Dec 15, 2009

=> ईस्वर से दूर गरीब

लोग कहते हैं की हम जैसा करेंगे वैसा ही फल मिलेगा, जो की तर्कपूर्ण है! इंसान जानवरों से अलग है क्योंकि इशके पास दिमाग जैसी स्कीम  है ! और ईश्वर प्रदत्त  बस्तुएं हमेशा सर्वोपरी होती है ! ऐसे यदि कोई गरीब है तो इसमे  खुद उसका ही हाँथ है! ईश्वर  तक उशे माफ़  नहीं करता है क्योंकि उसने हमें धरती पर भेजा तो हमें दिमाग जैसी स्कीम दी है ताकि हम कठिन परिस्थित में भी तर्कसंगत जबाब ढूँढने में मदद मिले! अब हम यदि ईश्वर से प्राप्त दिमाग का इस्तेमाल खुद को शुख प्रदान करने में न करूं तो भगवान का कोई दोष नहीं है!

                         "दोष हम देते रहे तूफ़ान को
                 और थे कई छेद मेरी नाव में"

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