May 29, 2014

=> हाँ मैं कश्मीर हूँ

रूपाश्री शर्मा, गुमला, झारखण्ड

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ना बुजुर्गों के ख्वाबों की ताबीर हूँ, ना मैं जन्नत सी अब कोई तस्वीर हूँ ,
जिसको मिलकर के सदियों से लूटा गया, मैं वो उजड़ी हुई एक जागीर हूँ ,
हाँ मैं कश्मीर हूँ ,……… हाँ मैं कश्मीर हूँ,.......... हाँ मैं कश्मीर हूँ..........

मेरे बच्चे बिलखते रहे भूख से, ये हुआ है खिलाफत की एक चूक से,
रोटियां मांगने पर मिली गोलियां, चुप कराया गया उनको बन्दूक से,
ना कहानी हूँ ना कोई किस्सा हूँ मैं, मेरे भारत तेरा इक हिस्सा हूँ मैं
जिसको बाट नहीं जा सका आज तक, ऐसी एक टीस हूँ ऐसी एक तीर हूँ
हाँ मैं कश्मीर हूँ ,……… हाँ मैं कश्मीर हूँ,..........हाँ मैं कश्मीर हूँ..........

यूँ मेरे हौसले आजमाए गये, मेरी सांसों पे पहरे बिठाये गए
पूरे भारत में कुछ भी कहीं भी हुआ, मेरे मासूम बच्चे उठाये गए
यूँ उजड़े मेरे सारे घर रौंदे गये, मेरे जज्बात बूटों से रौंदे गए,
जिसका हर लफ्ज आंसू से लिख्खा गया, खून में डूबी हुई ऐसी तहरीर हूँ
हाँ मैं कश्मीर हूँ ,……… हाँ मैं कश्मीर हूँ,.......... हाँ मैं कश्मीर हूँ..........

मैं सुबह हूँ मगर शाम बन जाउंगी, मैं बगावत की पैगाम बन जाऊंगी
गर सम्भाला गया ना मुझे प्यार से , एक दिन मै वियतनाम बन जाऊंगी
मुझको एक पल सकूँ है ना आराम है, मेरे सर पर बगावत का इल्जाम है
जो उठाई न जायेगी हर हाँथ से, ऐ हुकूमत मैं इक ऐसी शमसीर हूँ
हाँ मैं कश्मीर हूँ ,……… हाँ मैं कश्मीर हूँ,.......... हाँ मैं कश्मीर हूँ..........

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