Sep 10, 2018

=> भारत बंद के खिलाफ कांग्रेस को 21 दलों का समर्थन, लेकिन सपा और बसपा ने बनाई दूरी


  • नई दिल्ली, एजेंसी

पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के खिलाफ कांग्रेस ने आज 'भारत बंद' किया है. कांग्रेस को इस बंद में 21 विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला है, लेकिन राहुल गांधी के साथ मंच पर कई सहयोगी दल के नेता नजर नहीं आए. ऐसे में कहा जा सकता है कि मोदी के खिलाफ सड़क पर कांग्रेस अधूरा विपक्ष को लेकर उतरी है.

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भारत बंद के खिलाफ कांग्रेस को भले ही 21 दलों ने समर्थन दिया हो, लेकिन सपा और बसपा जैसे बड़े दलों का कोई भी नेता दिल्ली में राहुल गांधी के मंच पर नजर नहीं आया. जबकि विपक्ष दलों की ओर से शरद पवार, शरद यादव जैसे बड़े नेता धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे.

हालांकि अखिलेश यादव के ऐलान के बाद आज प्रदेश में किसानों की परेशानियों, पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम एवं मंहगाई, कानून व्यवस्था की बदहाली, बढ़ते भ्रष्टाचार और छात्रों-नौजवानों के दमन के खिलाफ सपा कार्यकर्ता सूबे के हर जिला तथा तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं.

वही, बसपा ने जरूर कांग्रेस के भारत बंद को समर्थन किया है. इसके बावजूद न दिल्ली न यूपी कहीं भी बसपा कार्यकर्ता और न ही नेता नजर आ रहे हैं. इतना ही राहुल गांधी के साथ मंच पर भी कोई बसपा का नेता उपस्थित नहीं था. जबकि इससे पहले कांग्रेस द्वारा विपक्ष की तमाम दलों की बुलाई जाने वाली बैठकों में बसपा मायावती भले ही न आती रही हों, लेकिन पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र जरूर उपस्थित रहते थे.

राहुल की गैरमौजूदगी में बना भारत बंद का प्लान..

राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में भारत बंद को सफल बनाने किए कांग्रेस ने एक खाका तैयार किया. इसके लिए लंबी मीटिंग हुई है. पार्टी के सभी प्रदेश अध्यक्षों को इस बंद को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

कांग्रेस के चाणक्य अहमद पटेल और कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने बंद को कारगार बनाने के लिए विपक्षी दलों को साधने की जिम्मेदारी उठाई. इसके अलावा कांग्रेस ने शरद यादव के जरिए सहयोगी दलों को साधने की कोशिश की.

दरअसल अहमद पटेल और गहलोत के रिश्ते विपक्षी दलों के बीच ठीक-ठाक हैं. वहीं, शरद यादव के रिश्ते भी सपा और आरजेडी जैसे दलों के साथ काफी हैं. इन नेताओं ने विपक्ष के सभी सहयोगी दलों से बातचीत कर भारत बंद में शामिल होने के लिए समर्थन मांगा.

कई दल हुए शामिल

कांग्रेस के भारत बंद में आम आदमी पार्टी भी शामिल है. आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ पैदल मार्च करते हुए नजर आए. लेकिन दिल्ली को बंद नहीं किया. पार्टी ने अपने आपको सिर्फ विरोध तक ही सीमित रखा.

आप की तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी राहुल गांधी के साथ सड़क पर नजर आई. पार्टी ने साफ कह रखा है कि जिन मुद्दों पर बंद बुलाया जा रहा है, वह उस पर साथ है. लेकिन पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की घोषित नीति के मुताबिक वह राज्य में किसी तरह की हड़ताल नहीं करेगी. टीएमसी इस पर कायम है.

कांग्रेस के नेतृत्व में आज भारत बंद में एनसीपी, डीएमके, सपा, जेडीएस, बसपा, टीएमसी, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम, एआईडीयूएफ, नेशनल कांफ्रेंस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा, आप, टीडीपी, केरला कांग्रेस, आरएसपी, आईयूएमएल, शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल, राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकरी पार्टी और हिंदुस्तान अवाम पार्टी (हम) ने अपना समर्थन दिया है. लेकिन इनमें से कई दल ऐसे हैं जिन्होंने राहुल के साथ मंच शेयर नहीं किया है.

कांग्रेस के इस भारत बंद के आह्वान पर विपक्ष के कई दल शामिल नहीं हो रहे हैं. इनमें बीजू जनता दल, टीआरएस और एआईएडीएमके जैसे कई राजनीतिक दल हैं जो 'भारत बंद' के खिलाफ हैं.

मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को भी कांग्रेस ने आज के भारत बंद में शामिल होने के लिए सहयोग मांगा था. रविवार को ही शिवसेना ने भारत बंद में हिस्सा लेने के कांग्रेस के अनुरोध को ठुकरा दिया था. कांग्रेस के आग्रह पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने साफ कहा कि शिवसेना बंद में हिस्सा नहीं लेगी.

=> कवि सम्मेलन में खूब जमा रंग, लोगों ने बजाई जमकर तालियां

मेरठ के गढ़ रोड स्थित एक कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि ईश्वरचंद गंभीर, डॉ. प्रदीप सरावा, तुषा शर्मा ने अपनी कविताओं से सभी का मन मोह लिया। उन्होंने अच्छे गीत पढ़े और श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया।
#dr ishwar chand gambhir
#tusha sharma
#dr pradeep sarawa 
#meerut kavi sammelan

=> गुरु बने घंटाल, शिष्य के शोध को अपनी पुस्तक में ‘उड़ेल’ दिया


  • संवाददाता, ई रेडियो
मेरठ तो वैसे बेहद रहस्यमई और क्रान्तिकारी लोगों की धरती मानी जाती है लेकिन यहां पर उसी मात्रा में ठग और धोखेबाज भी पाये जाते हैं। ताजा मामला है चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहानी का, साहब ने अपने शिष्य द्वारा किये गये शोध में से 36 कवियों के लेख को एकदम बेदर्दी से अपनी पुस्तक में उड़ेल दिया इसके बाद तो जैसा को तैसा मिला। गुरू के घंटाल होने की सूचना पर उनके शिष्य डॉ. मदनपाल मावी ने कॉपीराइट के उल्लंघन की शिकायत की और जनाब दोषी पाए गए।

