Oct 22, 2010

=> Birthday

Oct 21, 2010

=> कामवासना का विरोध क्यों?

                                    यह जीवन के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है, क्योंकि यह मूल जीवन-ऊर्जा से संबंधित है। कामवासना...यह शब्द ही अत्यंत निंदित हो गया है। क्योंकि समस्त धर्म उन सब चीजों के दुश्मन हैं, जिनसे मनुष्य आनंदित हो सकता है, इसलिए काम इतना निंदित किया गया है। उनका न्यस्त स्वार्थ इसमें था कि लोग दुखी रहें, उन्हें किसी तरह की शांति, थोड़ी सी भी सांत्वना, और इस रूखे-सूखे मरुस्थल में क्षण भर को भी मरूद्यान की हरियाली पाने की संभावना शेष न रहे। धर्मों के लिए यह परम आवश्यक था कि मनुष्य के सुखी होने की पूरी संभावना नष्ट कर दी जाए।

                                      यह उनके लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों था? यह महत्वपूर्ण था क्योंकि वे तुम्हें, तुम्हारे मन को किसी और दिशा में मोड़ना चाहते थे-परलोक की ओर। यदि तुम सच में ही यहां आनंदित हो-इसी लोक में, तो भला तुम क्यों किसी परलोक की चिंता करोगे? परलोक के अस्तित्व के लिए तुम्हारा दुखी होना अत्यंत आवश्यक है। उसका स्वयं अपने आप में कोई अस्तित्व नहीं है, उसका अस्तित्व है तुम्हारे दुख में, तुम्हारी पीड़ा में, तुम्हारे विषाद में।

                                        दुनिया के सारे धर्म तुम्हारे अहित करते रहे हैं। वे ईश्वर के नाम पर, सुंदर और अच्छे शब्दों की आड़ में तुममें और अधिक पीड़ा और अधिक संताप, और अधिक घृणा, और अधिक क"ोध, और अधिक घाव पैदा करते रहे हैं। वे प्रेम की बातचीत करते हैं, मगर तुम्हारे प्रेमपूर्ण हो सकने की सारी संभावनाओं को मिटा देते हैं।

                                           मैं काम का शत्रु नहीं हूं। मेरी दृष्टि में काम उतना ही पवित्र है, जितना जीवन में शेष सब पवित्र है। असल में न कुछ पवित्र है, न कुछ अपवित्र है; जीवन एक है-सब विभाजन झूठे हैं, और काम जीवन का केंद्र बिंदु है।

                                           इसलिए तुम्हें समझना पड़ेगा कि सदियों-सदियों से क्या होता आ रहा है। जैसे ही तुम काम को दबाते हो, तुम्हारी ऊर्जा स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए नये-नये मार्ग खोजना प्रारंभ कर देती है। ऊर्जा स्थिर नहीं रह सकती। जीवन के आधारभूत नियमों में से एक है कि ऊर्जा सदैव गत्यात्मक होती है, गतिशीलता का नाम ही ऊर्जा है। वह रुक नहीं सकती, ठहर नहीं सकती। यदि उसके साथ जबरदस्ती की गई, एक द्वार बंद किया गया, तो वह दूसरे द्वारों को खोल लेगी, लेकिन उसे बांधकर नहीं रखा जा सकता। यदि ऊर्जा का स्वाभाविक प्रवाह अवरुद्ध किया गया, तो वह किसी अप्राकृतिक मार्ग से बहने लगेगी। यही कारण है कि जिन समाजों ने काम का दमन किया, वे अधिक संपन्न और समृद्ध हो गए। जब तुम काम का दमन करते हो, तो तुम्हें अपने प्रेम-पात्र को बदलना होगा। अब स्त्री से प्रेम करना तो खतरनाक है, वह तो नरक का द्वार है। चूंकि सारे शास्त्र पुरुषों ने लिखे हैं, इसलिए सिर्फ स्त्री ही नरक का मार्ग है। पुरुषों के बारे में क्या खयाल है?

