May 29, 2015

=> शारीरिक आकर्षण को प्रेम समझते युवा

youth infatuationपार्कों में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आपने अकसर किशोरवय प्रेमी जोड़ों को देखा होगा. वह अपने प्रेम में इस हद तक डूबे हुए होते हैं कि उन्हें आसपास की दुनियां की कोई फिक्र नहीं होती. इनको देखकर आपको बहुत अजीब लगता होगा और यह भी सोचते होंगे कि जब आप अपने किशोरावस्था से गुजर रहे थे तो ऐसा कुछ करने के बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं था.
भले ही किशोरावस्था में किसी भी प्रकार के शारीरिक संबंध बनाने से परहेज रखने की बात की जाती हो लेकिन अकसर यही देखा जाता है कि हमारी युवा पीढ़ी स्कूल-कॉलेज में साथ पढ़ने के दौरान ही गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के चक्कर में पड़ जाती है. ऐसा नहीं है कि उन्हें एक-दूसरे से प्रेम हो जाता है, इस आयु में वह केवल एक दूसरे के प्रति शारीरिक रूप से ही आकर्षित होते हैं. यही कारण है कि आधुनिकता से ग्रस्त हमारी युवा-पीढ़ी किशोरावस्था में ही शारीरिक संबंधों में लिप्त हो जाती है. वैसे तो वैज्ञानिक तौर पर यह स्पष्ट किया जा चुका है किशोरावस्था में संबंध स्थापित करने से सेहत को भी नुकसान पहुंचता है, लेकिन एक नए अध्ययन ने यह बात भी स्थापित कर दी है कि जो महिलाएं किशोरावस्था में शारीरिक संबंध बनाती हैं, उनका आगामी जीवन सफल नहीं हो पाता.
      यूनिवर्सिटी ऑफ इवोआ के शोधकर्ताओं ने पाया कि शादी से पहले किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना महिलाओं के वैवाहिक जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. उनके अपने पति से मनमुटाव और संबंधों में दरार पड़ने की संभावनाएं अपेक्षाकृत बढ़ जाती हैं. हैरान कर देने वाली बात यह है कि जहां महिलाओं के लिए ऐसे संबंध तलाक का कारण बनते हैं वहीं पुरुषों के वैवाहिक जीवन में इससे कोई खास अंतर नहीं पड़ता. किशोरावस्था में शारीरिक संबंध बनाने के बावजूद वह एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जीते हैं.
      सर्वेक्षण में शामिल 31% प्रतिशत महिलाएं, जिन्होंने किशोरावस्था में ही शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए थे, वैवाहिक जीवन के पांच वर्ष के भीतर और 47% महिलाएं विवाह के 10 वर्ष के भीतर ही अपने पति से तलाक ले चुकी हैं.

इस शोध की रिपोर्ट में पति-पत्नी में मनमुटाव के कारण और उनके तलाक की वजहों के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ वर्णित नहीं किया गया है. लेकिन मात्र इसी वजह से तलाक हो जाने की बात थोड़ी अटपटी लगती है. क्योंकि वैवाहिक संबंध का निर्वाह करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जिसमें भावनाओं और आपसी समझ का होना बहुत जरूरी है. विवाह से पहले संबंध बनाया जाना विदेशों में मात्र एक प्रचलन के रूप में देखा जा सकता है. महिलाएं हो या पुरुष दोनों ही ऐसे संबंधों को स्थापित करने में कोई गुरेज नहीं करते. लेकिन हां, वहां वैवाहिक संबंधों में आपसी भावनाओं का महत्व बहुत कम है. शायद यह एक वजह हो सकती है तलाक की.
      भारतीय समाज में विवाह से पहले शारीरिक संबंध स्थापित करना पूर्णत: अनैतिक माना जाता है. लेकिन फिर भी व्यक्ति अपनी शारीरिक इच्छाओं और जिज्ञासाओं को पूरा करने के लिए विवाह से पहले या फिर किशोरावस्था में ही ऐसे संबंधों के प्रति आकृष्ट होने लगते हैं. उनका मानना है कि शारीरिक संबंध ही प्रेम-संबंधों को अपने मुकाम तक पहुंचा सकते हैं. जबकि वास्तविकता यह है कि प्रेम को निभाने के लिए शारीरिक संबंधों की स्वीकार्यता व्यक्ति को भोगी बना देती है. प्रेम अपने आप में एक संपूर्ण शब्द है जिसे तब तक किसी अन्य आकर्षण की जरूरत नहीं पड़ती जब तक वह सच्चा हो. हां, अगर प्रेम संबंध का आधार ही केवल शारीरिक आकर्षण है तो बिना संबंध स्थापित किए अफेयर को स्थायी नहीं रखा जा सकता.   -jagranjunction

