Jul 29, 2014

=> भारत में नहीं है राष्ट्रभाषा

गुजरात उच्च न्यायालय ने जब 2009 में अपना निर्णय सुनाया कि भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है, तब हम चौंके अवश्य थे, पर किया कुछ नहीं। न्यायालय ने माना कि देश में बहुतायत लोगों ने हिंदी को अपनी राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया है, अधिकतर लोग हिंदी समझते और बोलते हैं और देवनागरी लिपि में लिखते भी हैं, पर संविधान के अनुसार हिंदी राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं। 
प्रेम लता

गुजरात उच्च न्यायालय ने जब 2009 में अपना निर्णय सुनाया कि भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है तब हम चौंके अवश्य थे, पर किया कुछ नहीं। न्यायालय ने माना कि देश में बहुतायत लोगों ने हिंदी को अपनी राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया है, अधिकतर लोग हिंदी समझते और बोलते हैं और देवनागरी लिपि में लिखते भी हैं, पर संविधान के अनुसार हिंदी राजभाषा है, राष्ट्रभाषा नहीं।
एक जनहित याचिका में अनुरोध किया गया था कि उपभोक्ता को अधिकार है कि वह डिब्बाबंद वस्तुओं में शामिल तत्त्वों का विवरण जाने। चंूकि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसलिए उत्पादकों को हिंदी में विवरण छापने के निर्देश दिए जाएं। वकील ने अपनी बहस में विधानसभा में इस विषय में हुई चर्चा का भी उल्लेख किया। यही नहीं, केंद्र की तरफ से उपस्थित वकील ने यह भी बताया कि माप-तौल विभाग के नियमों के अनुसार सभी पैकेटों पर विवरण हिंदी या अंगरेजी में लिखे और छापे जाने चाहिए। पर न्यायालय का सीधा प्रश्न था- क्या कभी कोई ऐसी अधिसूचना जारी हुई है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा है?
             यहां एक चूक वकीलों से भी हुई। वे यह नहीं बता पाए कि राजभाषा अधिनियम की धारा 3 (3) के तहत कुछ दस्तावेजों का द्विभाषी किया जाना अनिवार्य है। उनका हिंदी को राष्ट्रभाषा कह देना ही बड़ा प्रश्न बन गया। अधिक झकझोरने वाला यह सत्य था कि देश की कोई राष्ट्रभाषा है ही नहीं!

=> लंबे सफर में रिलैक्स रहने के लिए कुछ ऐसा करें


लंबी फ्लाइट्स अक्सर थका देती हैं। इस दौरान क्या खाएं, कैसे बैठें जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाए, तो आप काफी हद तक रिलैक्स रहेंगे। जानते हैं इस बारे में कुछ टिप्स: ट्रैवल करना किसी को भी अच्छा लग सकता है, लेकिन लंबे सफर में आपको थकान महसूस होने के साथ ही बोरियत भी हो सकती है। यह बात एयर ट्रैवल पर भी लागू होती है। साथ ही, मैटर यह भी करता है कि 10 या 12 घंटे की लंबी फ्लाइट में आप क्या खाते हैं और कैसे रिलैक्स रहते हैं। वैसे, कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप अच्छा फील कर सकते हैं।              

Jul 16, 2014

=> नई पीढ़ी के कार्यक्रम में पत्रकारों ने की शिरकत

            पत्रकारिता की वर्तमान दशा एवं दिशा विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मेरठ के सभी पत्रकार बन्धुओं को अपनी-अपनी व्यथाएं व्यक्त करने का मौका मिला। कार्यक्रम का संचालन बंशीधर चतुर्वेदी ने किया तथा संयोजन सत्यप्रकाश मिश्र ने किया। इस अवसर पर नई पीढ़ी के कार्यकारी सम्पादक त्रिनाथ मिश्र ने सभी पत्रकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया और उन्हें एकजुट होकर देश की अखंडता व विरासत के लिए लड़ाई जारी रखने की विनती की।
            इसके बाद आइआइएमटी कॉलेज के लेक्चरर विशाल शर्मा ने अपना वक्तव्य रखते हुए मीडिया की वर्तमान परिस्थिति से अवगत कराते हुए शब्दों व मात्राओं की कमियों की तरफ भी सबका ध्यान आकर्षित कराया और बताया कि हिन्दी पत्रकारिता को अपने वर्चस्व की जंग छोड़कर सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए।  डॉ0 ललित भारद्वाज ने अपने वक्तव्य में पत्रकारों की दिशा पर खास चर्चा की और बताया कि हमें अपने लिए अच्छे मानसिकता का होना जरूरी है तभी कोई आगे बढ़ सकता है।  दैनिक जागरण से  सन्तोष शुक्ल ने अपने उद्बोधन में अच्छी समझ और सकारात्मक रवैया पर बल देते हुए बताया कि पत्रकारिता को एक तहज़ीब व जम़ीर की जरूररत है जिसे दुनिया की कोई ताकत न हिला सके, इसके लिए जानकारियों का होना, विभिन्न विषयों पर पकड़ होना बेहद जरूरी है। समाज में पत्रकारिता और कार्यकुशलता दोनों उच्च दर्जे की होनी चाहिए उसके लिए हम सब का एकत्र होना बेहद जरूरी है और मिलकर ही किसी कार्य को अन्जाम तक पहुंचाया जा सकता है। भाजपा महिला प्रकोष्ठ की मीडिया प्रभारी सीमा श्रीवास्तव ने भी अपना वक्तव्य रखा और कहा की आज हम जो भी देख रहे हैं सुन रहे हैं सब कुछ मीडिया की देन है अगर हम सुरक्षित हैं तो मीडिया की ही वजह से और कुछ नया सीखते हैं तो मीडिया की वजह से।
इस अवसर पर डॉ0 ललित भारद्वाज, सम्पादक न्यूज़ फस्र्ट टीवी, दैनिक जागरण से सन्तोष शुक्ला, एनडीटीवी से शरत चन्द्रा, भाष्कर न्यूज के पश्चिमी उप्र प्रभारी मुनव्वर चौहान, भाष्कर न्यूज से ही शादिक खान, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रताप चौहान, टोटल टीवी से पंकज कुमार मंगल, दैनिक प्रभात से लियाकत मंसूरी, मेरठ मंगल के सम्पादक आदेश जैन, पत्रकार अनुरोध चौहान, पब्लिक जजमेंट की सम्पादक पूजा रावत शर्मा, राष्ट्रीय मानवाधिकार के सम्पादक अखिल कृपाशंकर आदि के अतिरिक्त नेशनल दुनिया, शाह टाइम्स, हिन्दुस्तान, जागरण, अमर उजाला के कई बुद्धिजीवी पत्रकार व फोटोग्राफर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नई पीढ़ी के ब्यूरो ची$फ पनीत शर्मा, रिपोर्टर अमित कनौजिया, सम्पादकीय सहयोगी विजय मिश्र, आयाुतोष मिश्र, विट्टू सैनी आदि का सम्पाूर्ण सहयोग रहा।