                                           मैं हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों से कहता रहा हूं कि अगर स्त्री नरक का मार्ग है, तब तो फिर केवल पुरुष ही नरक जा सकते हैं, स्त्री तो जा ही नहीं सकती। मार्ग तो सदा अपनी जगह रहता है, वह तो कहीं आवागमन नहीं करता। लोग ही उस पर आवागमन करते हैं। यूं कहने को तो हम कहते हैं कि यह रास्ता फलां जगह जाता है, लेकिन इसमें भाषा की भूल है। रास्ता तो कहीं आता-जाता नहीं, अपनी जगह आराम से पड़ा रहता है, लोग ही उस पर आते-जाते हैं। यदि स्त्रियां नरक का मार्ग हैं, तब तो निश्चित ही नरक में केवल पुरुष ही पुरुष भरे होंगे। नरक “सिर्फ पुरुषों का क्लब” होगा।

                                               स्त्री नरक का मार्ग नहीं है। लेकिन एक बार तुम्हारे दिमाग में यह गलत संस्कार बैठ जाए, तो तुम किसी और वस्तु में स्त्री को प्रक्षेपित करने लगोगे; फिर तुम्हें कोई और प्रेम-पात्र चाहिए। धन तुम्हारा प्रेम-पात्र बन सकता है। लोग पागलों की तरह धन-दौलत से चिपके हैं, जोरों से पकड़े हैं, क्यों? इतना लोभ और लालच क्यों है? क्योंकि दौलत ही उनकी प्रेमिका बन गई। उन्होंने अपनी सारी जीवन ऊर्जा धन की ओर मोड़ ली।

                                                अब यदि कोई उनसे धन त्यागने को कहे, तो वे बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे। फिर राजनीति से उनका प्रेम-संबंध जुड़ जाएगा। राजनीति में सीढ़ी दर सीढ़ी ऊपर चढ़ते जाना ही उनका एकमात्र लक्ष्य हो जाएगा। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद की ओर, राजनीतिज्ञ ठीक उसी लालसा से देखता है, जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका की ओर देखता है। यह विकृति है।

                                               कोई व्यक्ति किन्हीं और दिशाओं में जा सकता है, जैसे शिक्षा; तब पुस्तकें उसकी प्रेम की वस्तुएं हो जाती हैं। कोई आदमी धार्मिक बन सकता है, तब परमात्मा उसका प्रेम-पात्र बन जाता है...तुम अपने प्रेम को किसी भी काल्पनिक चीज पर प्रक्षेपित कर सकते हो, लेकिन स्मरण रहे, उससे तुम्हें परितृप्ति नहीं मिल सकती।


ओशो
फ्रॉम डार्कनेस टु लाइट

Oct 19, 2010

=> संक्रमण की रोकथाम और उपचार



सर्दियों के दिनों में बहुत से लोग जुकाम का शिकार होते हैं। जुकाम लगने पर लोगों को सिरदर्द, ज्वर, खांसी और नाक बंद होने की शिकायत होती है और वे आम जीवन और काम में कठिनाई महसूस करते हैं।
अनेक लोग जुकाम को मामूली बीमारी समझते हैं। वे अस्पताल जाने के बजाय इसके इलाज के लिए स्वयं औषधि की किसी दुकान से दवा खरीदते हैं। लेकिन इन दुकानों पर जुकाम की अलग-अलग दवाएं बिकती हैं और गलत दवा खाने से बीमारी दूर नहीं होती, बल्कि स्वास्थ्य को क्षति पहुंचती है। इसलिए जुकाम के उपचार में दवाओं का वैज्ञानिक प्रयोग ही किया जाना चाहिये।
यहां हम आम जुकाम की चर्चा कर रहे हैं, फ्लू की नहीं। आम जुकाम में विषाणु की वजह से श्वास नली सूज जाती है। कई लोग साल में कई बार जुकाम के शिकार होते हैं। लेकिन इससे यह भी नहीं कहा जा सकता कि जुकाम कोई हल्की बीमारी नहीं है। पेइचिंग के तुंगरेन अस्पताल के डाक्टर चेन के अनुसार जुकाम का समय पर इलाज न किये जाने से शरीर के दूसरे भागों पर भी कुप्रभाव पड़ सकता है। जुकाम से प्रभावित होने वाली श्वासनली शरीर का ऊपरी भाग है, पर इससे कान, फेफड़े, दिल, यहां तक कि गुर्दे भी प्रभावित हो सकते हैं।
जुकाम की दवा का कोई साधारण नुस्खा नहीं होता, इससे लोग दवा की दुकानों से खुद दवा खरीद सकते हैं। लेकिन जुकाम की दवा चुनना कोई सरल बात नहीं है। पेइचिंग की दवा की एक दुकान की बिक्रेता सुश्री वांग के अनुसार आम तौर पर लोग जुकाम की दवा के कारगर होने तथा उस के पश्चप्रभाव पर ध्यान देते हैं। वे मशहूर कंपनियों द्वारा उत्पादित दवा खरीदना पसंद करते हैं, जबकि इन कंपनियों की दवाएं विज्ञापनों के कारण मशहूर रहती हैं। वास्तव में महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग अपनी विशेष स्थिति के अनुसार उचित दवा चुनें। आजकल दुकानों में जुकाम की जो दवाएं हैं उनमें आम तौर पर ज्वररोधी दवाएं, खून की नलियों को सिकोड़ने वाली दवाएं तथा अतिसंवेदनशीलता रोधी दवाएं शामिल हैं, जिनसे खांसी और बंद नाक की शिकायत दूर की जा सकती है। लेकिन जुकाम की दवाओं के अक्सर पश्चप्रभाव होते हैं। मिसाल के लिए ज्वर को दूर करने वाली जुकाम की दवा खाने से आम तौर पर जिगर और गुर्दे को क्षति पहुंचती है , दिल के रोगियों को खून की नलियों को सिकोड़ने वाली दवा नहीं खानी चाहिये और अतिसंवेदनशीलता रोधी दवा खाने से लोगों को नींद आ सकती है, इसलिए ऐसी दवा दिन में काम के समय नहीं खानी चाहिये।
बहुत से रोगी जुकाम लगने पर रोगाणुरोधी दवा खाते हैं, पर वास्तव में यह ठीक नहीं है. क्योंकि जुकाम के विषाणुओं का कारगर मुकाबला करने वाली रोगाणु रोधी दवा अभी नहीं बनाई जा सकी है। आम रोगाणुरोधी दवा जुकाम को दूर करने में अर्थहीन रहती है और गलत दवा खाने से शरीर को क्षति भी पहुंचती है। इसलिए जुकाम के साथ निमोनिया न होने पर रोगाणु रोधी दवा खाने की जरूरत नहीं है।
चीन की परंपरागत चिकित्सा पद्धति जुकाम के उपचार में बहुत कारगर साबित हुई है। परंपरागत चीनी चिकित्सा पद्धति के अनुसार जुकाम के रोगियों का रोग बलगम आने और नाक बंद होने की शिकायत के आधार पर तय किया जा सकता है। इस तरह तय रोग के मुकाबले के लिए तय दवा का प्रयोग किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि जुकाम के रोगियों को इलाज के लिए सबसे पहले अपने रोग की किस्म जाननी चाहिये। इससे पहले बेवजह दवा खाना ठीक नहीं है। पर अगर रोगी के शरीर का तापमान 38 डिग्री से अधिक हुआ, तो उसे जल्द से जल्द अस्पताल में भरती हो जाना चाहिये।