May 23, 2015

=> हाईटेक इन्टरनेट से लुप्त होते डाकिया

डाकिया डाक लाया खुशी का पैगाम लाया बीते जमाने की बात होगई। जी हॉ कुछ सालो पहले डाकघर के पोस्टमेन कॉ लोगो का बेसब्री से इंतजार करना पडता था। वही डाकियो को सैकडो की संख्या मे पत्र बांटने पडते थे। लोग डाकघर का इस्तमाल पहले किसी त्यौहार राखी, भैयादूज, ईद आदि के मोके पर अपने परिवार वालो को पैसा भेजने के मनीआर्डर का इस्तमाल किया जाता था। लेकिन आज के हाईटेक युग के चलते डाकघर का इस्तेमाल केवल रजिस्ट्री भेजने या सरकारी पत्र भेजने तक ही सीमित होकर रह गया है। लोगो ने त्यौहारो पर पैसा भेजने के लिय सीबीएस ब्रांच का प्रयाग करना तो पत्र भेजने के लिये एसएमएस या ईमेल से काम चलाना षुरू कर देने से जहॉ लोगो की बात साथ साथ होजाती है। वही पैसा जमा करने के तुरंत बाद ही मिलने से लोगो को एक एक सप्ताह का लम्ंबा इंतजार नही करना पडता। कसबे व दैहात के डाकियो के हाथ मे पहले जहा सैकडो की सख्ंया मे पत्रो का जमवाडा रहता था वही अब पोस्टमेन को सिर्फ सरकारी पत्रही बांअने पडते है। लोगों का कहना है कि पहले के समय मे पोस्टमेन के इंतजार मे पहले डाकघर से पत्र लाने का मजा कुछ और ही था। घर पर पोस्टमैन के  इंतजार मे दरवाजे पर खडे रहना अच्छा लगता था।

May 18, 2015

=> ​​सितम भी सहना दुआ भी देना वो बेबसी का गया जमाना...


मॉय सिटी इंफो पत्रिका के कार्यक्रम में मचा धमाल, खूब की मस्ती

त्रिनाथ मिश्र के मंच संचालन से गूंज उठा हॉल, सदस्यों ने दी बधाई

मेरठ। यूनिवर्सिर्टी रोड स्थित होटल वेलकम आलिव्ज में 'मॉय सिटी इंफोÓ पत्रिका के  सदस्यों के सम्मान समारोह एवं 'गेट टू गेदर'
का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेविका मंजू जैन ने पत्रिका के प्रयासों को सराहते हुए समाज के प्रति एक सकारात्मक प्रयास बताया और उन्होंने अपने अनुभवों से इस पत्रिका को और भी आगे ले जाने की बात कही। विशिष्ट अतिथि व्यूटी एक्सपर्ट नीलम सिंह एवं नेहा सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि 'मॉय सिटी इंफो' पत्रिका न केवल समाज की बल्कि पूरे शहर की आवाज बनकर उठेगी और आने वाले समय में यह पत्रिका जानकारी एवं सामाग्री के लिहाज से भी बेहतरी की तरफ अग्रसर होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पत्रिका की संरक्षिका पूनम सैनी ने की और उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि यह पत्रिका ललित सैनी के संपादन में नई उंचाइयों को प्राप्त करेगी और एक नई दिशा प्रदान करने का भी कार्य करेगी। इस दौरान ओम वक्र्स डांस एकेडमी की असिस्टेंट डायरेक्टर ज्योतिका विजय ने सभी अतिथियों को मोंमेंटों देकर सम्मानित किया और मंच पर आसीन कराया।
              कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से आए पत्रकार नितिन द्विवेदी और उत्तराखण्ड से पधारे आरके शर्मा व अंजू सैनी ने पत्रिका के कंटेंट और गुंणवत्ता की तारीफ करते हुए कुशल प्रकाशन पर हर्षित हो पत्रिका को सहयोग करने की बात कही। इस दौरान सैकड़ों की सेख्या में पत्रिका के सदस्यों ने शिरकत की और अपने अनुभव का बेहतरीन और अनोखा बताया।
              इस दौरान पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र में योगदान देने वाले पत्रकारों एवं समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। कवि एवं पत्रकार संतोष त्रिपाठी, लियाकत मंसूरी, वरूण शर्मा, विजय मिश्र, नितिन द्विवेदी, सहजाद खान अािद के कार्यों को देखते हुए सम्मानित किया गया।
               'मॉय सिटी इंफो' पत्रिका के संपादक ललित सैनी ने सभी को धन्यवाद एवं कार्यक्रम में समय से पहुंचने पर आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन त्रिनाथ मिश्र ने किया और संयोजन ओम वक्र्स डांस एकेडमी के डॉयरेक्टर पंकज वर्मा ने किया। 
कार्यक्रम में पियूष वशिष्ठ, अनुराग, अम्बुज रस्तोगी, सचिन शर्मा(हापुड़), शिखा गुप्ता, कुशल अग्रवाल, कु. पायल कश्यप, बबिता नागपाल, पदमराज सैनी, विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे।