May 23, 2015

=> हाईटेक इन्टरनेट से लुप्त होते डाकिया

डाकिया डाक लाया खुशी का पैगाम लाया बीते जमाने की बात होगई। जी हॉ कुछ सालो पहले डाकघर के पोस्टमेन कॉ लोगो का बेसब्री से इंतजार करना पडता था। वही डाकियो को सैकडो की संख्या मे पत्र बांटने पडते थे। लोग डाकघर का इस्तमाल पहले किसी त्यौहार राखी, भैयादूज, ईद आदि के मोके पर अपने परिवार वालो को पैसा भेजने के मनीआर्डर का इस्तमाल किया जाता था। लेकिन आज के हाईटेक युग के चलते डाकघर का इस्तेमाल केवल रजिस्ट्री भेजने या सरकारी पत्र भेजने तक ही सीमित होकर रह गया है। लोगो ने त्यौहारो पर पैसा भेजने के लिय सीबीएस ब्रांच का प्रयाग करना तो पत्र भेजने के लिये एसएमएस या ईमेल से काम चलाना षुरू कर देने से जहॉ लोगो की बात साथ साथ होजाती है। वही पैसा जमा करने के तुरंत बाद ही मिलने से लोगो को एक एक सप्ताह का लम्ंबा इंतजार नही करना पडता। कसबे व दैहात के डाकियो के हाथ मे पहले जहा सैकडो की सख्ंया मे पत्रो का जमवाडा रहता था वही अब पोस्टमेन को सिर्फ सरकारी पत्रही बांअने पडते है। लोगों का कहना है कि पहले के समय मे पोस्टमेन के इंतजार मे पहले डाकघर से पत्र लाने का मजा कुछ और ही था। घर पर पोस्टमैन के  इंतजार मे दरवाजे पर खडे रहना अच्छा लगता था।

No comments: