताया।
मुख्य अतिथि सुशील बंसल ने विजेताओं को प्रतीक चिह्न व प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।      
          निर्यायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार त्रिनाथ मिश्र, समाजसेविका गरिमा त्यागी और कवि व साहित्यकार हरी नारायण दीक्षित ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया तथा प्रतिभागियों के हर पहलू को  परखते हुए उनके प्रतिभा के साथ निर्णय किया । प्रतिभागियों के हौसला बढाने हेतु अतिथि के रूप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ नील कमल, मेरठ बार एसोसिएसन की संयुक्त मंत्री निशा तायल सहित सैकड़ों की संख्या में बुद्धिजीवियों की उपस्थिति बनी रही।

Jul 24, 2013

=> छात्रा रेप कांड ले सकता कभी भी बड़ी चिंगारी का रूप

-दो आरोपियों को गिरफ़्तार न करना, 
-घटना में प्रयुक्त पिस्टल के लाइसेंस को निरस्त न करना 
-मेडिकल रिपोर्ट को दोबारा कराना बन रही है मुख्य वजह


त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। शास्त्रीनगर रेप कांड के बाद विरोध् की ज्वाला धधक रही है। मन में उठने वाली यह चिंगारी कभी भी बड़ा रूप ले सकती है। दिल्ली कांड के बाद से लोगों के मन में पुलिस व प्रशासन के प्रति विश्वास खत्म हो गया है। आक्रोशित लोगों को संतुष्ट कर पाने में प्रशासनिक अमला नाकाम हो रहा है। सपफेदपोश कददावर नेताओं के बड़बोलेपन के आगे आरोपियों की करतूते बहुत छोटी बन गई है। खरीद फरोख्त व सेटिंग का आरोप लगाते हुए जनता प्रदर्शन कर रही है। बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस तरह की घटनाओं पर निष्पक्ष कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती?
               दिल्ली की दामिनी केस के बाद मेरठ में इस तरह के मामले का होना कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि मानवता मर गई है। चलती गाड़ी में गैंगरेप का यह घिनौना और शर्मशार कर देने वाला कृत्य ऐसे व्यक्तियों के समुह द्वारा किया गया जो खुद को समाज का सेवादार मानते है। हवस मिटाने के लिए ये वहशी दरिंदे किसी भी हद तक जाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते और विरोध् करने पर घर में घुसकर जान से मारने की ध्मकी देते है। सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि इतना सब होने के बावजूद थाने पर जाने पर पीडित को खाकी के सौतेल व्यवहार का खामियाजा भुगतना पड़ता है।

              दूसरों की तरफ उंगली उठाने वाले सपफेदपोश जनप्रतिनिध किसी भी विपक्षी मामले पर जमकर नारेबाजी ड्रामेबाजी और उल्टपफेर करते है। मगर वहीं ज्ञापन सौंपने के शौकिन इन नेताओं के घर का मामला फंसते ही चुप्पी साध् लेते है। क्या अपने घर के लोगों का नाम प्रकाश में आते ही इन नेताओं की मानवता को लकवा मार जाता है? इनके द्वारा ऐसे ही दूसरे मामलों पर किया गया विरोध् दिखावा मान लिया जाए तो बुरा नहीं होगा। आज एक बेटी की इज्जत गयी है कल दूसरे की बारी होगी, अगर हम एक न हुए। अगर हमने विरोध् न किया तो अमित भड़ाना जैसा कोई अन्य दरिंदा अपने अन्य कददावर साथियों के साथ किसी की बहन, बेटी व बहू को अपने वहशीपन का शिकार बना सकता है। 


सबूत मिटाना चाह रही है पुलिस-

                  आक्रोशित त्यागी समाज के लोगों ने पुलिस पर लापरवाही और रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। सड़क को जाम कर दिया। उसके बाद महिलाओं के नेत्तृव में त्यागी समाज कमिश्नरी पहुंचा, जहां पर दो अन्य आरोपियों के गिरफ्रतारी की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन ध्रने का ऐलान किया। महिलाओ ंने खाकी को बिक जाने का हवाला देते हुए बताया कि पुलिस की मिली भगत से दो अन्य आरोपियों को गिरफ्रतार न करना नौचंदी पुलिस के ईमान पर सवाल खड़ा करता है! दुबारा पैनल का घटन कर मेडिकल कराना भी पुलिस के खेल को सापफ जाहिर करता है। इसके अलावा घर पर पहुंचकर पीडित छात्रा के परिजनों को धमकाने वालों पर उपयुक्त कार्रवाई न करना भी पुलिस को कठघरे में खड़ा करता है। कमिश्नरी पार्क में प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना था कि जिस लाइसेंसी पिस्टल से छात्रा को अगवा कर रेप किया गया तथा परिजनों को धमकाया गया वह पिस्टल एवं लाइसेंस की गहनता से जांच करे और लाइसेंस को फौरन निरस्त करे। 

Jul 14, 2013

=> भुवनेश्वर के ‘भाव’ चढ़े

मेरठ। क्रिकेटर भुवनेश्वर कुमार के भाव सातवें आसमान पर हैं। वेस्टंडीज से लौटे ‘भुवी’ को देखने के लिये लोग बेताबी से इंतजार कर रहे थे, मगर उनके रवैये से छुब्ध् लोगों के हाथ सिपर्फ निराशा लगी। ट्रांइगल सिरीज खेलकर अपने घर लौटे भुवनेश्वर ने मीडिया से मिलने को मना कर दिया, तथा दरवाजा बन्द कर अपने ‘भाव’ चढ़ने का संकेत दे दिया।
बुलंदियों को छूने के बाद भुवनेश्वर के इस वर्ताव से परेशान लोगों ने यहां तक कह दिया ‘प्रवीण के भी भाव इसी तरह चढ़े थे’ और उनके घर से उलटे पांव लौट गये।

नहीं घुसने दिया मीडिया को:

प्रवीण कुमार से मंत्रा लेकर शायद भुवनेश्वर ने यह कदम उठाया, मगर बात कुछ भी हो मामला है-निराशाजनक, भुवी के पिता ने मीडिया को भी घर से बाहर का रास्ता दिखाते हुए कह दिया की वह अभी सो रहा हैं, बाद में आना। इसी तरह का व्यवहार क्रिकेटर प्रवीण कुमार का भी रहा था। इसी रवैये के चलते प्रवीण कुमार की छवि धूमिल हो चली थी और अब भुवी भी चल पड़े उसी राह पर.............खैर..............।

Jul 12, 2013

=> बारिश के बहाने

नगर निगम के दावे बहकर घुसे घरों में

शायद इससे बेहतर मौका नहीं मिलता आपको यह बताने का, की चाक-चैबन्द व्यवस्थाओं की दुहाई देने वाले निगम अधिकारी के आलसी रवैये से त्रस्त मानसून ने इनकी यादों व वादों का पिटारा एकदम से सबको दिखा व बता व दिखा भी दिया।

त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। सुबह से खराब मौसम ने जब अँगड़ाई ली तो थोड़ी ही देर में नज़ारा बदला हुआ मिला। पहले बूँदा-बादी फिर झमाझम पानी के बरसने से चन्द लमहों में ही नगर-निगम के आला अधिकारियों की पोल खोलनी शुरू कर दी। जगह-जगह जल भराव के नजारों से लोग स्तब्ध् हो गये। बच्चों को मज़ा देने वाली बारिश ने थोड़ी देर में ही अपना रोबीला रूख अख्तियार कर लिया और नाले की सफाई तथा स्वच्छ मेरठ का तमगा दिखाने वाले नगर-निगम के वो तमाम दावे बहकर लोगों के घरों में पहुंचने लगे, जो उसने आम जनता से कर रखे थे। 
गालियों में हुआ जलभराव: 
           बारिश का नजारा तो देखने लायक था ही साथ ही गलियों में नौका-संचालन की स्थिति सामने आते ही वातावरण खट्टा-मीठा हो गया। मगर इस चटखारे वाले पानी से भी निगम के कर्मचारीओं को ‘मज़ा’ न आया और वो घरों में घुसे पानी का मुआयना भी करने चल दिये।
सप्लाई वाले पानी से साफ है यह पानी: 
           इस दौरान गुट में बैठें बुजुर्गों के साथ महिलाओं में तरह-तरह की चर्चायें होती रही। किसी ने टपाक से कह दिया ‘अरे यह पानी तो पीने वाली सप्लाई से भी साफ है’ जरा क्लीयरिटी तो देखो!!! और निगम का चुटकुला बनाने के बाद हल्की मुस्कान तो उठी मगर कमरे में डूबती हुई नीचे रखे सामान को उठाने की बारी आते ही-दुबारा बद्दुआओं का दौर शुरू हो गया।
फेसबुक पर होता रहा बारिश का लाइव अपडेट-      बारिश के दौरान लोग अपने घरों व मुहल्लों के पल-पल की स्थिति का जायजा लेकर पफेसबुक पर अपडेट करते रहे। किसी ने आँगन को स्वीमिंग पूल बताया तो किसी ने गलियों में नालियों के बन्द होने की दुहाई दी।
डेरियां बनी काल: संजीव पुण्डीर 
शहर में फैली डेरियां नालों को जाम करने में अहम भूमिका निभाती हैं। हंसी-मजा़क के बाद पानी ज्यादा बढ़ने लगा तो लोगों के चेहरे पर शिकन आ गई और वो गम्भीर होकर चर्चा करने लगे। 
इसी दौरान फेसबुक पर अपडेट एक फोटो पर कमेंट मारकर नगर-निगम के पार्षद संजीव पुण्डीर ने बताया कि शहर में डेरियों के कारण पशुओं के मल नालियों में ही पफेंक दिये जाते है जिससे जाम होकर पानी का निकास भी अवरूध्द हो जाता है, उन्होंने बताया की सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले डेरी संचालकों के साथ-साथ शासन व प्रसाशन भी मूक दर्शक बने हुए हैं। इसके अलावा गलियों में घरों के सामने निकलने वाली नालियों को ढ़कना भी जल-भराव की प्रमुख वजहों में से एक हैं।
इन-इन जगहों पर बहे नाले: 
        शहर के गोल कुँआ, घण्टाघर, लालकुर्ती, शास्त्रीनगर के अलावा पूर्वी व उत्तरी छोर पर भी जल भराव की गम्भीर स्थिति बनी रही तथा लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी मसक्कतों का सामना करन पड़ा। नौचन्दी ग्राउण्ड पर हुए जल-भराव व नौचन्दी थाने के सामने से जाने वाली रोड पर सड़कों पर पानी आ जाने से करीब तीन फुट तक पानी भर गया। राहगीरों व दुकानदारों के साथ-साथ खाकी वर्दी भी भीगने से नहीं बच सकी।

Jul 11, 2013

=> रिश्ता और उदारता और यक्ष प्रश्न?

                       अख़बार के पन्ने पलटते हुए सहसा नज़र एक ख़बर पर पड़ी. खबर कुछ यों थी- एक घर के बाहर तीन महिलाएँ आई और पानी पिलाने को कहा. मकान मालकिन अकेली थी और जब पानी लेने अंदर गयी तो एक महिला ने शीशी खोलकर रुमाल में नशीला पदार्थ डाल दिया. जब मकान मालकिन पानी लेकर बाहर आई तो उसे रुमाल सुंघा दिया गया. वह बेहोश होकर घिर गयी और फिर वे तीनो महिलाएँ घर से कुछ जेवर और रुपये लेकर फरार हो गयी।
                           अब प्रश्न ये उठता है कि आगे से जब भी कोई उसी घर के सामने पानी पिलाने को कहेगा तो क्या वह महिला पानी पिलाएगी ? भले ही कोई भला इंसान जो बहुत ज्यादा प्यासा हो तो भी उसे शायद प्यासा ही वहां से जाना पड़े और वह महिला ही क्यों जो भी इस खबर को पढेंगे या इसके बारे में सुनेंगे वे भी आगे से सतर्क हो जायेंगे. मेरे घर में भी आज तक जब भी कोई घर के बाहर पानी पिलाने को कहता था तब तक बिना किसी संदेह और डर के हमेशा पानी पिला दिया जाता था पर इस खबर का असर शायद आने वाले दिनों में दिखे। 
                           लिफ्ट लेने के बहाने गाड़ी रुकवाकर लूट और हत्या की घटनाएँ भी हमने सुनी है. और इसका असर ये है कि अब कोई मुसीबत का मारा घंटो हाथ हिलाता रहे पर कोई गाड़ी उसकी मदद के लिए नहीं रूकती।
                           हमारे पड़ोस में एक आंटी रहती थी. एक बार उनका भाई उनके घर रुका था और वह अपनी बहन की ही ज्वेलरी लेकर फरार हो गया. मतलब अब रिश्तों पर भी आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता और किसी रिश्तेदार को घर पे ठहराने से पहले भी शायद सोचना पड़े।
चाइल्ड रेप के ज्यादातर मामलों में नज़दीकी पहचान वाले ही दोषी पाए जाते है. ऐसे में किस पर भरोसा किया जाये?
                           सड़क पर दुर्घटना होती है पर लोग आँख बंद करके निकल जाते है. कोई किसी की मदद करता भी है तो पुलिस और राजनीति के चक्र में ऐसा फंसता है कि आगे से मदद करने लायक ही नहीं बचता.
                           इन सब घटनाओं की वजह से मुझे एक ऐसा समाज दिखाई पड़ रहा है जहाँ कोई किसी की मदद या तो करता ही नहीं या करने से पहले हजार बार सोचता है क्योंकि उसे डर है कि सामने वाला इंसान कहीं उसे ही न ठग ले....जहाँ लोगों के सामने कोई भी अवांछनीय घटना हो रही है पर सब आँखों पर पट्टी बांधे हुए है ....जहाँ कोई चीख-चीख कर मदद के लिए पुकार रहा है पर जिन कानो पर वह चीख पड़ती है वे सब कान बहरे है..... जहाँ लोगों के बीच असुरक्षा और अविश्वास बढता जा रहा है ....जहाँ लोगों में स्वार्थ इस कदर बढ़ गया है कि पैसो से बड़ा न ही कोई रिश्ता बचा है ना ही कोई नैतिक मूल्य।
                          किस दिशा में बढ़ रहे है हम ? क्या यहीं हमारी मंज़िल है ? ऐसे कई प्रश्न मेरे दिमाग़ में उठ रहे थे. तभी एक दोस्त ने एक कहानी याद दिलाई।
                          एक बार एक साधु एक बिच्छू को पानी में डूबते हुए देखता है और उसे बचाने की कोशिश करता है पर बिच्छू उसे डंक मार देता है. ऐसा ३-४ बार होता है. एक राहगीर जो वहाँ से गुजर रहा होता है वह साधु से पूछता है आप क्यों इसे बचा रहे है जबकि यह आपको डंक मार रहा है. साधु बोलता है यह बिच्छू की प्रवृति है कि वह डंक मारे और यह मेरी प्रवृति है की मैं उसे बचाऊँ. मैं अपने धर्म से पीछे कैसे हाथ सकता हूँ।
                          आज के समय यह कहानी कितनी प्रासंगिक है ये तो नहीं कह सकती पर हाँ सतर्क रहकर भी हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं।             -- Monika Jain 'पंछी' 

=> सपा ने किया पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित

सपा ने हमेशा पिछड़े वर्गो के लिए कार्य कियाः रामसकल गुर्जर


मेरठ। समाजवादियों ने हमेशा पिछड़े वर्गो को विकास के रास्ते पर लाकर देश की मुख्य धरा से जोड़ने का काम किया है। इतिहास गवाह है जब-जब सपा की सरकार बनी है, पिछड़े वर्गो के हितों में कार्य किया गया है। उक्त उदगार सपा नेता रामसकल गुर्जर ने व्यक्त किए।
               बुधवार को जेल रोड निकट सपा पार्टी कार्यालय पर पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि रामसकल गुर्जर ने सम्मेलन को संबोध्ति करते हुए कहा कि सरकार ने पिछड़े वर्गो के विकास के लिए कई योजनाए चला रखी है। देश में सबसे पहले मण्डल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की प्रक्रिया में पिछड़े वर्गो को 27 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने तथा पंचायती राज एक्ट में संशोध्न करके स्थानिय निकायों में पिछड़े वर्गो को 27 प्रतिशत का प्रतिनिध्त्वि देकर मजबूत किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन पूर्व बसपा सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग का 27 प्रतिशत कोटा पूरा न किये जाने पर आक्रोश व्यक्त करता है।