ऐसे किया साहित्य चोरी

मदनपाल ने वर्ष 2000 में ‘कौरवी जन्य काव्य का सामाजिक अध्ययन’ विषय पर पीएचडी की थी। यह वर्ष 2005 में अवार्ड हुई। प्रो. लोहानी ने उनके शोध से 36 कवियों के लेख हूबहू कॉपी करके अपनी पुस्तक ‘कौरवी लोक साहित्य’ में प्रकाशित करा दिया। दिल्ली के भावना प्रकाशन ने इसके प्रकाशित किया। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हो गई। इस प्रकरण में विश्वविद्यालय अधिनियम 8.1 के अंतर्गत अनुशासन समिति भी गठित कर दी गई है।

=> इन तीन तरीके से सेक्स करें तो नये कपल्स होंगे बेहद खुश

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सभी इंसान हर काम को पहली बार कभी न कभी करता ही है।अब अगर हम सेक्स लाइफ के बारे में बात करें तो यह बहुत ही कम बात किया जाने वाला विषय होता है इसलिए इसके बारे में लोगों में भ्रम की भी स्थिति होती है। जो लोग पहली बार सेक्स करने जा रहे होते हैं उनके मन में कई भ्रम होते हैं।


आप अगर पहली बार अपने साथी के साथ सेक्स संबंध बनाने जा रहे हैं तो आपको पता नही होता है कि आपके साथी को किस तरह का सेक्स पसंद है। आपके फीमेल पार्टनर को सेक्स की कौन सी पोजीशन पंसंद है यह भी आपको पता नहीं होता है। इन सभी परेशानियों से आपको हैरान होने की जरूरत नहीं है। हम यहां तीन ऐसी सेक्स पोजिशन बताने जा रहे हैं जो लगभग सभी फीमेल का पसंद आता है। इन तीन सेक्स पोजीशन को न्यू कपल्स को जरूर ट्राई करना चाहिए।

मिशनरी पोजीशन

वैसे तो यह पोजीशन सबसे आम होती है लेकिन इसमें आप कुछ अलग तरह के ट्रिक्स अपना सकते हैं। जब आप अपने साथी के ऊपर होते हैं तो वह आपको पूरी तरह से देख सकता है। आप इसमें एक तरीका यह अपना सकते हैं कि अपने साथी के सर और कमर के पास एक तकिया लगा सकते हैं इससे आपकी पकड़ मजबूत होगी और आपके साथी को अतिरिक्त जोश की अनुभूति होती है।

मिरर के सामने

किसी भी फीमेल पार्टनर को यह तरीका सबसे ज्यादा पसंद आता है। जो फीमेल अपनी सुंदरता को पसंद करती हैं वो यह करते हुए काफी खुश होती हैं। मिरर के सामने आप एक दूसरे के शारिरिक सौंदर्य को देख सकते हो और आपकी झिझक भी कम होती है। इसके लिए आप कुर्सी का भी उपयोग कर सकते हो, आप इस पोजिशन को कुर्सी में करते हुए बहुत उत्तेजित सेक्स अनुभव कर सकते हैं। इसमें ध्यान रहे की आपकी फीमेल पार्टनर मिरर की तरफ फेस करके आपके साथ इंटरकोर्स करे।

शर्मीली लड़कियों के लिए

कुछ लड़कियां बेहद शर्मीली होती हैं इसके लिए अपनी फीमेल अॉन टॉप पोजीशन को आजमा सकते हैं। आपका पार्टनर अगर बेहद शर्मीला है तो उसे अापकी तरफ पीठ करने को कहें। इस पोजीशन में महिलाओं की उत्तेजना काफी बढ़ जाती है और उनकी शर्म भी कम होती जाती है।



May 9, 2016

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=> टकराव और उन्माद भरे तीन साल

