May 30, 2013

=> SSP Office 30.05.2013

एमडीए के खिलाफ उतरा रालोद
जिलाधिकरी को ज्ञापन सौंप कर, हो रही अनियमितताओं के जाँच 
की माँग की, पुलिस बल द्वारा किसानों पर उत्पीड़न का लगाया आरोप
मेरठ।  राष्ट्रीय लोकदल के कार्य-कर्ताओं ने प्रदेष अध्यक्ष राममेहर सिंह की अगुआई में कलेक्ट्रेट पर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा तथा बताया की किसानों की जमीन पर मेरठ विकास प्राधिकरण जबरन अपना वर्चस्व दिखा रहा हैै। गौरतलब है की एमडीए द्वारा 1987 में पांच हजार एकड़ की उपजाऊ भूमि


विभिन्न आवासीय योजनाओं द्वारा अपना लिया गया था। और तभी से किसान अपनी जमीन के बदले उचित मुआव्जो की मांग करते आ रहे है।जिलाधिकरी कार्यालय पर प्रदर्षन करते हुजाने की मांग करते हुए कहा की उनकी जमीन के बदले उचित मुआबजा मिलना चाहिए। तथा शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी व लोहियानगर योजनाओं से सम्बन्धित किसानों को 2001 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गणित कमेटी के निर्णयानुसार जो भी रकम मुआव्जे के तौर पर निर्धारित थी उसका भुगतान मेरठ विकास प्रधिकरण करे। इसके साथ ही रालोद कार्यकर्ताओं ने 7 बिन्दुओं पर ज्ञापन सौंप कर जबाव मांगा है। जिसमें किसानों के मुआब्जों सम्बन्धित शर्तों के अनुसार एमडीए से किसानों को भुगतान करने की मांग की गई है।



निष्पक्ष विवेचना की मांग 
मेरठ।  क्राइम कैपिटल के नाम मषहूर मेरठ में पुलिस पर पक्षपात का आरोप आयेदिन लगता रहता है मगर इसके बावजूद पुलिस द्वारा इस मुद्दे पर सोचना तो दूर ध्यान नही दिया जाता। थान किठौर निवासी शहजाद पुत्र समषुद्दीन एसएसपी आफिस पर पहुँच स्थानीय पुलिस पर निपक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाते
हुए बताया की अपहत्य आयषा 14 वर्ष, को अभी तक बरामद न कर पाना कहीं न कहीं पुलिस द्वारा आरोपी पक्ष से मिलकर कार्रवाई में बाधा पहुँचाने की मंषा जाहिर करता है।न्यायालय से गैर जनावती वारन्ट होने के बाद भी खुले में घूम रहे नामजद अभियुकतों के गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया।



लड़के के दबंगई पर भड़की जनता 
मेरठ। खैरनगर अख्तर मस्जिद निवासी युवक न एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया उसे मुहल्ले का ही रहने वाला गुलफाम पुत्र जमीन उससे मारपीट व गाली गलौज करता रहता है। उक्त व्यक्ति मुहल्ले के लोगों को भी परेषान करता रहता है। समझाने पर जान से मारने व परिवार को खत्म करने की धमकी देता है। पीडि़त ने प्रार्थना पत्र देकर देहली गेट पुलिस द्वारा कार्रवाही करने की मांग की। पीडि़त मोहम्मद आषू पुत्र यामीन निवासी अखतर मस्जिद बनवटान का है तथा कई बार उक्त आरोपी को तथा कई बार उक्त आरोपी को नजरअन्दाज कर चुका फिर भी व गुण्डई दिखाना चाहता है।

May 26, 2013

=> एनएच-58 पर बौखलाई जनता का ताँडव


युवक की मौत पर 
बौखलाई जनता का ताँडव 

ट्रक की टक्कर से ट्रैक्टर सवार युवक की मौत पर भडकी जनता, 
ट्रक को किया आग के हवाले, 
कई घण्टे तक एनएच-58 पर गलाया जाम, 
पुलिस से हुई झपड।

मेरठ। कंकरखेड़ा एनएच-58 मार्ग पर कल दादरी के सीमप ट्रैक्टर की ट्रक से टक्कर लगने से चालक की मौत हो गई। इसी बात से गुस्सायें ग्रामीणों ने अपना ताँडव दिखाना शुरु कर दिया। शव को कई घण्टों तक रोड पर रख कर जाम लगाये रखा तथा मौके पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाते हुए दादरी पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा काट दिया। यही नहीं ग्रामीणों ने ट्रक को आग के हवाले करते हुए नारेबाजी भी की तथा हाइवे पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया।
दादरी निवासी सुनील पुत्र खुषीराम सुबह करीब 5 बजे ट्रैक्टर द्वारा खेत से बाहर को जा रहा था। दादरी पुलिस चैकी के समीप एनएच-58 से मुडते समय मुजफ्फर नगर की ओर से आ रहे तेज गति के ट्रक ने जबरदस्त टक्कर मारी तथा टैªक्टर चालक सुनील रोड पर गिर पड़ा और काफी देर तक तडपता रहा। इस घटना के होते ही ट्रक चालक फरार हो गया। सुनील थोड़ी देर बाद ही जीवन की अन्तिम सांस लेकर सड़क पर मरणासन्न हो गया। ग्रामीणों को सुनील की मौत सूचना मिलते ही हंगामा हो गया और कुछ देर बाद ही गुस्साये ग्रामीणों ने हाइवे को कब्जाकर जाम लगा दिया।
पुलिस चैकी है नजदीक:
घटना स्थल से कुछ ही दर पर दादरी पुलिस चैकी है, वहां पर तैनात पुलिस कर्मी को भी इस घटना का पता काॅफी देर बाद पता चल पाया, इस बात का अन्दाजा लगाना मुष्किल है कि क्या वाकई मुस्तैदी से काम करने का ढ़ोग करने वाली पुलिस को इस घटना की ऐन पर भनक भी नहीं मिली।
पुलिस की एक न सुनी:
मौत की खबर आग की तरह फैल गई तथा जाम व हंगामा की सूचना पाकर इंचैली व दौराला इन्स्पेक्टर मौके पर पहुँचे, ग्रामीणों ने उन्हे भला-बुरा कहते हुए जाम खोलने से मना कर दिया। सीओ सदर - देहात विजय प्रताप के जाने पर प्रदर्षनकारियों ने वर्दी पर लापरवाही के तमगे देते हुए झड़प कर लिया। एस.पी. देहात कैप्टन एम.एम. वेग के पहुँचने पर ग्रामीणें में आई जोन व कमिष्नर को मौके पर बुलाने की बात की तथा उच्च अधिकारियों के पहुँचे जाम खोलने से साफ इनकार कर दिया।
हो चुके हैं कई हादसे:
एनएच - 58 पर तेज रफ्तार वाहनों, ट्रकों की चपेट में अब तक कई जिन्दगियां मौत को प्यारी हो चुकी है, मगर ट्रैफिक पुलिस, सिविल पुलिस को इन सभी घटनाओं से कोई वास्ता व सरोकरा होता नहीं जान पड रहा है।
समय पर पहुँचते तो बचने की थी गुन्जाइषः
सुनील काफी देर तक सड़क पर तडपता रहा। यदि पुलिस मौके पर पहुँच कर उसे उपचार के लिये ले जाती तो शायद सुनील की सांसे अभी तक चल रही होती। इसे पुलिस की लापरवाही कहें, अनदेखी कहें, या खुदा का कहर, बरहाल सुनील अब इस दुनिया में नहीं है। इसके जिम्मेदार हर शख्स को सोचना होगा, जागना होगा।

May 21, 2013

=> मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती!


          लोंगो में विश्वास कायम रखना 
मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती!

"'पॉप आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' का कहना शायद सही था, "कि यहां हर कोई अपनी 15 मिनट की शोहरत तलाश रहा है?" लेकिन आज के अनुसार 24X7 से चलने वाली मीडिया में मामला महज़ 15 सेकंड की साउंडबाइट तक सिमट गया है। अगर हम 1998 की बात करें तो केवल एक 24’7 नेटवर्क था मगर आज एक से ज्यादा 24’7 न्यूज चैनल है ... जो खबरों को देश और दुनिया के बीच से ले रही है, झपट रही है, और खासतौर पर झपटे खबरों में उनकी वो खबर होती है जो हंगामाखेज हो, चटपटी हो, स्टूडियों के अन्दर एसी में पसीना लाने वाली खबर या फिर एकंर को क्यों ना क्रिमनल बनने पर मजबूर कर सनसनी फैलाने वाली हो?" 

