Jul 30, 2012

=> विज्ञान की 7 महान खोजें जिन्होंने बदल दी दुनिया...




                            दुनिया के कण-कण के पीछे मौजूद हिग्स बोसॉन या गॉड पार्टिकल की बुधवार को जिनेवा में पुष्टि हुई। इससे भौतिकी का वह ‘शून्य’ मिल गया, जिससे सृष्टि की गिनती पूरी होती है। आइये.. जानें विज्ञान की उन सात महान खोजों को जिन्होंने हमारी दुनिया बदल दी.. 

वैक्सीनेशन:

                             17वीं सदी में यूरोप में हर साल चेचक से चार लाख लोगों की मौत होती थी। ऐसे में 1796 में ब्रिटिश वैज्ञानिक एडवर्ड जेनर ने पहली बार वैक्सीनेशन शब्द का इस्तेमाल किया। इसमें बीमारी को दूर करने के लिए बीमारी का ही इस्तेमाल किया गया। वायरस को शरीर में इंजेक्ट किया। ताकि शरीर में उससे लड़ने की ताकत विकसित हो सके। 

आज इस्तेमाल : सैकड़ों बीमारियों से बचा रहा है वैक्सीन।

इलेक्ट्रॉन आया, जिससे बनी बिजली 

1838 में पता चला था कि सब-एटॉमिक पार्टिकल इलेक्ट्रॉन का अस्तित्व है। लेकिन उसे साबित करने में 60 साल लग गए थे। इसके बाद ही बिजली का अविष्कार हो सका। टीवी और सीडी की तकनीक से लेकर कैंसर रोगियों के लिए रेडियोथेरेपी भी इसी की बदौलत सामने आई। 

आज इस्तेमाल: बिजली के बिना आज जिंदगी की कल्पना ही नहीं की जा सकती। 

जीनोम सिक्वेंस मैपिंग
इंसानी शरीर के प्रत्येक जींस की मैपिंग की गई। 1990 में इंटरनेशनल ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट शुरू हुआ। अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और चीन के वैज्ञानिक शामिल हुए। 2003 में जीनोम मैपिंग पूरी हो गई। 2009 में भारतीय वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार जीनोम मैपिंग पूरी की। नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी ने दो साल की तैयारी के बाद 45 दिन में काम पूरा किया। 

आज इस्तेमाल: बीमारी की वजह, दवा का असर समझने में फायदेमंद। खास जीन से होने वाले नुकसान का पूर्व आकलन संभव।

पेनिसिलिन
स्कॉटिश वैज्ञानिक एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1921 में पहले एंटी-बायोटिक की खोज की। इंफ्लूएंजा वायरस पर शोध के दौरान पाया कि स्टेफीलोकोकस कल्चर प्लेट पर फंगस उगी हुई है। जांच में पता चला कि उसके आसपास का क्षेत्र बैक्टीरिया मुक्त है। 

आज इस्तेमाल: पेनिसिलिन कई मिश्रणों के साथ कई दवाओं में हैं। 

पहला सैटेलाइट
स्पूतनिक-1 पहला कृत्रिम उपग्रह था, जिसे रूस ने 4 अक्टूबर 1957 को लॉन्च किया। इससे स्पेस एज की शुरुआत हुई। अब इस दौड़ में अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के साथ ही भारत भी शामिल हैं। रूस के यूरी गगारिन 12 अप्रैल 1961 को वोस्तोक यान के जरिए अंतरिक्ष में पहुंचे तो अमेरिकी नागरिक नील आर्मस्ट्रांग ने 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा पर पहुंचने वाले पहले मानव बने। 

अब इस्तेमाल: मंगल ग्रह पर जाने की तैयारी। पृथ्वी के वातावरण से समानता रखने वाले ग्रहों को खोजा जा रह है। 

स्टेम सेल थैरेपी
शरीर की कोशिकाएं ही बना लेंगी नए अंग। आइसोलेटिंग एम्ब्रायोनिक स्टेम सेल्स ऑफ ह्यूमन्स एंड प्रीमेट्स पर अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स थॉमसन ने पेटेंट लिया है। अब तक आंख, दिल, मस्तिष्क सहित कई अंगों की कोशिकाएं बनाई जा चुकी है। इलाज फिलहाल महंगा, लेकिन भविष्य में तकनीक सस्ती होने की उम्मीद। 

अब इस्तेमाल: क्लोनिंग के जरिए संभावनाओं को टटोला जा रहा है। कैंसर सहित कई जाबीमारियों से इलाज में मदद ली जा रही है। स्टेम सेल थैरेपी चिकित्सा के क्षेत्र में खासी मददगार साबित हो रही है। 

परमाणु बम
परमाणु बम बना तो विनाश के लिए था, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल बेहतरी के लिए हो रहा है। 1940 में अमेरिका में यूरेनियम को रिफाइन कर एटम बम बनाने की तकनीक पर काम शुरू हुआ। इसे मैनहट्टन प्रोजेक्ट के रूप में जाना जाता है। 1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहरों-हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए। हजारों लोग मारे गए। करोड़ों अब भी प्रभावित हैं। 

अब इस्तेमाल : परमाणु ऊर्जा अस्तित्व में आई। परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के मजबूत विकल्प के रूप में सामने आया। 

Jul 29, 2012

=> "किस" से सेहत सुधारें

                               नज़रें मिलती हैं, दिल धड़कता है और प्यार हो जाता है। यूं तो प्रेमियों के पास अपने प्यार को जताने के कई तरीके हैं, लेकिन सबसे दिलकश है किस। एक-दूसरे को किस करने का अहसास प्रेमियों को जोड़े रखता है। प्यार जताने का ये सबसे पुराना अहसास है। 
 
                              बीते 6 जुलाई को वर्ल्ड किसिंग डे मनाया गया। ये इंगलैंड से शुरू हुआ और फिर सारी दुनिया ने इसे अपना लिया। लेकिन किसिंग की शुरूआत कहीं न कहीं भारत से जुड़ती है। इसका ज़िक्र 3500 साल पुराने वेदों में मिलता है।
 
                              किस अगर आपको सुकून देता है, आपको प्यार का अहसास कराता है तो इसके कुछ शारीरिक फायदे भी हैं जो आपको स्वस्थ रखते हैं। फोटोफीचर में एक नज़र किसिंग से आपकी सेहत पर होने वाले फ़ायदों पर। 
स्वस्थ और मज़बूत दांतों के लिए ज़रूरी है किस। किस करने के दरम्यान मुंह में स्लाइवा ज़्यादा बनता है। इस स्लाइवा से दांतो को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। किस करना कोई भारी कसरत तो नहीं कि इससे आप छरहरे हो जाएगें, लेकिन किस के दौरान एक मिनिट में आपकी 2 से 6 कैलोरी तक बर्न होती हैं। मानें या न मानें, ये एक छोटी-सी डाइट है। 

                                किसिंग को सिर्फ प्रेमियों और उनके सेक्सुअल प्लेज़र से ज़ोड़ कर नहीं देखा जा सकता। एक मां का अपने नवजात बच्चे को चूमना बच्चे को राहत देता है। एक जापानी शोध में पता चला है किसिंग से त्वचा संबधी एलर्जी में भी फायदा होता है। ये बात तो तय है कि दो लोगों के किस करने से उनके शरीर के बैक्टीरिया भी एक्सचेंज होते हैं। जब प्रेग्नेंट महिलाएं किसी को किस करती हैं तो उसके शरीर में किसी ख़तरनाक बैक्टीरिया के पहुंचने का खतरा होता है। लेकिन, रिर्सचरों ने माना हैं कि गर्भधारण करने के पहले किस से जो वायरस उनके शरीर में पहुंचते हैं, वे उनके शरीर को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करते हैं। इससे प्रेग्नेंसी के दौरान कोई बैक्टीरिया भ्रूण तक नहीं पहुंच पाता है। 

                                  आपके दिल को भी जवां रखती है किसिंग। किस करने से एड्रालाइन नाम का रसायन बनता है जो आपके दिल तक ख़ून पहुंचाता है। दिन में शारीरिक कसरत जैसे साइकिलिंग या एरोबिक्स के दौरान दिल पर पड़ने वाले प्रभाव एक किस के बराबर ही है। किसिंग से कम होता है स्ट्रेस। किसिंग एक स्ट्रेस बस्टर है। दिन में एक अच्छा किस आपके तनाव और निगेटिव एनर्जी को काफी हद तक कम करता है। दरअसल, किस करने से तनाव के लिए ज़िम्मेदार हार्मोन कोर्टिसोल के उत्सर्जन में कमी आती है, इससे आप अपने आपको तरो-ताज़ा महसूस करते हैं।

Jul 24, 2012

=> Khulasa News

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