अपनी याददास्त में ऐसी राजनीति कभी बनते नहीं देखी। कोई माने या न माने अगले तीन साल भारत में सियासी झगड़ा ही झगड़ा है। वह सब होगा जो अकल्पनीय है। भाजपा का सीधे निशाना क्योंकि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अहमद पटेल हैं। इनके अलावा राबर्ट वाड्रा, पी चिदंबरम की दूसरी कतार भी निशाने में है। इसलिए अनहोनी बातें होंगी। जांच होगी। पूछताछ होगी। नेता हिरासत में लिए जाएंगे। किसी से घंटों पूछताछ होगी तो कोई जेल में होगा। कोर्ट से सजा के फैसले आएंगे। हिसाब से पक्ष-विपक्ष में टकराव का निर्णायक समय पांच साल की सरकार के आखिरी साल में होता है। सत्ता पक्ष को विपक्ष मारे या विपक्ष सरकार को मारे, यह चुनाव लड़ने की तैयारी का आखिरी साल का हल्ला होता है।
इस दफा तीन साल पहले ही लड़ाई पीक पर है। और लड़ाई आर-पार वाली है। कांग्रेस, सोनिया गांधी, अहमद पटेल एंड पार्टी के साथ क्या होगा, इसकी जितनी कल्पना आप कर सकते हैं उसे मोदी सरकार और भाजपा की आक्रामकता में बूझें। नेशनल हेराल्ड, अगस्ता हेलीकॉप्टर के मामले में मोदी सरकार और भाजपा ने जो आक्रामकता दिखाई है उसका सीधा अर्थ है कि सोनिया गांधी, अहमद पटेल या तो 2018 के आखिर तक निपटने चाहिए अन्यथा भाजपा के लिए लेने के देने पड़ेंगे। तीन साल की अवधि में जांच को, कार्रवाई को किसी अंत परिणति में मोदी सरकार को पहुंचाना होगा। यह नहीं हो सकता कि अभी जैसे सिर्फ हल्ला है उसी तरह तीन साल हल्ला चलता रहे तब मोदी सरकार की जनता में साख क्या बचेगी?
उधर कांग्रेस के लिए जीवन-मरण की लड़ाई है। वह ऐसा हर संभव काम करेगी जिससे मोदी सरकार काम न कर पाए। बदनाम हो। मतलब राजनीति में अब कोई लिहाज नहीं रखा जाएगा। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने ठान ली है कि भारत को सचमुच कांग्रेस मुक्त बनाना है। यह तभी संभव है जब गांधी परिवार भ्रष्टाचार के प्रामाणिक मामलों में कलंकित हो। भाजपा में मानना है कि स्थितियां अनुकूल हैं। एक के बाद एक स्कैंडल मौजूद हैं तो क्यों न भारत को कांग्रेस याकि गांधी मुक्त बनवाया जाए? अगस्ता मामले में इटली के हाईकोर्ट ने यह प्रमाणित कर दिया है कि भारत में रिश्वत बंटी। अब तो सिर्फ मनी ट्रेल, गवाहों की ही तलाश होनी है।
नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी का तकनीकी सवालों में बचाव कर सकना आसान नहीं होगा। इस सोच के साथ सरकार ने राफेल और ट्रेनी विमान की खरीद में भी कुछ मालूम होने पर जांच की जो बात कही है वह भी गंभीर है। उधर नवीन जिंदल के कोयला खान मामले और दसूरी राव के केस के सुराग आखिर कहां जाएंगे इसको ले कर भी भाजपा के अंदरखाने में चर्चा है तो वाड्रा और भूपिंदर सिंह हुड्डा के जमीन मामले की जांच को ले कर भाजपा में कम आत्मविश्वास नहीं है।
इस सबका सीधा अर्थ है कि भाजपा और कांग्रेस का परंपरागत रिश्ता खत्म है। अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार के वक्त कांग्रेस और सोनिया गांधी को ले कर जो सदिच्छा बनाए रखी थी वैसा कुछ नरेंद्र मोदी-अमित शाह के वक्त में नहीं है। तथ्य है कि वाजपेयीझ्रआडवाणी ने कांग्रेस और दस, जनपथ को अलग ढंग से हैंडल किया था। तब तक भाजपा और एक हद तक संघ परिवार में सोच थी कि राष्ट्रीय राजनीति के नाते कांग्रेस का महत्व है। उसे खत्म नहीं होने देना चाहिए।
वह सोच अब नहीं है। एक मुख्य कारण यूपीए सरकार में संघ परिवार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह को कटघरे में खड़ा करने की करतूतें हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ जो हुआ उसे वे कैसे भुला सकते हैं? ये दिल्ली, दिल्ली की एलिट जमात, इनसाइडर जमात की मुहिम को भूल नहीं सकते।
इसलिए यदि आज मसाला है और कांग्रेस लीडरशीप व परिवार को निपटाने का मौका है तो सरकार और भाजपा क्यों बख्सने की सोचें? इस एक सप्ताह में राज्यसभा और लोकसभा में जो हुआ, डा. सुब्रहमण्यम स्वामी, कीरिट सोमैय्या, अनुराग ठाकुर, निशिकांत ने सदन में जो कहा और शुक्रवार को संसद भवन में गांधी की मूर्ति के आगे खड़े हो कर भाजपा सांसदों ने सोनिया गांधी को ले कर जो नारे लगाए उससे यह मकसद जाहिर है कि अगले तीन साल भाजपा अखिल भारतीय स्तर पर गली-गली में शोर बनवा देगी। यह शोर हथियार सौदों में दलाली खाए जाने का होगा।
इसका न समझ आने वाला पहलू तीन साल लगातार टकराव को खिंचाने का है। मोदी सरकार और भाजपा क्या कांग्रेस पर हमले को इतना लंबा खींच सकेंगी? हल्ले के साथ तीन साल में मोदी सरकार क्या जांच को अदालती फैसले तक में बदल सकेंगी? फिर कांग्रेस की जवाबी राजनीति, हल्ले और राज्यसभा में गतिरोध पर सरकार क्या करेगी? कांग्रेस में तो मजबूरी के तकाजे में यह राय है कि सरकार से, नरेंद्र मोदी से अब निजी लड़ाई लड़नी है। नतीजतन आप भी यह विचार करें कि राजनीति का यह टकराव अगले तीन वर्षों में क्या-क्या गुल खिलाएगा, सिनेरियो बनाएगा?

Feb 16, 2016

=> गोली मारकर लूटे 6.5 लाख

निजी स्कूल के सुपरवाइजर को मारी गोली, भर्ती
लालकुती थानाक्षेत्र में कमाण्ड हाउस के सामने हुई घटना
बैंक से कैश निकालकर स्कूल ले जा रहा था युवक

सियासत संवाददाता, मेरठ। 
लालकुर्ती थाना इलाके में एनसीसी के ऑफिस के पास और कमाण्ड हाउस के सामने दिनदहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने एक युवक को गोली मार दी और साढ़े छह लाख रूपये लूटकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही एसएसपी डीसी दूबे समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। घायल युवक उमेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उमेश आइपीएस स्कूल का सुपरवाइजर बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि युवक बैंक से कैश लेकर घर जा रहा था, तभी ये वारदात हुई। पुलिस अधिकारी मौके पर थे और बदमाशों की तलाश पुलिस टीमें गठित कर दी है। इस घटना के बाद पुलिस बदमाशों की तलाश कर रही है।

‘उमेश एक्सिस बैंक से पैसा निकालकर गढ़ रोड स्थित आईपीएस स्कूल ले जा रहा था, तभी ये वारदात हुई। घायल का इलाज अस्पताल में चल रहा है, उसे गोली कंधे को छूते हुए निकली है। बदमाशों का पता जल्द लगा लिया जायेगा।’ -एसएसपी दिनेश चन्द्र दूबे 


लापरवाही अधिकारियों को क्यों दी जाती है कमान?

बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो गये हैं कि अब वे दिन दहाड़े वारदात को अंजाम देकर तमंचा लहराते हुये फरार हो जाते हैं और करोड़ों रूपये खर्च करने के बाद भी ‘हाईटेक-पुलिस’ की घेराबंदी में महज कुछ फैंटमकर्मी और एक-आध थाने की पुलिस ही हाथ लगती है। असली मुद्दा तो हाथ ही नहीं लगता और यही नहीं इस पूरे खेल में ‘बदमाशों और पुलिस की आपसी समझ’ की तरफ भी कभी-कभी गंभीर इशारा होता दिखाई पड़ता है। बहरहाल पूरे मेरठ में कमोवेश यही हाल है, हाइटेक नौचंदी थानाक्षेत्र में जब ‘झपट्टामार’ चेन या मोबाइल छीनकर भागने की फिराक में होते हैं तो सामने खड़े दरोगा जी मोबाइल पर बात करते नजर आते हैं। कई बार तो ‘प्रार्थनापत्र पर मोहर लगवाने के बदले राजनीतिक पहुंच’ बहुत जरूरी हो जाती है। लालकुर्ती थानाक्षेत्र में भी अब ऐसा ही कुछ है। दरअसल लालकुर्ती और नौचंदी थानाक्षेत्र में कुछ विशेष कनेक्शन है यानी लापरवाह अफसरों का जमावड़ा। कुछ साल पहले नौचंदी के ‘कड़क थानेदार’ को उनकी मगरूरी के चलते एसपी सिटी ओमप्रकाश ने लताड़ लगाई थी तो वहीं तत्कालीन आईजी आशुतोष पाण्डे ने लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया था।
          अब यही ‘दरोगा जी’ लालकुर्ती क्षेत्र की कमान को पकड़ चुके हैं। पिछले दिनों इनकी नाकामियों के चलते ही लालकुर्ती में संप्रदायिक तनाव हुआ था। और मामला दोनो संप्रदायों के बीच सुलगने लगा, जैसे-तैसे मामला शांत हुआ और अब क्षेत्र शोहदों, मनचलों और अपराधियों की धमक से कांप रहा है। सवाल यह है कि जनता की सुरक्षा में ऐसे लापरवाह पुलिसकर्मियों को थाने की कमान क्यों दी जाती है जो पूर्व में ही अपनी लापरवाही के कारण पुलिस की किरकिरी करा चुके हैं?

Feb 10, 2016

=> ‘कलम के वास्ते हम जंग को तैयार बैठे हैं’

सियासत संवाददाता


सर्किट हाउस में पत्रकारों की सभा आयोजित
पत्रकारों पर हमले की हुई निंदा

मेरठ। सुरक्षा, सम्मान एवं एकजुटता को लेकर मेरठ के पत्रकारों ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमें जनपद के अखबार, टीवी चैनल, पत्रिका के संपादक, संवाददाता मौजूद रहे। बैठक का मुख्य विषय पत्रकारों
पर लगातार हो रहे हमलों पर केंद्रित था। इसके अलावा बुलंदशहर एवं शामली में पत्रकारों से अभद्रता होना, मेडिकल कालेज मेरठ के सीएमएस को पत्रकार से मारवीट करवाने के कारण सस्पेंड करना, अंकुरित हो रहे पत्रकारों के समुचित विकाश हेतु वर्कशाप आयोजित करना, पत्रकारों के बेहतर स्वास्थ्य मेडिकल कैंप का आयोजन करना आदि मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविन्द गोयल एवं संचालन परवेज त्यागी ने किया।

 सभा के दौरान अपने आचारण को अच्छा बनाने, पत्रकारों की आर्थिक मदद हेतु फण्ड बनाना, मनभेद को मिटाना, छोटे-बड़ों का अन्तर खत्म करना, संगठित होकर कार्य करना, अपनी मर्यादा का पालन करना एवं सही मायने में पत्रकार की भाषा को समझने आदि बातों पर प्रकाश डाला गया। सभा में वक्तव्य के दौरान गुरमीत साहनी ने कहा कि पत्रकारों के हितों की बात कहने वालों को एजेण्डा बनाकर कार्य करना चाहिये। अपने अहंकार को त्याग कर ही कोई सही मायने में पत्रकार बन सकता है। पत्रकारों को एक-दूसरे के चरित्र, कार्य एवं निजी जिंदगी के सम्बंध में प्रमाणपत्र देने की बुरी अवधारणा को समाप्त करना चाहिये। अखबार निकालने के नियमों में सख्ती की जाये। श्याम परमार ने कहा कि चुनाव-विहीन प्रेस क्लब की
स्थापना ही पत्रकारेां के लिये सबसे बड़ी जीत होंगी।
पत्रकार की हैसियत को मिली चुनौती
सभा के दौरान ब्रिजेश चौधरी ने कहा कि, ‘बुलंदशहर में पत्रकार की हैसियत को चुनौती देने वाली जिलाधिकारी को अब जवाब दिया जाना चाहिये। असके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि अपना प्रेस क्लब होते हुये भी सर्किट हाउस में जमीन पर बैठकर सभा की जा रही है, इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ भी नहीं हो सकता। अपने सभी दातों को मजबूत बनायें तो चना चबाने में भी सहूलियत हो जायेगी।
मनमोहन भल्ला ने कहा कि, ‘हमीं बुनियाद के खम्भे हैं.. हमें घर से निकाला जा रहा है।’ सुनील बादली ने कहा कि अपने आचरण को सही करें, संगठित हों तो मन से दिखावे में नहीं। पत्रकारों की सहायता हेतु फण्ड बने। ज्ञान प्रकाश ने कहा, ‘पत्रकारों पर हमला तब होता है जब लीक से हटकर कार्य होता है। हरेंन्द्र चौधरी ने पत्रकारों के लिये बीमा कराने की बात बड़ी ही दृढ़ता के साथ रखी। दिनेश चंद्रा ने हैसियत का आकलन करने की जरूरत पर बल दिया। कमल भार्गव ने कहा कि पत्रकार को यह सोचना चाहिये कि क्या वह वाकई स्मार्ट है? हमें आईटी सेल के एक व्यक्ति को चुनकर उसे ही ग्रुप और सोशल साइट चलाने की बात कहनी चाहिये। बल्कि ह्वाट्सएप ग्रुप न बनाकर ब्रॉडकास्ट लिस्ट के जरिये अपने मीटिंग की सूचना पहुंचानी चाहिये। उस्मान चौधरी ने कहा कि पत्रकार होने का का्रइटेरिया बने और किसी भी जीत को हासिल करने के लिये अपने आप को परिभाषित करना बेहद जरूरी है।
राजेन्द्र चौहान ने अनुशासन को जरूरी बताया तो वहीं अरविन्द शुक्ल ने सभा में पत्रकारों के मतभेदों को सुलझाने का सफल प्रयास भी किया। सभा के अन्त में चीकू कौशिक की रिश्तेदार के निधन पर मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान धर्मेंद्र कुमार, सुभाष चंद्र, अनवर जमाल, नाहिद फात्मा, संगीता श्रीवास्तव, शाहीन परवीन, राशिद खान, ब्रिजेश जैन, नईम सैफी,  सचिन गुप्ता, सलीम अहमद,  त्रिनाथ मिश्र, अब्दुल कादिर, वरूण शर्मा, पूजा रावत, आदेश जैन, सुन्दर, अभिषेक, अभय प्रताप, मनव्वर चौहान, संजीव शर्मा, राहुल राणा, के अतिरिक्त जनपद के समस्त पत्रकार उपस्थित रहे।

Feb 7, 2016

=> "बेटी की पुकार" मुझसे यह कह रही है कि सिकेन मेरी माँ से ये बातें कह दो जरा ......

  • 1 फरवरी की सुबह नई दिल्ली में बेटी की पुकार "तू ही रे" के तैयारियों के साथ शुरू  होती है। मन में जोश और जुनून कुछ इस कदर छाया था जैसे मानो "बेटी की पुकार" मुझसे यह कह रही है कि सिकेन मेरी माँ से ये बातें कह दो जरा। ......
  • सिकेन शेखर 
अम्मा, मेरी अम्मा नजर आता है डर ही डर तेरे घर-बार में अम्मा,
नही आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा,
नजर आता है डर ही डर तेरे घर-बार में अम्मा
यहाँ तो कोई भी रिश्ता, नही विश्वास के काबिल
सिसकती है मेरी सांसें, बहुत डरता है मेरा दिल
समझ आता नही ये क्या छुपा है प्यार में अम्मा।
नही आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा ......
मुझे तू कोख में लाई, बड़ा उपकार है तेरा
तेरी ममता, मेरी माई, बड़ा उपकार है तेरा
न शामिल कर जनम देने की ज़िद, उपकार में अम्मा।
नही आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा ........
उजाला बन के आई हूँ जहाँ से, मुझको लौटा दे
तुझे सौगंध है मेरी, यहाँ से, मुझको लौटा दे
अजन्मा ही तू रहने दे मुझे संसार में अम्मा।
नही आना मुझे इतने बुरे संसार में अम्मा ......
मगर सबसे बड़ा सवाल यह कि यह मुकम्मल योजना दरअसल किसके लिए होगा? क्या समाज में बेटियों को जन्म लेने के बाद सरकार कभी सुरक्षा की ज़िम्मेदारियां लेगी? सच्चाई यह भी है कि जब तक एक बेटी समाज में सुरक्षित नही तब तक कौन सरकारी योजना का फायदा लेगा? जब सरकार को यह तमाम समीकरण इर्द-गिर्द नज़र आती है तो "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" को आंदोलन जैसे शब्दों से जोर देती है। एक बेटी के द्वारा कहना कितनी शर्म की बात होगी कि इस संसार में मुझे रहने और पढ़ने के लिए सरकार जो इस वक्त सत्ता में है। वह आंदोलन कर रही है। "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नाम पर। यह सब जानते हुए कि मैं इस संसार में सुरक्षित नहीं।
को गिनते रहे सरकार की कोई भी योजना या कानून सफल होता नही दिखता, सरकार की कोई भी पंच लाइन नेशनल क्राइम ब्यूरो की तरफ से आने वाले रिपोर्ट को चुनौती देता नही दिखता।
अपनी तमन्नाओं और ख्वाहिशों को नया रंग देने का दिन है,
मैं कर सकता हूँ और कर रहा हूँ
ये साबित करने का दिन है,
मैं जलकर भी उजाला कर दूंगा इस जहाँ में
आज अंधकार मिटाने का दिन है। (सबसे पहले इन पंक्तियों के सहारे निलिमा ठाकुर जी 'बेटी की पुकार'- "तू ही रे" के दिन को समझाती है।) आपकी खबर के मुताबिक "निवेदिता फाउंडेशन की सचिव नीलिमा ठाकुर कहती है कि इस आयोजन के ज़रिए माँ बेटी के बीच के पावन रिश्ते के मर्म को लघु नाटिका बेटी की पुकार " तू ही रे " के जरिये इस मंच से समाज के लोगो के मानसिक पटल पर उकेरने का प्रयास थी जिसमे सभी के सहयोग से कामयाबी मिली ! इस मंच से समाज में एक संदेश देने की कोशिश की गई कि माँ और बेटी दोनो ही समाज का अभिन्न अंग हैं ! माँ के बिना समाज की कल्पना जैसे नहीँ की जा सकती वैसे ही एक बेटी के बिना हम समाज में प्रेम की नींव नहीँ डाल सकते ! दोनो ही त्याग और प्रेम की जीवंत मिसाल के रूप में खुद को संजोये हुए हैं।"
मंच पर न्यूज़ एंकर अनुराधा दास के साथ एक पहला मौका था मेरे पास एंकरिंग करने की। थोड़ा डर भी लग रहा था अभी कुछ ही दिन पहले 3 फरवरी को रात में 11 बज कर 49 मिनट पर मैंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये आप लोगो से कहा था कि "देश की राजधानी नई दिल्ली में पहला मौका था जब 'निवेदिता फाउंडेशन' की सचिव निलिमा ठाकुर मैम ने एक बड़ी जिम्मेदारी मुझे दी थी । 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' इसे पूरे देश में एक आंदोलन का रुप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में इस अभियान की शुरुआत किए थे । इन सब के बीच मुझे इसकी सुगबुगाहट 2005 से नजर आती है। कब कहाँ और कैसे? अगर आप बेटी की पुकार '' तू ही रे '' कार्यक्रम का हिस्सा नही बने हो तो आपके लिए मैं शुक्रवार को शाम के 7 बजे अपने Blog Beyond The Third Eye में इस कार्यक्रम के तमाम पहलू को समझाने की कोशिश करूँगा । उम्मीद है आप इसका हिस्सा जरूर बनेंगे और निलिमा मैम की इस आंदोलन को आगे जारी रखने में मदद करेंगे । जय हिन्द।" तो आइये आपको बताता हूँ 2005 कि वह कहानी -