सिकेन शेखर
                                                           आज के दौर में मीडिया आपसे कितना परिचित है? आप और हम सब मीडिया से कितना परिचित है? शिक्षण संस्थान जो पत्रकारिता तथा मीडिया के उन तमाम पहलुओं से छात्र-छात्राओं को परिचित करवाते हैं वो कितना एक दूसरे से परिचित हैं ये ऐसे मुद्दे हैं जो आज की पत्रकारिता की दुनिया में एक प्रश्नचिन्ह बनकर उन तमाम पत्रकारों पर काले बादल की तरह मडरा रहे है जो अच्छी पत्रकारिता के पक्षधर हैं। पत्रकारों के रास्ते में बाधा बन कर गंभीरता से सोचने पर विवश कर देने वाला कुछ जटिल विषय सामने आता है। आज अगर एक राज्य स्तरीय राजनितिक पार्टी के नेता से राष्ट्रीय स्तर के राजनितिक पार्टी के नेता स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए मिलते हैं -तो खबर तो बनती है भाई, खबर बनना भी लाजमी है! नेता जो हैं, लेकिन उस खबर को उस दिन का प्राइम टाइम खबर बना कर राजनितिक समीकरण जैसे शब्दों का हवाला देना शायद पत्रकारिता के ऊपर सवाल खड़ा करने के बराबर है। लेकिन मसला यही खत्म नही होता अगर उसी दिन उस राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ हजार लोग कुछ जरूरी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते है तो उस न्यूज को एक खबर का भी स्थान ना देना कहीं न कहीं बेमानी है, शायद ये पत्रकारिता की जिम्मेदारी से दूर होकर पत्रकारिता में रह कर इस क्षेत्र पर सवाल खड़ा करना जैसा है। सवाल ये कि मीडिया सवाल तो करती है मगर इस सवाल का जबाब कौन देगा? ना जाने इस तरह कितने ऐसे सवालों से मीडिया घिरी है जिसको कोई उठाने वाला नहीण्ण् खासतौर पर जिस रफ्तार से क्षेत्रीय स्तर पर मीडिया का विकास हुआ है उसी रफ्तार से मीडिया अपनी जबाबदेही खोती चली गई ... जिसका सबसे बड़ा परिणाम निकल कर यह  आया कि आज के दिनों में लोग मीडिया से डरते है मगर मीडिया के लोगों को इस नजर से देखते है जैसे कोई तमाशा करने वाला है और इसमें कोई संदेह नही कि मीडिया कभी.कभी तमाशा से कुछ कम ड्रामा नही करती, ये सच्चाई है कि मीडिया ड्रामा भी करती है ... फिलहाल मीडिया के लिए चुनौती तो ये है कि लोग इस क्षेत्र के लोगों को आदरपूर्वक देखें। य़े जानकर बड़ा आश्चर्य होता है कि सुबह से शाम और शाम से सुबह 24’7 के चाल से चलने वाली इस मीडिया के खिलाफ लोगों का आक्रोश आज तक देखने को नही मिला मगर मीडिया के मंच पर कभी-कभी इस तरह के मुद्दे पर बहस देखने व सुनने को मिलती रहती है ... अगर हम बात करें अन्य लोकतांत्रिक स्तंभ की तो विधाइका, कार्यपालिका व न्यायपालिका, जिसके खिलाफ हमेशा लोगों कि आवाजें उठती रही है, मगर चौथे स्तंभ को लेकर आज तक जन-आक्रोश नही उठीं। कहीं न कही लोग इस मसले को समझ नही पाये, नही तो इसके खिलाफ भी हमें आक्रोश देखने को मिल सकता था? खैर, मीडिया की उम्मीद तो ये है कि स्व विनियमन से इसकी छवि सुधारी जाए ... फिल्म की दुनिया कि बात करे या फिर खबरों की दुनिया की बात करें, ये दुनिया के लोगों का लक्ष्य कहीं ना कहीं अमेरिकी पॉप 'आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' से मिलती नजर आती हैं ... 
                                                      'पॉप आर्ट आइकॉन एंडी वारहोल' का कहना शायद सही था, "कि यहां हर कोई अपनी 15 मिनट की शोहरत तलाश रहा है?" लेकिन आज के अनुसार 24X7 से चलने वाली मीडिया में मामला महज़ 15 सेकंड की साउंडबाइट तक सिमट गया है। अगर हम 1998 की बात करें तो केवल एक 24’7 नेटवर्क था मगर आज एक से ज्यादा 24’7 न्यूज चैनल है ... जो खबरों को देश और दुनिया के बीच से ले रही है, झपट रही है, और खासतौर पर झपटे खबरों में उनकी वो खबर होती है जो हंगामाखेज हो, चटपटी हो, स्टूडियों के अन्दर एसी में पसीना लाने वाली खबर या फिर एकंर को क्यों ना क्रिमनल बनने पर मजबूर कर सनसनी फैलाने वाली हो? जहाँ पहले न्यूज स्टोरी पर रोशनी डालना मकसद होता था, वही अब खबर की जगह सनसनी ने और इतिहास की जगह ड्रामेबाजी ने ले ली है। हां माध्यम वही है मगर संदेश काफी हद तक बदल गया है। शायद इसी का परिणाम है कि दर्शकों द्वारा उसे समझने के तरीके में गुणात्मक परिवर्तन और नकारात्मक सोच आया और यही वजह है कि मीडिया को देखने का नजरिया लोगों में बदलना इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौति बन सकती है?  यहां पर अपने दिशासूचक यंत्र को लेकर चलना बहुत अहम व खास है, जो पत्रकारिता की प्राथमिकताओं को परिभाषित करता है। इसमें कोई दो राय नही की पत्रकारिता संपूर्ण भारत के लिए बदलावकारी घटक हो सकती है, कैमरा और कलम भ्रष्ट को बेनकाब कर सकता है, लेकिन इस पहलू को जोड़ने के लिए हमें ऐसा रास्ता अपनाना होगा जिस पर त्वरित साउंडबाइटस और दोहरावादी ड्रामा, हंगामेंखेज व चटपटी बल्कि जानकारीपरक राय और असल स्टोरिज हों। 