चीन टी बी से गम्भीर ग्रस्त रहा है , हर वर्ष में एक लाख तीस हजार व्यक्तियों की मृत्यु इसी बीमारी से होती है । चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने हाल ही में प्रेस जगत के सम्मुख कहा कि वर्तमान चीन में टी बी की रोकथाम और उस के इलाज के सामने गम्भीर चुनौतियां मौजूद हैं , चीनी स्वास्थ्य विभाग जन समुदाय को टी बी की रोकथाम व उस के इलाज के बारे में जानकारी दिलाने , अपने आप की आत्मरक्षा करने की चेतना उन्नत करने और टी बी की नियंत्रित रणनीति को व्यवस्थित करने के लिये सिलसिलेवार कदम उठायेंगे ।
टी बी सांस नली का संक्रामक रोग है और वह मुख्यतः फेफड़े में पैदा होता है । समूचे विश्व में टी बी इतने व्यापक तौर पर फैल गया है कि अब वह एक गम्भीर सार्वजनिक स्वास्थ्य सवाल और सामाजित सवाल का रूप ले चुका है । चीन विश्व में टी बी से गम्भीर ग्रस्त होने वाले देशों में से एक है , हर वर्ष में दस लाख लोग टी बी से पीड़ित हैं , यह संख्या भारत के बाद विश्व में दूसरे नम्बर पर आती है ।
ऐसी टी बी के फैलाव को काबू में पाने के लिये चीन सरकार ने लगातार अधिक धन राशि का अनुदान दिया है । गत वर्ष में चीनी केंद्रीय वित्त ने टी बी के इलाज व उस की रोकथाम में कुल 40 करोड़ चीनी य्वान का खर्चा किया है , जो इस के पूर्व वर्ष से तीस प्रतिशत से अधिक है । चीन सरकार ने टी बी की रोकथाम व उस के इलाज की योजना बनायी , साथ ही टी बी से ग्रस्त रोगियों को मुफ्त में देवाएं बांटी हैं और टी बी की रोकथाम व उस के इलाज से जुड़े मामलों के ठोस प्रबंधन के लिये इस रोग के फैलाव से संबंधित सूचना वैब भी स्थापित की है । चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के रोग की रोकथाम व निरोध ब्यूरो के उप प्रधान श्री श्याओ तुंग लाओ ने इस का परिचय देते हुए कहा चीन ने राष्ट्र , प्रांत , प्रिफेक्चर , कांऊटी , टाऊशिप और गांव स्तरीय बहुदेशीय टी बी रोग निरोध सेवा प्रणाली संपूर्ण बना ली है । इधर पांच सालों में कुल 20 लाख 50 हजार टी बी ग्रस्त रोगियों का पता लगाया गया है और उन का इलाज भी किया गया है , जिस से करोड़ों स्वस्थ व्यक्ति टी बी बीमारी लगने से बच गये हैं और हर वर्ष में लगभग 8 अरब य्वान की आर्थिक क्षति भी बचायी गयी है ।
श्री श्याओ तुंग लाओ ने कहा कि चीन ने हालांकि टी बी की रोकथाम व इलाज में कुछ उपलब्धियां हासिल की हैं , पर निम्न गम्भीर चुनौतियां फिर भी सामने खड़ी हुई हैं कि इस बीमारी की रोकथाम व निरोध में संबंधित धन राशि की कमी रही है , बुनियादी टी बी निरोधक संस्थाओं व व्यवसायिक व्यक्तियों की कार्यक्षमता उन्नत करने की जरूरत है और टी बी व एड्ज से साथ साथ ग्रस्त रोगी भी सामने आयेहैं , जिस से टी बी की रोकथाम व इलाज को और कठीन बनाया गया है ।
उपरोक्त समस्याओं को ध्यान में रखकर चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय सकारात्मक कदम उठाने में लगा हुआ है । मसलन चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय चालू व अगले वर्ष में टी बी की दवाओं के बेअसर होने के बारे में राष्ट्रीय सर्वक्षण अभियान चलायेगा , ताकि टी बी निरोध रणनीति को सुव्यवस्थित बनाने के लिये आधार तैयार किया जा सके ।
यह सर्वेक्षण अभियान समूचे चीन के 31 प्रांतों , स्वायत्त प्रदेशों व केंद्र शासित शहरों में किया जायेगा , स्वास्थ्य मंत्रालय इस अभियान में एक करोड़ 70 लाख से अधिक य्वान का विशेष अनुदान भी देगा । वर्तमान में विभिन्न सर्वेक्षण केंद्रों का तैयारी काम मूलतः पूरा हो गया है , आगामी एक अप्रैल को समूचे चीन में इस सर्वेक्षण अभियान शुरू होने की योजना है । स्वस्थ्य मंत्रालय इस सर्वेक्षण अभियान का फायदा उठाकर समुचे देश में क्रमशः टी बी पर निष्प्रभावकारी दवाओं का निरीक्षण कर देगा ।
इस के अलावा चीन देश भर में टी बी की रोकथाम व उस के इलाज के बारे में जानकारियों का सर्वेक्षण भी करेगा , संबंधित विभाग फिर सर्वेक्षण परिणाम के अनुसार व्यवहारिक कदम उठाएंगे , ताकि स्वस्थ्य शिक्षा और स्वस्थ्य संवर्द्धन रणनीति को व्यवस्थित किया जा सके ।

Oct 5, 2010

=> Eco-Friendly City

                                         अपने शहर को Eco -frendly बनाने के लिए हमें अपने कुछ बुनियादी जरूरतों पे ध्यान देना होगा...जैसे सड़क, परिवहन,स्वास्थ्य सुबिधांये,बिजली,पानी व रहने सम्बन्धी आवश्यकताओं पे नजर डालना ही होगा.......
                                                  
1 -Polethene का बहिस्कार किया जाए -  polethene ऐसे chemicals से मिलकर prepaire  जाती है जो हजारो-लाखो साल में भी नहीं गलते अतः polethene का प्रयोग न कर के हमे bag व कागज के थैलों का उपयोग करना चाहिए.

2-Prevent Polution- हमें अनावश्यक रूप से होने वाली प्रदुषण को रोकना चाहिए.मनोरंजन के लिए  indoor ब्यवस्था रखनी चाहिए और music,video निर्धारित देसिब्ले में ही बजाना चाहिए. गाडियों में प्रेस्सर-

3-Pay the role of an Ideal Nationals- सडको पे पड़े ईट पत्थर को स्वयं ही हटाने की कोसिस करता हूँ और दूसरों को भी सलाह देता हूँ की ऐसा करने में शर्म न महसूस करें! कूड़ा उचित स्थान पर ही डालें. यदि कोई disable  ब्यक्ति रास्ता पर करना चाह रहा है तो खुद रूक कर उसे रास्ता क्रोस करने में मदद करें!

4-Be a part of Traffic Police- यदि रोड पर जाम लगा है तो खुद ही व्यवस्था संभालनी चाहिए यदि ऐसा संभव न हो तो Traffic पोलिसे को सूचित करना चाहिए.

5- traffic rules Must be fallowed- रूल्स ऑफ़ द रोड को ध्यान में रख कर गाडी चलायें,तथा गाड़ियों को नियमित चेकिंग  करते रहे ताकि वो धुंवे के रूप में वायु प्रदुषण न करें, क्योंकि इनमे co2,co व अन्य बिशैली गैसें होती है जो वातावरण को प्रदूषित करती हैं.

6-Car Pooling- कर पूलिंग से समय पैसा व सामन तीनो की सुरक्षा होती है.petrole भी बचाता है अतः कार पूलिंग करें तो यह एक बेहतर बिकल्प होगा pollutiopn रोकने का!

7-Plantation- पोध रोपण City को Eco-Friendly बनाने में मदद करता है. अतः इस कार्य को एक अभियान के तहत किया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा हरियाली युक्त धरती का निर्माण किया जा सके.

8-water Harwesting-बरसात का पानी नदियों के रास्ते बहकर समुद्र में  ब्यर्थ न बह जाए इसके लिए हमें water harwesting plan अपनाने की जरूरत है.

9- Each one Teach one फार्मूला - city को शिक्षित बनाने के लिए each-one teach-one  के नीयम पर कार्य करें यानि के प्रत्येक ब्यक्ति अपने जिम्मेदारी पर एक गरीब बच्चे को पदाने ka जिम्मा ले तो सहर से अशिक्षा जल्द ही दूर हो जाएगी.

10-Select proper way to Oppose-  आजकल किसी भी दुर्घटना या घटना के होने पर आम पब्लिक रोड जाम तथा तोड़-फोड़ करती है और असभ्य ब्यवहार अपनाकर सरकारी संपत्ति को नुक्सान पहुचाते है जिससे वे खुद ही और परेशां हो जाते है बजाय के कोई हल पांए! एकजूट होकर सम्बंधित अधिकारी के सामने अपनी समस्या लेकर जांए और अपनी बात मजबूती से रक्खें तो जरूर ही कोई न कोई राह निकल आएगी.
        याद रहे उबलते जल में चेहरा देखना मुस्किल होता है जबकि शांत जल में आसन यानी गुस्से में हमें पता नहीं चलता और हम अपना ही नुक्सान कर बैठते हैं.

11-ज्यादा से ज्यादा शिक्षार्जन करें क्योंकि देश की सम्ब्रिद्धि इसके नागरिको के साक्षरता पर आधारित होती है. मीडिया के तमाम माध्यमो से जुड़कर हम दिन-प्रति-दिन होने वाले समाचारों से रूबरू रह सकते हैं.

12-  Social Interaction- समय-समय पर सामजिक समस्यानो व अब्यवास्थाओं को दूर करने के लिए एक बिचार मंच का आयोजन कर लोगो की राय समझें! ऐसा ब्यक्ति, संगठन व पार्टी जो समाजहित में कुछ अच्छा किया हो उसे प्रोत्साहित करें इससे ज्यादा से ज्यादा लोग अच्छे कार्य करने के लिए उत्साहित होंगे! और समाज को अच्छा सन्देश जाएगा!

13- एक भावी पत्रकार होने के नाते मैं अपने द्वारा प्रसारित लेख,समाचार में लोगों के हित व समझाने योग्य बातें ही प्रसारित करूंगा! यदि मैं TV Journalist  हुआ तो vulgarity &; adulthood programs को दूर करने या उनका समय नीयत करने के पक्ष में रहूँगा!यदि  Photo-Journalist  हुआ तो ऐसे फोटो या  footage दिखाने के पक्ष में रहूँगा जो असामाजिक तत्वों को सन्देश देने वाला हो; जैसा की आजकल मीडिया रोड जाम,तोड़फोड़ व पुलिस से हुई झड़प में ऐसी फोटो Publish करता है जो असामाजिक तत्वों को  Dominate करती हैं जिससे प्रशासन व पुलिस बौनी दिखाई पड़ती है ऐसा करने से गलत लोगो का हौसला और बढ़ जाता है अतः वे और घटिया करतूत करने को उतावले होते हैं! हमें प्रशासन व पुलिस की मजबूती लोगों को दिखाना होगा ताकि व्यवस्थाएं अपने रास्ते पर चल सकें!

14-आजकल लोग जागरूक हुए हैं मगर गलत धारणाएं अभी भी फल-फूल रही हैं लोग लड़के व लड़की को असमान नजरिये से देखते हैं जोकी बदलने की जरूरत है...सच तो यह है की लड़की लड़कों से कहीं आगे हैं!
एक बात याद रहे की पुरुष हमेश हर बात में गणित लगाता रहता है जबकि महिला हर बात को प्यार व भाईचारा के निगाह से देखती, घर चलाने के लिए प्यार की जरूरत होती है न की गणित की!

15- आज कल न्याय व्यवस्था को दोष दिया जाता है के यह सही नहीं है मगर इस स्थित के जिम्मेदार हम स्वयं हैं! हम ego  में आकर छोटी-छोटी बातों में झगडा कर लेते हैं और बात  न्यायलय तक पहुंचती है यही कारण है की छोटी अदालतों से लेकर बड़ी अदालतों तक मुकदमो की भरमार लगी पड़ी है! हमें आपसी मामलों को मिल बैठकर सुलझा लेना चाहिए ताकि अदालत का बोझ कम किया जा सके!
                           इसके अलावा अपने शहर को Eco-Friendly  बनाने के लिए खुद को सम्भालना पड़ेगा और सुधारना पड़ेगा इसके बाद ही दूसरों को सिखा व सन्देश देने की बारी आएगी! इसी के साथ आपको बहुत-बहुत नमस्कार जय-हिंद!