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Jan 14, 2020

पुलिस कमिश्नर व्यवस्था से पुलिस व प्रशासन के बीच संतुलन बिगड़ने की आशंका


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उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएसन ने साधी चुप्पी, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर खुलकर रख रहे अपनी राय
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ व गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होना आईएएस लॉबी को रास नहीं आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्णय होने के कारण वे खुलकर इसका विरोध नहीं कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएसन ने भी चुप्पी साधे रहना ही बेहतर समझा है। वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने आशंका जताई कि इस नई व्यवस्था से पुलिस व प्रशासन के बीच संतुलन बिगड़ेगा।
पूर्व मुख्य सचिव योगेन्द्र नारायण ने कहा कि प्रशासनिक ढांचे में सिविलियन अथॉरिटी को सुप्रीम माना गया है। गांव वाले भी राजस्व व पुलिस की शिकायत डीएम से करते थे। आज भी आम आदमी पुलिस की वर्दी से खौफ खाता है। इस कारण पुलिस के पास जाने से संकोच करते हैं। जनता डीएम के पास आसानी से पहुंच जाती है। वर्तमान व्यवस्था ऐसी बनी है, जिसमें डीएम और एसपी के बीच संतुलन स्थापित रहता है। कमिश्नर प्रणाली में यह संतुलन बिगड़ जाएगा।
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन कहते हैं कि डीएम व एसपी समन्वय स्थापित कर जिले में अच्छा काम करते हैं। कई जगह पानी, बिजली व सड़क को लेकर प्रदर्शन होते हैं तो इसमें नागरिक समस्याओं को दूर करने का निर्णय डीएम ही लेते हैं। सरकार ने यह साफ नहीं किया कि उसने पुलिस कमिश्नर प्रणाली क्यों लागू की? वर्तमान व्यवस्था में उसे कहां दोष दिखाई दिया? अभी पुलिस उत्पीड़न की शिकायत डीएम से होती है लेकिन नई व्यवस्था में पुलिस की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं रहेगा।
वहीं, अवकाश प्राप्त आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने ट्वीट कर सरकार के इस फैसले पर कई प्रश्न खड़े किए। उन्होंने कहा, हैसियत बढ़ी या घटी? एडीजी यानी पुलिस आयुक्त का कार्य क्षेत्र एक एसएसपी से भी कम हो गया है। जरूरत पर मजिस्ट्रेट की पावर तो तहसीलदार व बीडीओ को भी दी जाती है। नई व्यवस्था में लखनऊ में 10 और गौतमबुद्धनगर में सात आईपीएस कप्तान तैनात होंगे। इसमें एडीजी वरिष्ठ कप्तान होंगे। सबके कप्तान होने के ख्वाब पूरे हो गए। क्या मजाक है, ये तो बिना पुलिस कमिश्नर प्रणाली के भी कर सकते थे ? यानी कप्तान/डीसी की हैसियत सीओ की कर दी गई। एसीपी अब थाने संभालेंगे।

नई प्रणाली पर विपक्ष ने भी उठाए सवाल

कानून व्यवस्था सुधारने के लिए प्रदेश में दो स्थानों पर पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने के फैसले पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत नहीं होगी तो कोई भी प्रणाली लागू की जाए उसका असर नहीं होगा। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि सिर्फ कुछ जगह पुलिस व्यवस्था बदलने से नहीं बल्कि आपराधिक तत्वों के विरुद्ध दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कानूनी कार्रवाई करने से ही प्रदेश की बदहाल कानून-व्यवस्था में सही सुधार आ सकता है। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार की उम्मीद लगभग
खत्म हो गई है क्योंकि सरकार का इकबाल समाप्त हो चुका है। वहीं कांग्रेस विधानमंडल दलनेता आराधना मिश्रा मोना ने आरोप लगाया कि प्रदेश की बिगड़ती दशा को छिपाने के लिए सरकार ने नया टोटका आजमाया है। कमिश्नर प्रणाली लागू करने भर से हालात नहीं सुधरेंगे। रालोद के प्रवक्ता अनिल दुबे का कहना है कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करना कोई जादू की छड़ी नहीं है। जब तक सरकार भाजपा संरक्षित अपराधियों पर अंकुश नहीं लगाएगी तब तक हालात नहीं बदलेंगे।

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