प्रजापिता ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की पुण्यतिथि शनिवार को आरा सेवाकेंद्र के “प्रभु दर्शन भवन” में मनाया गया। पिता श्री दादा लेखराज के नाम से प्रसिद्ध हीरो के व्यापारी थे। ब्रह्मकुमारी ने रूपा बहन ने कहा कि वे अपना सारा जीवन मानव जाती के श्रेष्ठ चरित्र के निर्माण में लगाया तथा वे नारी शक्ति को आगे बढ़ाते हुए परमात्मा शिव के साकार माध्यम बने। सारी मानव जाति में विद्यमान पांच विकार (काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अंहकार ) को छोड़ स्वयं को के शांत स्वरूप, आत्मा निश्चय कर उस परमात्मा द्वारा सिखाये जा रहे है। राजयोग के द्वारा अपनी सारी पापों को भस्म कर सकते है। पिता श्री जी सदा कहते थे “मीठे बच्चे - कभी किसी को मनसा, वाचा और कर्मणः दुःख नही देना। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने निराकार परमात्मा शिव के श्रीमत पर चल कर इस समाज में एक नए अध्याय का आरंभ किया तथा आदि सनातन दैवी देवता धर्म की स्थापना में अपना जीवन समर्पित कर दिया।


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