May 3, 2013

=> ब्लैकमेलर का खुलासा



'मेरठ बार असोसिएसन' हुआ लामबन्द

त्रिनाथ मिश्र
                                         ब्लैंक स्टाम्प पेपर बेचने की बात कह कर अधिवक्ता को ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मेरठ बार एसोसिएशन के अधिकारियों ने विरोध व्यक्त कर एसएसपी को ज्ञापन दिया और बताया कि आरोपी विजय कुमार शुक्ला मोबाईल नं0 09058928473 से बार-बार फोन कर नोटेरी अधिवक्ता से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है तथा न देने की स्थिति में जेल भिजवाने व लाईसेंस निरस्त कराने की धमकी दे रहा है धमकी। गौरतलब है कि शाकिर हुसैन परिवार न्यायालय के सामने मेरठ कचहरी में नोटेरी का कार्य करते हैं। बतौर शाकिर हुसैन, विजय शुक्ला ने कहीं से मेरे नाम का दस्तावेज बनवा कर मुझसे एक लाख रूपये की मांग कर रहा है। तथा न देने पर जान से मारने व वकालत का पेशा खत्म कराने की धमकी दे रहा है।

'नई पीढ़ी' ने किया ब्लैकमेलर का खुलासा
                                           अधिवक्ता ने यह व्यथा 'नई पीढ़ी' से कही, 'नई पीढ़ी' ने अपने स्तर से जांच पड़ताल करनी शुरू की तो मामला परत दर परत खुलता चला गया और आरोपी विजय कुमार शुक्ला की बातें भी रिकार्ड हुयी जिसमे वह वकील से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है।

                        
  • फर्जी स्टाम्प बेचने व ब्लैंक स्टाम्प के आरोप में जेल भेजने की दे रहा था धमकी।
  • एक लाख रूपये न देने पर लाईसेंस निरस्त कराने की चेतावनी भी दी।
  • एसएसपी ने एसपी क्राईम को दिये जांच के आदेश।
                        

अधिकारी मुझसे डरते हैं:-
                                      आरोपी ने अधिवक्ता से रौब गालिब करते हुए धमकी भरे लहजे में कहा कि अधिकारी क्या जाने काम करना, उनसे मैं काम करवाता हूं। इससे पहले भी दो वकीलों का लाईसेंस निरस्त करवा चुका हूं। मैं एक एन0जी0ओ0 का कर्मचारी हूं मेरे सम्पर्क में बडे-बडे अधिकारी हैं।
पहले मांगे बीस हजार अब एक लाख
                                       आरोपी विजय शुक्ला ने पहले 20 हजार रूपये मांगे और निर्धारित समय पर न मिल पाने की वजह से वह एक लाख रूपये की मांग कर बैठा। जब अधिवक्ता ने ब्लैंक स्टाम्प के मामले को फर्जी बताया तो उसने कहा की जैसे तैसे इसे पचास हज़ार में निपटा लो वरना तुम्हारा लाइसेंस मई रद्द करवा दूंगा।