Jul 6, 2014

=> हर लडकी के लिए प्रेरक कहानी...

लड़कों के लिए अनुकरणीय शिक्षा..., कोई भी लडकी की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।

  •  प्रिया मिश्रा 
अशोक भाई ने घर मेँ पैर रखा....‘अरी सुनतीे हो !'
आवाज सुनते ही अशोक भाई की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर बाहर आयी और बोली
"अपनी सोनल का रिश्ता आया है,
अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है,
लडके का नाम युवराज है ।
बैँक मे काम करता है।
बस सोनल हाँ कह दे तो सगाई कर देते है."
सोनल उनकी एकमात्र लडकी थी..
घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था ।
कभी कभार अशोक भाई सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पत्नी और सोनल के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन
अशोक भाई मजाक मेँ निकाल देते ।
सोनल खूब समझदार और संस्कारी थी ।
S.S.C पास करके टयुशन, सिलाई काम करके पिता की मदद करने की कोशिश करती ।
अब तो सोनल ग्रज्येएट हो गई थी और नोकरी भी करती थी
लेकिन अशोक भाई उसकी पगार मेँ से एक रुपया भी नही लेते थे...
और रोज कहते ‘बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य मेँ तेरे काम आयेगी ।'
दोनो घरो की सहमति से सोनल और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया.
अब शादी के 15 दिन और बाकी थे.
अशोक भाई ने सोनल को पास मेँ बिठाया और कहा-
" बेटा तेरे ससुर से मेरी बात हुई...उन्होने कहा दहेज मेँ कुछ नही लेँगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई चीज ।
तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए है।
यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हूँ।.. तेरे भविष्य मेँ काम आयेगे, तू तेरे खाते मे जमा करवा देना.'
"OK PAPA" - सोनल ने छोटा सा जवाब देकर अपने रुम मेँ चली गई.
समय को जाते कहाँ देर लगती है ?
शुभ दिन बारात आंगन में आयी,
पंडितजी ने चंवरी मेँ विवाह विधि शुरु की।
फेरे फिरने का समय आया....
कोयल जैसे कुहुकी हो ऐसे सोनल दो शब्दो मेँ बोली
"रुको पडिण्त जी ।
मुझे आप सब की उपस्तिथि मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है,"
“पापा आप ने मुझे लाड प्यार से बडा किया, पढाया, लिखाया खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो चुका सकती नही...
लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने दिया दो लाख रुपये का चेक मैँ वापस देती हूँ।
इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिये हुए उधार वापस दे देना
और दूसरा चेक तीन लाख जो मेने अपनी पगार मेँ से बचत की है...
जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेगेँ,
मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे !
अगर मैँ आपका लडका होता तब भी इतना तो करता ना ? !!! "
वहाँ पर सभी की नजर सोनल पर थी...
“पापा अब मैं आपसे जो दहेज मेँ मांगू वो दोगे ?"
अशोक भाई भारी आवाज मेँ -"हां बेटा", इतना ही बोल सके ।
"तो पापा मुझे वचन दो"
आज के बाद सिगरेट के हाथ नही लगाओगे....
तबांकु, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड दोगे।
सब की मोजुदगी मेँ दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हूँ ।."
लडकी का बाप मना कैसे करता ?
शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन
आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी थी।
मैँ दूर से सोनल को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था....
501 रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....
साक्षात लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं ??
लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ जरुर उठा,
“भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को सोनल जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या"