=> लाल किले जैसी हो महाबोध विहार की सुरक्षा

भारतीय बौद्ध-महासभा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन डीएम को सौंपा

मेरठ। बोध् गया के महाबोध्  परिसर में बम विस्फोट घटना की कड़ी निंदा की गई। महामहिम के नाम जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में भारतीय बो( महासभा ने आलोचना करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
गौरतलब है कि गत सात जुलाई को विश्व बौद्ध जगत के परम पावन एवं श्रद्धा-स्थल बोध् गया के महाबोध् बिहार परिसर में बम विस्फोट कर बौद्धों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी। बुधवार को दि बुद्धिष्ट सोसायटी आफ इण्डिया एवं बौद्ध महांसभा ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा, जिसमें मांग की गई कि बम विस्फोट की घटना के दोषी आराजक तत्वों को सजा दिलाई जाये। बौद्ध गया के महाबोध् िमहा विहार को कड़ी सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। उन्होंने स्थल की सुरक्षा लालकिले की तरह करने की मांग की। उनकी मांग थी कि भारत के समस्त बुद्ध विहारों, स्तूपों, बौद्ध गुफाओं, प्राचीन बौद्ध खण्डहरों, स्माराकों की समुचित सुरक्षा की जाए। इस मौके पर फतेह सिंह, राजवीर सिंह, बालक राम, श्याम सिंह, सुखवीरा सिंह आदि मौजूद रहे।


=> गैंगरेप कर लूट के बाद महिला की गला घोंटकर हत्या

डीआईजी ने दिया 24 घंटे का समय, एसओजी को सौंपी जांच

त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। डेरी संचालक की पत्नी के साथ गैंगरेप व लूट के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी गई। वारदात से क्षेत्रा में सनसनी व पुलिस प्रशासन में हडकंप मच गया। मौके पर पहुंचे डीआईजी ने 24 घंटे के अंदर घटना के खुलासे का आश्वासन दिया है।
                खासपुर गांव निवासी नानकचंद त्यागी के पुत्रा विपिन उपर्फ रिंकू की गांव में ही दूध् की डेरी है। ढाई वर्ष पूर्व उसकी शादी थाना सरूरपुर क्षेत्रा के गांव लाहौरगढ़ निवासी विरेन्द्र त्यागी के पुत्री चित्रा के साथ हुई थी। बीती रात बिजली आने पर रिंकू खेतों में पानी देने के लिए जंगल चला गया था। घर पर रिंकू की मां व पत्नी चित्रा और उसका डेढ़ वर्ष का पुत्र तपीश थे। परिवार के बाकी सदस्य घर पर सोए हुए थे। सुबह चार के आस-पास बिजली जाने पर रिंकू घेर में आकर सो गया।
                सुबह पांच के आसपास छत पर सो रही रिंकू की मां सुचित्रा देवी को नीचे सहन में खटपट की आवाज सुनाई दी। जिससे उसकी आंख खुल गई। उन्होंने सोचा की रिंकू आया होगा, लेकिन पांच मिन्ट के बाद तपीश के रोने की आवाज आई। जब वह कापफी देर तक रोता रहा सुचित्रा नीचे आई। नीचे जमीन पर खून देखकर उनके होश उड़ गए और पैरों तले से जमीन सरक गई। जबकि चित्रा नग्नअवस्था में मृत चारपाई पर पड़ी थी। यह देख उनकी चीख निकल गई। शोर सुनकर मोहल्ले के लोग घर पर इकठठे हो गए। सूचना पुलिस को दी गई।
                 घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने जैसे ही शव को कब्जे में लेने का प्रयास किया तो लोगों ने विरोध् करना शुरू कर दिया और पुलिस के आलाअध्किारियों को बुलाने की मांग की। सूचना मिलते ही डीआईजी के. सत्यनारायण, एसएसपी दीपक कुमार, एसपी देहात कैप्टन एमएम बेग, सीओ, एसओ खरखौदा घटनास्थल पहुंचे। मौके पर पफोरेंसिक टीम भी पहुंची और घटनास्थल की छानबीन की। डीआईजी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि 24 घंटे के अंदर वारदात का खुलासा कर दिया जायेगा। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। खरखौदा थाने में अज्ञात के खिलापफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीआईजी ने एसओजी को जांच सौंपी है।

चित्रा ने किया था संघर्ष:              चित्रा की हत्या लूटपाट के बाद की गई। ऐसा परिजनों ने बताया है। उनका कहना था कि बदमाशों की संख्या आध दर्जन से कम नहीं थी और उसने बदमाशों का विरोध् किया था। सेपफ में रखी ज्वैलरी गायब मिली है और डिब्बे इध्र-उध्र पड़े हुए मिले। चित्रा के शरीर पर खरोंच के निशान भी थे। ऐसा लगता था कि उसने बदमाशों से जमकर संघर्ष किया था।
रात्रि 12 बजे किया था फोन:
             रात्रि 8:00 बिजली आई थी। बिजली आने के बाद रिंकू खेतों पर चला गया था। रात्रि 12 बजे के आसपास चित्रा ने रिंकू को पफोन किया था और पूछा था कि कब तक आओगे। रिंकू ने बिजली चले जाने के बाद आने के लिए कहा था। हालांकि वह सुबह के समय घेर में सो गया था। अनुमान लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने ही चित्रा से पफोन करवाया होगा। चित्रा ने आरोपियों को पहचान लिया होगा। तभी दुष्कर्म के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या की।
आरोपियों को पूरे घर की थी जानकारी:            रिंकू तीन भाईयों में दूसरे नम्बर पर है। उसका बड़ा भाई ब्रजवाशी ट्रक चालक है और रात्रि में घर पर नहीं था। छोटा भाई नितिन नोएडा में किसी कंपनी में कार्य करता है। जबकि उसके पिता घेर में सोये थे। आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि घर पर कौन है। रिंकू के घर से निकलते ही आरोपी घर में घुसे होंगे और चित्रा को कब्जे में ले लिया होगा। हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। अनुमान है कि आरोपी आसपास के ही है।
एसओ को बताया नकारा:
          दुष्कर्म व हत्या की जानकारी पाकर सपा नेता ओमपाल गुर्जर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने एसओ खरखौदा का नकारा बताया और उन्हें हटाने की मांग की।
जैसा उसने जमकर संघर्ष किया। 

Jul 10, 2013

=> माहे रमजान पर विशेष


रोजेदार की दुआं नहीं होती मुसतर्द 

हमदर्दी और गमख्वारी का महीना है रमजान 

लियाकत मंसूरी।

मेरठ। हजरत सलमान फारसी रजि. से रिवायत है कि माहे शाबान की आखिरी तारीख को रसूल सल्ल. ने हमको एक खुतबा दिया। उसमें आपने पफरमाया- 'ऐ लोगों तुम पर एक अजमल और बरकत वाला महीना साया पिफगन हो रहा है। उस महीने की एक रात ;शबे कद्र हजार महीनों से बेहतर है। इस महीने के रोजे अल्लाह पाक ने फर्ज किए है और उसकी रातों में बारगाहे इलाही में खड़े होने ;यानि नमाज तरावीह पढ़ने को नफ्रल इबादत मुकर्रर किया है। जो शख्स उस महीने अल्लाह पाक की रजा और उसका कुर्ब हासिल करने के लिए गैर फर्ज इबादत ; सुन्नत या नफ्ल अदा करेगा तो दूसरे जमानों के फर्जो के बराबर उसको सवाब मिलेगा। और इसी महीनें फर्ज अदा करने का सवाब दूसरे जमानों के 70 फर्जो के बराबर मिलेगा। यह हमदर्दी और गमख्वारी का महीना है। जिसमें मोमिन बन्दों के रिज्क में इजाफा किया जाता है। जिसने इस महीनें किसी रोजेदार को ;अल्लाह पाक की रजा और सवाब हासिल करने के लिएद्ध इफ्रतार कराया तो उसके लिए गुनाहों की मगफिरत और आतशे दोजख से आजादी का जरीया होगा। और उसको रोजेदार के बराबर सवाब दिया जायेगा। बगैर इसके कि रोजेदार के सवाब में कोई कमी की जाए।'
आप सल्ल. से अर्ज किया गया रसूल अल्लाह हम में से तो हर एक को इफ्तार कराने का सामान मयस्सर नहीं होता तो क्या गरीब इस अजीम सवाब से महरूम रहेंगे। आप सल्ल. ने फरमाया- अल्लाह पाक यह सवाब उस शख्स को भी देगा जो दूध् की थोड़ी लस्सी पर या पानी के घूंट पर किसी रोजेदार का रोजा इफ्तार करा दे। और जो किसी रोजेदार को खाना खिला दे उसको अल्लाह पाक मेरे हौजे कौसर से ऐसा सैराब करेगा, जिसके बाद उसको न कभी प्यास लगेगी। यहां तक कि वह जन्नत में पहुंच जायेगा।

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                        दोजख से रिहाई-इस माहे मुबारक का पहला हिस्सा रहमत है। दरमियानी हिस्सा मगफिरत है और तीसरा व आखिरी हिस्सा दोजख से आजादी है। जो आदमी इस महीनें में अपने नौकरों-चाकरों के काम में कमी कर देगा अल्लाह पाक उसकी मगफिरत फरमा देगा और उसे दोजख से रिहाई और आजादी देगा। और जो लोग रमजान के रोजे ईमानों एहतेसाब के साथ रमजान की रातों में नवाफिल; तरावीह व तहज्जुद पढ़ेंगे उनके भी सारे पिछले गुनाह मुआफ कर दिए जायेंगे।
                       रोजे की बरकत-हजरत अबू हुरैरह रजि. से रिवायत है कि रसूल सल्ल. ने पफरमाया कि रोजा रखा करो, तन्दुरूस्त रहा करोगे। आयशा सिददीका रजि. पफरमाती है कि जब रमजान मुबारक का तीसरा अशरा शुरू होता है तो रसूल कमर कस लेते और शब बेदारी करते। यानि पूरी रात इबादत करते और जिक्रों दुआ में मशगूल रहते और अपने घरों के लोगों और दूसरे रिश्तेदारों को भी जगाते ताकि वह भी उन रातों की बरकतों और सआदतों में हिस्सा ले।
                           रूयते हिलाल की तहकीक और शाहिद की शहादत-हजरत सल्ल. की सुन्नत यह थी कि जब तक रूयते हिलाल का सुबूत न हो जाए या कोई ऐसी गवाह न मिल जाए आप रोजा शुरू नही करते। जैसा की आप सल्ल. ने इब्ने उमर रजी. की शहादत कबूल करके रोजा रखा। आप सल्ल. बादल के दिन रोजा नहीं रखते थे, न आपने उसका हुक्म दिया। बल्कि पफरमाया-जब बादल हो तो शाबान के तीस दिन पूरे किए जाए। चांद देखकर रोजा रखो और चांद देखकर रोजा छोड़ दो और 29 तारीख को चांद दिखाई न दे तो तीस की गिनती पूरी करो।
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सहरी-हुजूर सल्ल. का इर्शादे गिरामी है कि सहरी में बरकत है। उसे हरगिज-हरगिज न छोड़ना। अगर कुछ नहीं तो उस वक्त पानी का घूंट ही पी लिया जाये। क्योंकि सहरी में खाने पीने वालों पर अल्लाह रहमत पफरमाता है और पफरिश्ते उनके लिए दुआएं करते है।
इफ्रतार-अल्लाह पाक का इरशाद है कि अपने बंदों में मुझे वह बंदा ज्यादा महबूब है जो रोजे के इफ्रतार में जल्दी करे। यानि ग्रूब आपफताब के बाद बिल्कुल देर न करे। जब तुम मे से किसी का रोजा हो तो वह खजूर से इफ्रतार करे। और अगर खजूर न हो तो पिफर पानी से इफ्रतार करें। इसलिए की पानी को अल्लाह तआला ने तहूर बनाया है। हजरत अनस रजि. का इरशाद है कि आप सल्ल. मगरिब की नमाज से पहले चन्द तर खजूरों में रोजा इफ्रतार पफरमाते थे और अगर तर खजूर वक्त पर मौजूद न होती तो सूखी खजूरों से रोजा पफरमाते थे और अगर सूखी खजूर भी न होती तो चन्द घूंट पानी पी लेते थे।
तरावीह-अक्सर उलेमा इस बात पर मुत्तपिफक है कि तरावीह के मसनून न होने पर अहले सुन्नत जमाअत का इजापफा है। आइमा-आइबा में से यानि इमामे आजम अबू हनीपफा रह., इमाम शापफर रह., इमाम अहमद बिन हबल रह. इन सब हजरात की किताबों में इसकी तशरीह है कि तरावीह के 20 रकअत सुन्नत है।
कुरान मजीद का सुनना-रमजान शरीपफ में कुरान मजीद का एक मर्तबा तरतीबवार तरावीह से पढ़ना सुन्नतें मोक्केता है। अगर किसी वजह से इसका अन्देशा हो कि मुक्तदी तहम्मुल न कर सकेंगे तो पिफर अलमतरा कैपफा से आखिर तक दस सूरतें पढ़ ली जाए। हर रकअत में एक सूरत हो फ़िर दस रकअत पूरी होने पर उन्हीं सूरतों को दोबारा पढ़े और जो सूरते चाहे पढ़े।
तरावीह पूरा महीना पढ़ना-तरावीह का रमजानुल मुबारक के पूरे महीनें पढ़ना सुन्नत है। अगरचे कुरान मजीद खत्म होने से पहले खत्म हो जाए, मसलन 15 रोजा में कुरान मजीद खत्म हो जाए। तो बाकी दिनों में भी तरावीह का पढ़ना सुन्नत है।
रमजान माह की पफजीलत के बारे में जैसा कि अमर भारती को नायब शहर काजी जैनुर्राशिददीन व कारी शपफीकुर्रहमान ने बताया।

=> मासूम के साथ दो युवकों ने किया कुकर्म


थाना पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, एसएसपी से लगाई गुहार

मेरठ। दो युवकों द्वारा किशोर के साथ कुकर्म का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर एसएसपी को प्रार्थना पत्रा देकर आरोपियों को गिरफ्रतार करने की मांग की गई है।
कोतवाली सरध्ना क्षेत्रा के कुशावली गांव निवासी चुन्नीलाल पुत्रा मामचंद का कहना था कि गत 4 जुलाई को उसका पुत्रा नितिन शौच के लिए जा रहा था। जेब वह खेतों पर पहुंचा तो आरोप है कि वहां मौजूद शिव कुमार पुत्रा जयपाल व दीपक पुत्रा देवराज ने नितिन को खेत में घास उठवाने के बहाने बुलाया और उसके साथ जबरदस्ती कुकर्म किया। आरोपियों ने मुॅह खोलने पर जान से मारने की ध्मकी दी। शिकायत पुलिस से की गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। एसएसपी को दिए ज्ञापन में कुकर्मियों को हिरासत में लेने की मांग की गई।


एसएसपी ने कोतवाली इंचार्ज को किया तलब 

मेरठ। विवाह की एलबम व वीडियों न देने का मामला एसएसपी के दरबार में पहुंच गया। इस मामले का लेकर एसएसपी बिगड़ गये और कोतवाली इंचार्ज को तलब कर लिया।
शास्त्राीनगर के एल. ब्लाॅक निवासी जगवीर शर्मा पुत्रा स्व. दीपचंद का कहना था कि 6 माह पूर्व बेटे की शादी में वीडियोग्रापफी के लिए कोतवाली क्षेत्रा के भाटवाड़ा निवासी आशीष को बुक किया था। उसने पांच हजार रफपये एडवांस और शादी के बाद 12 हजार रफपये लिए। आरोप है कि अब आशीष एलबम व विडियों सीडी देने से मना कर रहा है। इस मामले में उसकी पत्नी पिंकी भी ध्मकी दे रही है और छेड़छाड़ करने के आरोप में पफंसाने की ध्मकी दे रही है। जगवीर का कहना था कि इस मामले मे कई बार कोतवाली पुलिस से मदद मांगी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
इस छोटे से मामले को लेकर एसएसपी बिगड़ गये। एसएसपी दीपक कुमार ने कोतवाली इंचार्ज को तुरंत तलब कर लिया। कोतवाली इंचार्ज को हड़काते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब छोटे मामले मै देखूंगा तो तुम थाने में क्या कर रहे हो। उन्होंने इस मामले मे कार्रवाई के निर्देश दिए।

=> पुलिस के बस में नहीं कार्रवाई करना


घायल महिला बोली- आरोपियों से खुद लूंगी बदला

त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपियों ने घर में घुसकर महिला को गोली मार दी। बचाव में आई उसकी पुत्री को भी बट मारकर जख्मी कर दिया। अस्पताल में भर्ती महिला की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं पुलिस किसी भी नामजद आरोपी को हिरासत में नहीं ले पाई। वहीं घायल महिला का कहना था कि आरोपियों पर कार्रवाई करना पुलिस के बस में नहीं है। सही होने के बाद वह खुद बदला लेगी।
घटना बीती रात की है। कपड़े का कारोबार करने वाला जाकिर कालोनी निवासी रफीक व्यापार के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ था। घर पर उसकी पत्नी गुलिस्ता व पुत्री नगमा तथा सलमा थी। रात्रि आठ बजे के आसपास पड़ौसी फुरकान व बाबू पुत्रागण युनूस हथियारों से लैस होकर घर में घुसे और गुलिस्ता ताबड़तोड़ गोली चला दी। बचाव में सलमा को भी तमंचे की बट मारकर घायल कर दिया। गोलियों की आवाज सुनकर लोग आए, जिन्हें देखकर हमलावर हवाई फायरिंग करते हुए फरार हो गए। पुलिस ने गुलिस्ता व सलमा को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत 24 घंटे गुजर जाने के बाद भी नाजुक बनी हुई है। पुलिस नामजद आरोपियों को हिरासत में नहीं ले पाई है।
                       एसओ लिसाड़ीगेट परवेज खान ने बताया कि चार माह पूर्व गुलिस्ता की बेटी के साथ आरोपिओं ने दुष्कर्म किया था। जिसमें इस परिवार की एक महिला भी जेल में गई थी। इसी रंजिश में घटना को अंजाम दिया गया।

=> आदिल की हत्या में नामजद हुई प्रेमिका


परिजनों ने लगाया साजिश रचने का आरोप, आरोपी पकड़ से बाहर

त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। आदिल हत्याकांड को 48 घंटे से ज्यादा गुजर गये, लेकिन नामजद आरोपी पुलिस पकड़ से बाहर है। पुलिस युवती को भी बरामद नहीं कर पाई है, आशंका जताई जा रही है कि उसकी भी हत्या कर दी गई है।  हालांकि उसको भी हत्या की साजिश में नामजद किया गया है।
                लिसाड़ीगेट क्षेत्रा के पफतेहउल्लापुर निवासी नौशाद के पुत्रा आदिल का शव शनिवार को परतापुर थाना क्षेत्रा के चांदसारा मार्ग स्थित गगोल के जंगल में मिला था। परिजनों ने हापुड़ मार्ग स्थित एल. ब्लाॅक चौराहे पर शव को रखकर जाम लगा दिया था और आरोपियों को गिरफ्रतार करने की मांग की थी। परिजनों ने आबिद के मामा अनीस, अजीज, नूर आलम व शाह आलम पुत्रागण अल्लाहमेहर तथा अनस  निवासीगण करीमनगर को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। हत्या के बाद देर शाम आरोपी अनीस ने डीआईजी के समक्ष सरेंडर कर दिया था। आरोप था कि आदिल के पुत्राी पफरहाज से प्रेम-प्रसंग था और उसने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। तभी उसके मारने की योजना बनाई गयी। पुलिस ने उसे रविवार को उसे जेल भेज दिया था।
                   घटना के 48 घंटे गुजर जाने के बाद पुलिस हत्यारों को गिरफ्रतार नहीं कर पाईं। वहीं पुलिस पफरहाज को भी नहीं बरामद कर पाई है। आशंका जताई जा रही है कि परिजनों ने युवती की भी हत्या कर डाली है। हालांकि परिजनों ने पफरहाज को भी हत्या की साजिश करने में नामजद किया है। परिजनों का आरोप है कि पफरहाज ने ही आदिल को पफोन करके घर बुलवाया था। उध्र परतापुर पुलिस का कहना था कि हत्यारों की गिरफ्रतारी के लिए दबिश दी जा रही है। आरोपी के मकान पर ताला लटका है। पुलिस का कहना था कि युवती को भी जल्द बरामद कर लिया जायेगा।

Jun 24, 2013

=> एससी व एसटी एक्ट को समाप्त करने का फूंका जायेगा बिगुल

मूर्ति विध्वंश की पहली वर्षगांठ पर 

अमित जानी करेंगे स्वाभिमान महापंचायत

त्रिनाथ मिश्र।

मेरठ। मूर्ति विध्वंश की पहली वर्षगांठ पर उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना लखनउफ में स्वाभिमान महापंचायत करेगी। जिसमें एससी व एसटी एक्ट को खत्म कराने के लिए आंदोलन की बिगुल पफूंका जायेगा। इसके लिए प्रत्येक जिलों बैठके कर लोगों को महापंचायत में पहुंचने का आहवान किया जा रहा है।
हापुड़ रोड स्थित यदु होटल में उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जानी ने अमर भारती संवाददाता को बताया कि गत 16 जुलाई को उनकी सेना के दस सदस्यों ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्राी मायावती की लखनउफ में स्थित मूर्तियों को तोड़ दिया था। जिसमें वह जेल भी गए थे। इस घटना को आगामी 16 जुलाई को एक वर्ष हो जायेगा। घटना की पहली वर्षगांठ पर सेना इसे स्वाभिमान महापंचायत के रूप में मनायेगी। एससी व एसटी एक्ट को समाप्त करने के लिए लखनउफ में आयोजित महापंचायत में इसका बिगुल पफूंका जायेगा। उनका कहना था कि लोकसभा, विधनसभा, नगर पालिका, नगर पंचायत व ग्राम पंचायत के चुनावों में एससी व एसटी आरक्षण को समाप्त किया जाए।
                  अमित ने बताया कि भारत में स्वर्ण, ब्राहमण, क्षत्रिय, मुस्लिम आदि पर एससी व एसटी एक्ट के सवा दो करोड़ पफर्जी मुकदमें है, जबकि उत्तर प्रदेश में 16 लाख मुकदमें मायावती राज में दर्ज हुए। ये सभी मुकदमें पफर्जी है, जो जाति सूचक शब्द कहने पर ही दर्ज हो गए। आरोप है कि मायावती ने दलितों को एक मुकदमा दर्ज कराने पर 25 हजार रफपये दिए। माया सरकार में एससी व एसटी को बढ़ावा मिला।

विभिन्न दलों का मिल रहा सहयोग-उन्होंने बताया कि महापंचायत को सपफल बनाने के लिए वे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों को जोड़ने का काम कर रहे है। उन्होंने अब तक सैपफई, इटावा, जसवंतनगर, आगरा, पफरीदाबाद, मथुरा, दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ आदि शहरों में वे बैठक कर चुके है। अब 28 जून को बनारस, 11 जुलाई को बस्ती, 17 जुलाई को कानपुर, 14 जुलाई को सिद्वार्थनगर आदि जिलों में बैठकों का कार्यक्रम है। उन्होंने बताया आगामी 7 जुलाई को अमेठी में हल्ला बोल रैली आयोजित होगी और इसके बाद कानपुर में 3 जनसभाए आयोजित होगी।
अमित जानी ने बताया कि स्वाभिमान महापंचायत को सपफल बनाने के लिए उन्हें सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री  ओमप्रकाश चैटाला सहित खाप पंचायतों तथा उलेमाओं का भी सहायोग मिल रहा है।

Jun 18, 2013

=> खाकी पर लागू नहीं नियम, पुलिस जीप में नही है नंबरप्लेट

Meerut। खाकी पर लागू नहीं नियम। सडक पर चलने वाले वाहनचालकों को नंबरप्लेट.गाडी के दस्तावेजों के नाम पर परेशान करने वाले खाकीधारक हवा में उडा रहे हैं सडक पर चलने के नियम।
सडक पर चलने से पहले आम आदमी पुलिस के डर से अपने वाहनों के समस्त दस्तावेज साथ लेकर चलता है और यदि भूल से भी हैलमेट न हो या बाईक या चारपहिया गाडी का कोई दस्तावेज भूल जाये या गाडी की नंबरप्लेट से कोई एक भी अक्षर मिटा हुआ हो तो शुरू हो जाता है खाकी का खेल या तो वाहनचालक का चालान काटा जायेगा या फिर 10, 20, 50, 100 रूपये जो मिले उनसे पुलिसवाले काम चला लेते हैं। सडक पर चलने वाले वाहनचालकों पर तो आरटीओ के नियम तो लागू हैं पर शायद परिक्षितगढ पुलिस पर नहीं। मेरठ जनपद पश्चििमी उत्तरप्रदेश का सबसे बढा जनपद है। और क्राईम के मामले में भी मेरठ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में है। जनपद के कप्तान द्वारा सख्त पुलिसिंग के आदेश हैं मगर इन सभी आदेशों के बाद भी परिक्षितगढ पुलिस के कानों पर जूं रेंगती दिखाई नहीं देती किठौर क्षेत्र के थाना परिक्षितगढ में
पुलिस जीप में न ही नंबरप्लेट है और जीप की खस्ता हालत देखते हुए यह कहते हुए कोई हर्ज नहीं है कि शायद एक पैदल चलने वाला इंसान अगर दौड लगाये तो जीप को पीछे छोड देगा आखिर ऐसे खस्ताहाल वाहनों द्वारा पुलिस किस प्रकार क्राईम कंट्रोल कर पायेगी। घटना घटने के घंटो बाद पुलिस पहुंचती है और यदि इसका कारण पूछा जाये तो ककहते हैं कि सूचना नहीं थी जबकि उसका असल कारण सिर्फ और सिर्फ जर्जर जीप और थाने के वाहन ही है।
जवाब दीजिये कप्तान साहब?
                       जनपद या देहात क्षेत्र में आपके आदेशों के बाद सप्ताह में कई बार चैकिंग अभियान चलाये जाते हैं लेकिन उन चैकिंगों के नाम पर आप ही के विभाग के अधिनस्थ दारोगा जी या थानाप्रभारी चैकिंग के नाम पर सिर्फ अपनी जेब गर्म करने का काम करते हैं जिससे राजस्व को चपत लगती है सडक पर चलने वाले वाहनस्वामीयों की जेब पर चैकिंग के नाम पर जो डाका डाला जाता है और कागज न होने पर नंबरप्लेट न होने पर जो कार्यवाही की जाती है क्या वही नियम आपकी पुलिस पर लागू नहीं है।  - by Sanchit Arora, Mawana

Jun 11, 2013

=> अब 2 महीना पहले ही रिजर्वेशन हो सकेगा

अब आप 4 महीना पहले ट्रेन में रिजर्वेशन नहीं करा पाएंगे। रेलवे ने अडवांस रिजर्वेशन के लिए नया नियम बना दिया है। नए नियम के मुताबिक अब 2 महीना पहले ही रिजर्वेशन हो सकेगा। नया नियम 1 मई से लागू होगा। रेलवे ने रेल टिकट के रिजर्वेशन में बढ़ती कालाबाजारी को रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को इस मामले में एक अहम फैसला लिया गया। अब इस फैसले के तहत यात्रा की तारीख से अधिकतम 60 दिन (2 महीने) पहले रेल टिकट का रिजर्वेशन करवाया जा सकेगा। अभी 4 महीने पहले रिजर्वेशन करवाने की सुविधा है।

May 30, 2013

=> SSP Office 30.05.2013

एमडीए के खिलाफ उतरा रालोद
जिलाधिकरी को ज्ञापन सौंप कर, हो रही अनियमितताओं के जाँच 
की माँग की, पुलिस बल द्वारा किसानों पर उत्पीड़न का लगाया आरोप
मेरठ।  राष्ट्रीय लोकदल के कार्य-कर्ताओं ने प्रदेष अध्यक्ष राममेहर सिंह की अगुआई में कलेक्ट्रेट पर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा तथा बताया की किसानों की जमीन पर मेरठ विकास प्राधिकरण जबरन अपना वर्चस्व दिखा रहा हैै। गौरतलब है की एमडीए द्वारा 1987 में पांच हजार एकड़ की उपजाऊ भूमि


विभिन्न आवासीय योजनाओं द्वारा अपना लिया गया था। और तभी से किसान अपनी जमीन के बदले उचित मुआव्जो की मांग करते आ रहे है।जिलाधिकरी कार्यालय पर प्रदर्षन करते हुजाने की मांग करते हुए कहा की उनकी जमीन के बदले उचित मुआबजा मिलना चाहिए। तथा शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी व लोहियानगर योजनाओं से सम्बन्धित किसानों को 2001 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गणित कमेटी के निर्णयानुसार जो भी रकम मुआव्जे के तौर पर निर्धारित थी उसका भुगतान मेरठ विकास प्रधिकरण करे। इसके साथ ही रालोद कार्यकर्ताओं ने 7 बिन्दुओं पर ज्ञापन सौंप कर जबाव मांगा है। जिसमें किसानों के मुआब्जों सम्बन्धित शर्तों के अनुसार एमडीए से किसानों को भुगतान करने की मांग की गई है।



निष्पक्ष विवेचना की मांग 
मेरठ।  क्राइम कैपिटल के नाम मषहूर मेरठ में पुलिस पर पक्षपात का आरोप आयेदिन लगता रहता है मगर इसके बावजूद पुलिस द्वारा इस मुद्दे पर सोचना तो दूर ध्यान नही दिया जाता। थान किठौर निवासी शहजाद पुत्र समषुद्दीन एसएसपी आफिस पर पहुँच स्थानीय पुलिस पर निपक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाते
हुए बताया की अपहत्य आयषा 14 वर्ष, को अभी तक बरामद न कर पाना कहीं न कहीं पुलिस द्वारा आरोपी पक्ष से मिलकर कार्रवाई में बाधा पहुँचाने की मंषा जाहिर करता है।न्यायालय से गैर जनावती वारन्ट होने के बाद भी खुले में घूम रहे नामजद अभियुकतों के गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया।



लड़के के दबंगई पर भड़की जनता 
मेरठ। खैरनगर अख्तर मस्जिद निवासी युवक न एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया उसे मुहल्ले का ही रहने वाला गुलफाम पुत्र जमीन उससे मारपीट व गाली गलौज करता रहता है। उक्त व्यक्ति मुहल्ले के लोगों को भी परेषान करता रहता है। समझाने पर जान से मारने व परिवार को खत्म करने की धमकी देता है। पीडि़त ने प्रार्थना पत्र देकर देहली गेट पुलिस द्वारा कार्रवाही करने की मांग की। पीडि़त मोहम्मद आषू पुत्र यामीन निवासी अखतर मस्जिद बनवटान का है तथा कई बार उक्त आरोपी को तथा कई बार उक्त आरोपी को नजरअन्दाज कर चुका फिर भी व गुण्डई दिखाना चाहता है।

May 26, 2013

=> एनएच-58 पर बौखलाई जनता का ताँडव


युवक की मौत पर 
बौखलाई जनता का ताँडव 

ट्रक की टक्कर से ट्रैक्टर सवार युवक की मौत पर भडकी जनता, 
ट्रक को किया आग के हवाले, 
कई घण्टे तक एनएच-58 पर गलाया जाम, 
पुलिस से हुई झपड।

मेरठ। कंकरखेड़ा एनएच-58 मार्ग पर कल दादरी के सीमप ट्रैक्टर की ट्रक से टक्कर लगने से चालक की मौत हो गई। इसी बात से गुस्सायें ग्रामीणों ने अपना ताँडव दिखाना शुरु कर दिया। शव को कई घण्टों तक रोड पर रख कर जाम लगाये रखा तथा मौके पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाते हुए दादरी पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा काट दिया। यही नहीं ग्रामीणों ने ट्रक को आग के हवाले करते हुए नारेबाजी भी की तथा हाइवे पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया।
दादरी निवासी सुनील पुत्र खुषीराम सुबह करीब 5 बजे ट्रैक्टर द्वारा खेत से बाहर को जा रहा था। दादरी पुलिस चैकी के समीप एनएच-58 से मुडते समय मुजफ्फर नगर की ओर से आ रहे तेज गति के ट्रक ने जबरदस्त टक्कर मारी तथा टैªक्टर चालक सुनील रोड पर गिर पड़ा और काफी देर तक तडपता रहा। इस घटना के होते ही ट्रक चालक फरार हो गया। सुनील थोड़ी देर बाद ही जीवन की अन्तिम सांस लेकर सड़क पर मरणासन्न हो गया। ग्रामीणों को सुनील की मौत सूचना मिलते ही हंगामा हो गया और कुछ देर बाद ही गुस्साये ग्रामीणों ने हाइवे को कब्जाकर जाम लगा दिया।
पुलिस चैकी है नजदीक:
घटना स्थल से कुछ ही दर पर दादरी पुलिस चैकी है, वहां पर तैनात पुलिस कर्मी को भी इस घटना का पता काॅफी देर बाद पता चल पाया, इस बात का अन्दाजा लगाना मुष्किल है कि क्या वाकई मुस्तैदी से काम करने का ढ़ोग करने वाली पुलिस को इस घटना की ऐन पर भनक भी नहीं मिली।
पुलिस की एक न सुनी:
मौत की खबर आग की तरह फैल गई तथा जाम व हंगामा की सूचना पाकर इंचैली व दौराला इन्स्पेक्टर मौके पर पहुँचे, ग्रामीणों ने उन्हे भला-बुरा कहते हुए जाम खोलने से मना कर दिया। सीओ सदर - देहात विजय प्रताप के जाने पर प्रदर्षनकारियों ने वर्दी पर लापरवाही के तमगे देते हुए झड़प कर लिया। एस.पी. देहात कैप्टन एम.एम. वेग के पहुँचने पर ग्रामीणें में आई जोन व कमिष्नर को मौके पर बुलाने की बात की तथा उच्च अधिकारियों के पहुँचे जाम खोलने से साफ इनकार कर दिया।
हो चुके हैं कई हादसे:
एनएच - 58 पर तेज रफ्तार वाहनों, ट्रकों की चपेट में अब तक कई जिन्दगियां मौत को प्यारी हो चुकी है, मगर ट्रैफिक पुलिस, सिविल पुलिस को इन सभी घटनाओं से कोई वास्ता व सरोकरा होता नहीं जान पड रहा है।
समय पर पहुँचते तो बचने की थी गुन्जाइषः
सुनील काफी देर तक सड़क पर तडपता रहा। यदि पुलिस मौके पर पहुँच कर उसे उपचार के लिये ले जाती तो शायद सुनील की सांसे अभी तक चल रही होती। इसे पुलिस की लापरवाही कहें, अनदेखी कहें, या खुदा का कहर, बरहाल सुनील अब इस दुनिया में नहीं है। इसके जिम्मेदार हर शख्स को सोचना होगा, जागना होगा।

May 21, 2013

=> मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती!


          लोंगो में विश्वास कायम रखना 
मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती!

"'पॉप आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' का कहना शायद सही था, "कि यहां हर कोई अपनी 15 मिनट की शोहरत तलाश रहा है?" लेकिन आज के अनुसार 24X7 से चलने वाली मीडिया में मामला महज़ 15 सेकंड की साउंडबाइट तक सिमट गया है। अगर हम 1998 की बात करें तो केवल एक 24’7 नेटवर्क था मगर आज एक से ज्यादा 24’7 न्यूज चैनल है ... जो खबरों को देश और दुनिया के बीच से ले रही है, झपट रही है, और खासतौर पर झपटे खबरों में उनकी वो खबर होती है जो हंगामाखेज हो, चटपटी हो, स्टूडियों के अन्दर एसी में पसीना लाने वाली खबर या फिर एकंर को क्यों ना क्रिमनल बनने पर मजबूर कर सनसनी फैलाने वाली हो?" 

सिकेन शेखर
                                                           आज के दौर में मीडिया आपसे कितना परिचित है? आप और हम सब मीडिया से कितना परिचित है? शिक्षण संस्थान जो पत्रकारिता तथा मीडिया के उन तमाम पहलुओं से छात्र-छात्राओं को परिचित करवाते हैं वो कितना एक दूसरे से परिचित हैं ये ऐसे मुद्दे हैं जो आज की पत्रकारिता की दुनिया में एक प्रश्नचिन्ह बनकर उन तमाम पत्रकारों पर काले बादल की तरह मडरा रहे है जो अच्छी पत्रकारिता के पक्षधर हैं। पत्रकारों के रास्ते में बाधा बन कर गंभीरता से सोचने पर विवश कर देने वाला कुछ जटिल विषय सामने आता है। आज अगर एक राज्य स्तरीय राजनितिक पार्टी के नेता से राष्ट्रीय स्तर के राजनितिक पार्टी के नेता स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए मिलते हैं -तो खबर तो बनती है भाई, खबर बनना भी लाजमी है! नेता जो हैं, लेकिन उस खबर को उस दिन का प्राइम टाइम खबर बना कर राजनितिक समीकरण जैसे शब्दों का हवाला देना शायद पत्रकारिता के ऊपर सवाल खड़ा करने के बराबर है। लेकिन मसला यही खत्म नही होता अगर उसी दिन उस राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ हजार लोग कुछ जरूरी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते है तो उस न्यूज को एक खबर का भी स्थान ना देना कहीं न कहीं बेमानी है, शायद ये पत्रकारिता की जिम्मेदारी से दूर होकर पत्रकारिता में रह कर इस क्षेत्र पर सवाल खड़ा करना जैसा है। सवाल ये कि मीडिया सवाल तो करती है मगर इस सवाल का जबाब कौन देगा? ना जाने इस तरह कितने ऐसे सवालों से मीडिया घिरी है जिसको कोई उठाने वाला नहीण्ण् खासतौर पर जिस रफ्तार से क्षेत्रीय स्तर पर मीडिया का विकास हुआ है उसी रफ्तार से मीडिया अपनी जबाबदेही खोती चली गई ... जिसका सबसे बड़ा परिणाम निकल कर यह  आया कि आज के दिनों में लोग मीडिया से डरते है मगर मीडिया के लोगों को इस नजर से देखते है जैसे कोई तमाशा करने वाला है और इसमें कोई संदेह नही कि मीडिया कभी.कभी तमाशा से कुछ कम ड्रामा नही करती, ये सच्चाई है कि मीडिया ड्रामा भी करती है ... फिलहाल मीडिया के लिए चुनौती तो ये है कि लोग इस क्षेत्र के लोगों को आदरपूर्वक देखें। य़े जानकर बड़ा आश्चर्य होता है कि सुबह से शाम और शाम से सुबह 24’7 के चाल से चलने वाली इस मीडिया के खिलाफ लोगों का आक्रोश आज तक देखने को नही मिला मगर मीडिया के मंच पर कभी-कभी इस तरह के मुद्दे पर बहस देखने व सुनने को मिलती रहती है ... अगर हम बात करें अन्य लोकतांत्रिक स्तंभ की तो विधाइका, कार्यपालिका व न्यायपालिका, जिसके खिलाफ हमेशा लोगों कि आवाजें उठती रही है, मगर चौथे स्तंभ को लेकर आज तक जन-आक्रोश नही उठीं। कहीं न कही लोग इस मसले को समझ नही पाये, नही तो इसके खिलाफ भी हमें आक्रोश देखने को मिल सकता था? खैर, मीडिया की उम्मीद तो ये है कि स्व विनियमन से इसकी छवि सुधारी जाए ... फिल्म की दुनिया कि बात करे या फिर खबरों की दुनिया की बात करें, ये दुनिया के लोगों का लक्ष्य कहीं ना कहीं अमेरिकी पॉप 'आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' से मिलती नजर आती हैं ... 
                                                      'पॉप आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' का कहना शायद सही था, "कि यहां हर कोई अपनी 15 मिनट की शोहरत तलाश रहा है?" लेकिन आज के अनुसार 24X7 से चलने वाली मीडिया में मामला महज़ 15 सेकंड की साउंडबाइट तक सिमट गया है। अगर हम 1998 की बात करें तो केवल एक 24’7 नेटवर्क था मगर आज एक से ज्यादा 24’7 न्यूज चैनल है ... जो खबरों को देश और दुनिया के बीच से ले रही है, झपट रही है, और खासतौर पर झपटे खबरों में उनकी वो खबर होती है जो हंगामाखेज हो, चटपटी हो, स्टूडियों के अन्दर एसी में पसीना लाने वाली खबर या फिर एकंर को क्यों ना क्रिमनल बनने पर मजबूर कर सनसनी फैलाने वाली हो? जहाँ पहले न्यूज स्टोरी पर रोशनी डालना मकसद होता था, वही अब खबर की जगह सनसनी ने और इतिहास की जगह ड्रामेबाजी ने ले ली है। हां माध्यम वही है मगर संदेश काफी हद तक बदल गया है। शायद इसी का परिणाम है कि दर्शकों द्वारा उसे समझने के तरीके में गुणात्मक परिवर्तन और नकारात्मक सोच आया और यही वजह है कि मीडिया को देखने का नजरिया लोगों में बदलना इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौति बन सकती है?  यहां पर अपने दिशासूचक यंत्र को लेकर चलना बहुत अहम व खास है, जो पत्रकारिता की प्राथमिकताओं को परिभाषित करता है। इसमें कोई दो राय नही की पत्रकारिता संपूर्ण भारत के लिए बदलावकारी घटक हो सकती है, कैमरा और कलम भ्रष्ट को बेनकाब कर सकता है, लेकिन इस पहलू को जोड़ने के लिए हमें ऐसा रास्ता अपनाना होगा जिस पर त्वरित साउंडबाइटस और दोहरावादी ड्रामा, हंगामेंखेज व चटपटी बल्कि जानकारीपरक राय और असल स्टोरिज हों। 

May 3, 2013

=> ब्लैकमेलर का खुलासा



'मेरठ बार असोसिएसन' हुआ लामबन्द

त्रिनाथ मिश्र
                                         ब्लैंक स्टाम्प पेपर बेचने की बात कह कर अधिवक्ता को ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मेरठ बार एसोसिएशन के अधिकारियों ने विरोध व्यक्त कर एसएसपी को ज्ञापन दिया और बताया कि आरोपी विजय कुमार शुक्ला मोबाईल नं0 09058928473 से बार-बार फोन कर नोटेरी अधिवक्ता से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है तथा न देने की स्थिति में जेल भिजवाने व लाईसेंस निरस्त कराने की धमकी दे रहा है धमकी। गौरतलब है कि शाकिर हुसैन परिवार न्यायालय के सामने मेरठ कचहरी में नोटेरी का कार्य करते हैं। बतौर शाकिर हुसैन, विजय शुक्ला ने कहीं से मेरे नाम का दस्तावेज बनवा कर मुझसे एक लाख रूपये की मांग कर रहा है। तथा न देने पर जान से मारने व वकालत का पेशा खत्म कराने की धमकी दे रहा है।

'नई पीढ़ी' ने किया ब्लैकमेलर का खुलासा
                                           अधिवक्ता ने यह व्यथा 'नई पीढ़ी' से कही, 'नई पीढ़ी' ने अपने स्तर से जांच पड़ताल करनी शुरू की तो मामला परत दर परत खुलता चला गया और आरोपी विजय कुमार शुक्ला की बातें भी रिकार्ड हुयी जिसमे वह वकील से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है।

                        
  • फर्जी स्टाम्प बेचने व ब्लैंक स्टाम्प के आरोप में जेल भेजने की दे रहा था धमकी।
  • एक लाख रूपये न देने पर लाईसेंस निरस्त कराने की चेतावनी भी दी।
  • एसएसपी ने एसपी क्राईम को दिये जांच के आदेश।
                        

अधिकारी मुझसे डरते हैं:-
                                      आरोपी ने अधिवक्ता से रौब गालिब करते हुए धमकी भरे लहजे में कहा कि अधिकारी क्या जाने काम करना, उनसे मैं काम करवाता हूं। इससे पहले भी दो वकीलों का लाईसेंस निरस्त करवा चुका हूं। मैं एक एन0जी0ओ0 का कर्मचारी हूं मेरे सम्पर्क में बडे-बडे अधिकारी हैं।
पहले मांगे बीस हजार अब एक लाख
                                       आरोपी विजय शुक्ला ने पहले 20 हजार रूपये मांगे और निर्धारित समय पर न मिल पाने की वजह से वह एक लाख रूपये की मांग कर बैठा। जब अधिवक्ता ने ब्लैंक स्टाम्प के मामले को फर्जी बताया तो उसने कहा की जैसे तैसे इसे पचास हज़ार में निपटा लो वरना तुम्हारा लाइसेंस मई रद्द करवा दूंगा।

Mar 25, 2013

=> पांच बातें जो अपनी गर्लफ्रेंड को न बताएं



कहते हैं बातें करना हर लड़की को बेहद पसंद होता है। हर लड़की अपनी लाइफ में ऐसा प्रेमी चाहती है जो उसकी बातों को सुनें और पूरी तवज्‍जो दे। लेकिन, रिशतों को बनाए 

रखने के लिए सोच-समझकर बोलना भी जरूरी है, जानिए उन बातों को जो आपको अपनी गर्लफ्रेंड को नहीं बतानी चाहिए।


1. सोच-समझकर बोलें-

रिश्ता टूटने के बाद अगर किसी और से रिश्ता बनता है या कोई और व्यक्ति आपके जीवन में आता हैं तो अपने दूसरे पार्टनर को पहले वाले रिलेशनशिप के बारे में सोच समझकर बताएं। क्योंकि अगर आपने पहले वाले पार्टनर कि तारीफ कर दी तो इससे आपकी छवि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है या आपकी छवि खराब हो सकती है।

2. कितने लोगों के साथ डेट किया है-

जब आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ घूमने गए है तो इस बात का जिक्र बिल्कुल न करें कि आप इससे पहले कितने लोगों के साथ घूमने जा चुकी हैं। क्योंकि अगर आपने उसे अपनी बीती जिंदगी के बारे में बताया तो आपकी गर्लफ्रेंड यह सोचेगी कि आप अपने रिश्तों के प्रति गंभीर नहीं है और मिलने के बहाने टाइम पास कर रहे हैं। इसलिए बेहतर होगा कि इस विषय पर किसी तरह कि चर्चा न करे। अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नई जगहों पर घूमने जाएं।

3. शारीरिक संबंधों की बात करने से बचें-

अपने गर्लफ्रेंड से कभी भी उसके भूतपूर्व प्रेमी के साथ बिताए गए अंतरंग पलों की चर्चा कभी न करें। अपनी पूर्व प्रेमिका की खूबियों का बखान करने से बचें। ऐसा इसलिए जरुरी हैं क्योंकि ऐसा सुन कर आपकी गर्लफ्रेंड नाराज हो सकती है और इससे उसका विश्वास भी टूट सकता है। अपने प्यार को परखने के बाद ही कुछ कदम बढाएं।

4. उसकी तारिफ करें-

अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड की तारीफ करते हैं तो उसे अच्‍छा लगता है। इसलिए अपनी गर्लफ्रेंड की तारीफ करना कभी न भूले और न ही उसके तारीफ करने में कोई कसर न छोड़े। अपने गर्लफ्रेंड की तुलना उसके दोस्तों से करें और उसकी तारीफ करते हुए कहें कि अपने दोस्तों में वहीं सबसे हॉट और सेक्सी है, इसलिए आपने उससे दोस्ती की है।

5. एक्स की तारीफ ना करें-

कभी भी आपने एक्स गर्लफ्रेंड की तारीफ न करें। इसके अलावा उसके पहनावे और कपड़ों की भी तारीफ न करें। हो सके तो अपने पूर्व प्रेमिका के दोस्तों से भी कोई रिश्ता न रखे।