अपनी योजना के बारे बताते हुए पालीवाल कहते है कि ग्राम पंचायत में पास किए गए प्रावधान के तहत हर साल एएनएम सेंटर से यह लिस्ट ली जाती है कि हमारी ग्राम पंचायत में इस साल कितनी बेटियां पैदा हुई। फिर जिस परिवार में बेटी पैदा हुई होती है,उस परिवार को बुलाया जाता है। जैसे एक साल में ग्राम पंचायत में 10 बेटियां पैदा हुई तो उन दसों परिवार के लोगो को बुलाया जाता है। उनका सम्मान करने के साथ ही उन्ही के हाथों 111 पौधे लगवाए जाते हैं। ग्राम पंचायत के लोग चंदा इकठ्ठा करते हैं। फिर बेटी के परिवार से चंदा लिया जाता है। इसके बाद हर बेटी के नाम से 30 हज़ार रूपये की फिक्स डिपाजिट करवाई जाती है। एक एफडी 18 से 21 साल के लिए होती है। इस रकम से लड़की के माता-पिता चाहें तो बेटी की शादी करें अथवा उसकी उच्च शिक्षा में खर्च करें। ग्राम पंचायत पिपलांत्री में वर्ष 2005 में शुरू हुआ यह अभियान दिनोंदिन आगे बढ़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत में करीब चार लाख से भी ज्यादा पौधे लगाये जा चुके हैं।
क्या कहते है? "है न रोचक कहानी"
तो आप आज क्या निर्णय लेने वाले है कुछ करने कि जब घर में बिटीया जन्म लेगी।
'नेहा नाहटा' ने 'बेटी की पुकार' पर आधारित इस शो पर अपनी विचार कुछ इस तरह रखी है-
बेटे से कम नही, जज्बा मेरा
बनूंगी हौसला तेरा ,हारो नही माँ
जन्म दो,मारो नही माँ
"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ"बस नारा नही ,एक प्रण बने
सृष्टी का संतुलन,बिगाडो नही माँ
जन्म दो, मारो नही माँ. ...... (नेहा नाहटा)
बेटी भार नहीं आभार है,बेटी कुदरत की करुण पुकार है
बेटी है तो कल है, बेटी है तो हर पल है।
बेटी नहीं तो सब गुमशुम हैं।
आओ बेटी के सम्मान में दुनिया दुनिया अलख जगाएं
बेटी बचाएं बेटे पढ़ाएं॥कुछ इसी सन्देश को लेकर मंच पर आगाज़ करने उतरी बेहद ख़ास अंदाज़ वाली और जोशीली टीवी पत्रकार, एंकर अनुराधा दास जिनका साथ दिया मेरठ स्थित इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यट के युवा लेक्चरर एवं पत्रकार सिकेन शेखर ने।
बेटी की पुकार "तू ही रे " के विषय पर आधारित माँ बेटी के रिश्ते पर आधारित इस अलग तरह के शो का आयोजन निवेदिता फाउंडेशन और इलीट इंडिया फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से माँ बेटी के सम्मान में
आयोजित किया जिसमे मुख्यत इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया की माँ और बेटी के बिना किसी भी समाज की कल्पना बेमानी होगी । जैसे माँ अपने त्याग की बदौलत घर परिवार ,समाज और देश के लिए अपना अर्वस्व कुर्बान कर देती है वहीँ बेटियां भी प्यार और त्याग की मिसाल के तौर पर जानी जाती हैं । लेकिन आज के इस कार्यक्रम का केंद्र वो माँ और बेटियां रही जिन्होंने कदम से कदम मिला कर एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और इस मंच से एक दूसरे से ये वायदा लिया की हर कदम पर एक दूसरे की संगी साथी के रूप में सदैव खड़ी मिलेंगी ।
लेकिन कुछ ऐसी बेटियां जो समाज में आने से पहले ही मार दी जाती हैं । जिन्हे पैदा होने से पूर्व ही या तो गर्भ में खत्म कर दिया जाता है या फिर पैदा होने के बाद दरकिनार कर दिया जाता है । ऐसी बेटियों के लिए यह शो आज मील का पत्थर साबित होगा क्योकि यह अकेला इस प्रकार का शो माना जा रहा है जिसमे कुछ अलग प्रकार से अजन्मी बेटियों के अंतर्मन की व्यथा को समाज में रखा । जिसमे पदार्पण ग्रुप के कलाकारों ने पेश किये नाटक से यही विषय उठाया की जन्म से पूर्व अगर बेटियों की ह्त्या यूँ ही जारी रही तो एक दिन ना बेटी होगी न बहु,ना बहन होगी न भाभी ,ना बीवी होगी और ना माँ । औरत के समाज से विलुप्त होने की कल्पना मात्र से दिल दिमाग सिहर उठता है तो आप कल्पना कीजिये जिन लोगो ने इस नाट्य रूपांतरन को शो में न आकर मिस किया उन्हें कितना अफ़सोस हो रहा होगा ।
शो की शुरुआत एक बेहद ममर्स्पर्शी गीत बेटी की पुकार से परदे पर हुई । शुरआत से ही दर्शको में उत्साह और शो के प्रति ललक साफ़ देखी जा सकती थी । बेटी की माँ की कोख से वो मर्मस्पर्शी अपील को सुनकर दर्शको में सन्नाटा पसर गया । विशेष अतिथि , जज और दर्शको में से कई लोगों को आँशु पोंछते साफ देखा जा सकता था ।
" बेटी ये कोख से बोल रही माँ कर दे तू मुझपे ये उपकार । मत मार मुझे जीवन दे दे मुझको भी देखन दे ये संसार " जी हाँ इसी अंतर्मन को झकझोर देने वाले गीत ने माहोल को बेहद ग़मगीन बना दिया ।
ऐसे में शो में गीत संगीत के दो महारथी इंडियन आइडियल के पूर्व प्रतियोगी सुमित चौहान और कोयल जैसी आवाज़ वाली प्रिया दास ने अपने गीतों से माहोल में हल्कापन बनाये रखा । सुमित चौहान के गीत "आपके हसीन रुख पर आज नया जो नूर है " को जहाँ तालियों की गड़गडाहट मिली वहीँ प्रिया की खूबसूरत प्रस्तुति " बातें तू ये कभी ना भूलना, तेरी खातिर कोई जी रहा" ने दर्शको में मस्ती का माहोल बना दिया ।
वहीँ कार्यक्रम की मुख्यधारा शो में प्रतियोगी के रूप भाग ले रही माँ बेटियों के इर्दगिर्द ही घूमती रही । पहले बेटियों का देशी विदेशी परिधानों में रेम्प पर कैटवाक लिए आना कहीं से भी किसी अंतर्राष्ट्रीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट की ब्यूटी क्वीन से ये खूबसूरत बेटियां कम नहीं लग थी । शो के कॉन्सेप्ट में चार चाँद उस वक्त लग गए जब माँ बेटियां बाहों में बाहें डाले रेम्प पर उतरी। मानो पूरा परी लोक मुक्तधारा ऑडिटोरियम के मंच पर उतर आया !
माँ बेटियों ने जज पैनल में मौजूद महिला वकील भावना बजाज, फैशन डिजायनर अर्चना तोमर ,डीआईडी सुपर मॉम की पूर्व प्रतियोगी और नृत्यांगना शिप्रा शर्मा और छू ले आसमान एनजीओ मुरादाबाद से आई वर्षा चौहान के सवालो का जवाब देकर जजो का ही नहीं सभी दर्शको का दिल जीत लिया । जिसकी गवाही ऑडिटोरियम में तालियों की गड़गडाहट दे रही थी । हर माँ ने अपनी बेटी के महत्व का बखान कर जज पैनल और दर्शको का दिल जीत लिया । वहीँ बेटियों ने अपने चिरपरिचित अंदाज में माँ पर मंच से ही खूब प्यार लुटाया जिसके लिए बेटियां जानी जाती हैं ।
जज भावना बजाज, अर्चना तोमर , शिप्रा शर्मा और वर्षा चौहान ने सर्वसम्मति से सभी माँ बेटियों को बराबर अंक देकर सभी को विजेता घोषित किया । पैनल के मुताबिक़ आज ऐसे माहोल में कोई माँ बेटी दूसरी माँ बेटी से कमतर नहीं आंकी जाए । क्योकि हर माँ बेटी आज इस मंच से एक दूसरे के लिए ही नहीं समाज के लिए यह सन्देश छोड़ कर जा रहीं हैं की बेटी को जन्म दें बेटी को मारें नहीं ।
लेखिका और समाजसेविका पूनम मटिया अपनी खूबसूरत बेटी तरंग ,नेहा नाहटा बेटी नेत्रा ,रश्मि सचदेवा अपनी परी बिटिया आस्था , नीतू नागर अपनी बेटी नन्ही परी , फरीदाबाद की सामाजिक कार्यकर्ता गीता अपनी बिटिया विधी और मेकओवर आर्टिस्ट संध्या मदान अपनी फूल सी कली चार्वी संग मंच पर समाज के लिए सवाल छोड़ गई की जब हम माँ बेटियां माँ बेटी के पावन रिश्ते को साथक बना सकती हैं तो माँ बाप दादा दादी क्यों न रिश्ते को समझते हुए अपनी अजन्मी बेटी की पुकार सुने ?
इससे पहले विशिष्ट अतिथियों जिनमे वरिष्ठ वकील, संत और सामाजिक विचारक श्री राजबीर सिंह ढाका और श्री राजीव गर्ग के कर कमलो दवारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की औचारिक शुरुवात हुई जिसके उपरान्त बेटी की पुकार पर आधारित एक लघु नाटिका शो का मंचन बेहद अहम हिस्सा रहा ।
निवेदिता फाउंडेशन और इलीट इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस शो में देश के कोने कोने से लोग सहयोग करने इस मंच पर एक साथ मौजदू दिखे जिनमे पेजथ्री सेलिब्रेटी सलोनी सिंह ,डिवाइन प्रोडक्टन कम्पनी से गोपाल पंडित, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकाश विभाग में सहायक निदेशक मनोज चंद्रा, हरियाणवी फिल्म एक्टर वीर दहिया, नोएडा के समाज सेवक योगेश शर्मा, नमिता राकेश ,ब्लेसिंग इंडिया फॉउन्डेशन की फाउंडर सुमन रेखा कपूर , ने इस प्रयास को खूब सराहा ।
निवेदिता फाउंडेशन की सचिव नीलिमा ठाकुर कहती है कि इस आयोजन के ज़रिए माँ बेटी के बीच के पावन रिश्ते के मर्म को लघु नाटिका बेटी की पुकार " तू ही रे " के जरिये इस मंच से समाज के लोगो के मानसिक पटल पर उकेरने का प्रयास थी जिसमे सभी के सहयोग से कामयाबी मिली ! इस मंच से समाज में एक संदेश देने की कोशिश की गई कि माँ और बेटी दोनो ही समाज का अभिन्न अंग हैं ! माँ के बिना समाज की कल्पना जैसे नहीँ की जा सकती वैसे ही एक बेटी के बिना हम समाज में प्रेम की नींव नहीँ डाल सकते ! दोनो ही त्याग और प्रेम की जीवंत मिसाल के रूप में खुद को संजोये हुए हैं !
वहीं इलीट इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर नरेश मदान कहते हैं कि "तू ही रे" एक ऐसी सोच को लेकर पैदा हुआ जिसमे औरत के विभिन्न रूपो को समाज मे रखा जाए | इस प्रयास की शुरआत माँ और बेटी के रिश्ते से बेहतर नही हो सकती थी | भ्रूण हत्या ,बालिका वधु ,दहेज हत्या,ऑनर किलिंग और बलात्कार जैसी जघन्य अपराधों ने जहाँ माँ बेटी दोनो के लिए असहाय हालात पैदा कर दिए ! इन्हीं हालातों को बदलने का संदेश देने की कोशिश में "तू ही रे" को मंच पर उतारा गया ! इलिट इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर नरेश मदान और निवेदिता फाउंडेशन की चीफ नीलिमा ठाकुर ने अपनी टीम के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया ।
आलोक श्रीवास्तव के द्वारा लिखा गीत की इन पंक्तियों से दरअसल बेटी की एहसास और आवाज को समझा जा सकता है। मगर आज जिस तस्वीर को, एहसास को और आवाज को सुनना चाहते है वह इसके ठीक विपरीत है क्योंकि जब एक तरफ एक बेटी कोख में रह कर अपनी माँ से सब कुछ कह रही है कि जिस घर में समाज में, संसार में तुम मुझे जन्म दे कर ला रही हो वहां डर लगता है मुझे। इस बुरे संसार में नहीं आना मुझे क्योंकि यहाँ तो कोई भी रिश्ता नही विश्वास के काबिल। माँ सिसकती है मेरी सांसे बहुत डरता है मेरा दिल। तो सरकार के समक्ष एक ऐसी चुनौती दिखती है जिसे हम और आप एक दो शब्दों में ही समझ सकते है। आइये जरा समझते है -
केंद्र सरकार आज बेटी को पढ़ाने के लिए मुकम्मल योजना बनाई है। योजना, योजना एक-दो बार लगातार जोर से बोली जाए तो बेटी के मुद्दे, बेटी से सम्बंधित मसले सब छिप जाते है। इस 67 वर्ष के गणतंत्र में हम और आप एक राज्य को संपूर्ण साक्षर राज्य के तौर पर देख रहे है तो दूसरी ओर सरकार बेटी को पढ़ाने के लिए सरकार मुकम्मल योजना बनाती दिखती है और तीसरी तस्वीर बेटी की है जो अपनी माँ से जन्म लेने के पहले कोख में कह रही है कि मुझे आना नही इतने बुरे संसार में अम्मा।.... तस्वीर साफ है।
भारत देश के विभिन्न प्रदेशों में महिला जन्म दर की स्थिति देखें तो चौकाने वाली है। सबसे ख़राब हालत हरियाणा की है। इसी संकट से निबटने के लिए "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान, आंदोलन या इसे मुकम्मल योजना कहे जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से की। इन सब के बीच महिलाओं की सुरक्षा के मामले में देश की हालात बिलकुल नही बदला। देश की राजधानी नई दिल्ली की बात करें या क्यों न एक एक कर के राज्यों में हो रहे महिलाओं के खिलाफ अपराध की गिनतियों 
भारत देश में महज़ 29 मिनट में एक महिला के साथ रेप किया जाता है। इन सब के बाद भारत महान देश के श्रेणी में चुन लिया जाता है। भारत के पुरुष अगर 29 मिनट में क्राइम रिकॉर्ड को बरक़रार रखना चाहते है तो हम किस तरह की विकसित देश बनाने की कल्पना कर रहे है। मकसद समझना बेहद जरुरी है क्योंकि बात बेटी बचाने की हो रही है और साथ ही बेटी पढ़ाने की। इस वक्त देश की स्थिति महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है और इन सब के बीच "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसे मसले पर कोई भी शुरुआत करना बेहद जटिल है और इन जटिल मुद्दों को जड़ से सफाया करने की कोशिश एनजीओ 'निवेदिता फाउंडेशन' की सचिव निलिमा ठाकुर कर रही है।
आइये समझते है निलिमा ठाकुर की नज़रिया से बीते दिन नईं दिल्ली में आयोजित हुए 'बेटी की पुकार'- "तू ही रे" कार्यकर्म को -
आज कोरे आसमान पे एक पैगाम लिखने का दिन है 
और कोई साथ दे तो भला और न दे तो भला 
निलिमा अपने संबोधन में कहती है "माहौल और देश की बात करें तो जागरूकता की जरूरत हर जगह पड़ती है और आज विश्व जिस दौर से गुजर रहा है। वहां सिर्फ बेटी बचाओ की बात नही बेटी बचाओ के साथ मानवता की बात है। क्या पेरिस, क्या भारत, क्या पाकिस्तान, सिरिया, इजराइल या ऑस्ट्रेलिया एक आतंकवाद की दहशत गर्दी से हर मुल्क की आवाम संकट में है। रोज न जाने कितने बेगुनाह बेमौत मर रहे है। हमें इस पर विचार करनी चाहिए कि हम एक अच्छा इंसान कैसे बने? वह कहती है हिन्दू मुस्लिम ईसाई नही विचार और होशपूर्ण धार्मिक आदमी बनना है। क्योंकि जिसमें सोच है, जिसेमें होश है वो कभी किसी के दुःख का कारण नही बन सकता।
राजस्थान में उदय पुर से करीब 70 किलोमीटर दूर राजसमंद जिले में करीब साढ़े आठ हज़ार आबादी वाली पिपलांत्री ग्राम पंचयात स्थित है। निर्मल, आदर्श एवं जाग्रत ग्राम पंचायत का पुरस्कार हासिल करने वाले पिपलांत्री में "बेटी बचाओ" के पीछे की कहानी बड़ी रोचक है। इसकी शुरुआत तत्कालीन सरपंच श्यामसुन्दर पालीवाल ने अपनी बेटी की याद में की। वह बताते हैं कि उनकी दो बेटियों में एक की मौत हो गई। बेटी का उन्हें गहरा आघात लगा। फिर उन्होंने तय किया कि क्यों न जिस तरह से वह बेटी को पालते हैं उसी तरह से पौधे लगाये और उसका पालन पोषण करें। पहले साल उन्होंने अकेले 111 पौधे लगाये। आज वह सभी पेड़ बन चुके है। इसके बाद तय किया गया ग्राम पंचायत में जिसके भी बेटी पैदा होगी वह पेड़ लगाएगा। अपने घर के पास लगे पेड़ को दिखाते हुए कहती हैं कि देखो, "उस नीम के पेड़ को डलिया इस कदर सिर हिला रही हैं, जैसी उनकी बेटी खिलखिला रही है।" 
आपकी खबर के फेसबुक साइट से मिली खबर के मुताबिक "तू ही रे" शो की प्रतियोगी और कवयित्री 
करियर दो,दहेज़ नही माँ.....जन्म दो,मारो नही माँ..
आपकी खबर के संपादक सागर शर्मा ने कुछ इस तरह 'बेटी की पुकार' "तू ही रे" कार्यकर्म को अपने शब्दों में लिखा था।
माँ बेटी को समर्पित स्टेज शो "तू ही रे " का धमाकेदार समापन ।