Sep 28, 2015

=> सूचना विभाग की मनमानी कर सकती है सरकार की किरकिरी


अव्यवस्था:
समाचारों में हो रही गलतियों की अधिकता
व्यक्ति विशेष पर केंद्रित हो रहा सूचना विभाग
मेरठ। सूचना विभाग की भ्रष्टाचारयुक्त परिवेश में अब सांस लेना भी मुस्किल हो गया है, अधिकारियों के रवैये से जहां पत्रकारों में नकारात्मक भावना जाग्रति हो रही है वहीं विभाग के बाबुओं की मनमानी से पत्रकारों में रोष व्याप्त हो रहा है। छोटे-छोटे कार्यों के लिये भी विभाग के कर्मचारी तकरीबन मुंहमागी रकम लेने से नहीं कतराते। असमर्थता जताने पर काम न होने देने का भी ठेका लेते हैं। यही नहीं प्रदेश सरकार के कार्यों को ठीक से प्रसारित न कर पाना भी सूचना विभाग की एक बड़ी कमी है। समाचारों में गलतियां होना तो आम बात हो गई है।2017 का विधानसभा चुनाव सर पर है लेकिन सरकार की आंख कान कहा जाने वाला सूचना विभाग लगातार निष्क्रिय होता लग रहा है। क्योंकि 23 सितंबर को बिहार पटना में सपा की हुई रैली की सूचना समय से प्रदेश/देश के मीडिया को प्राप्त नहीं हुई लोगों को जबकि अब तो सोशल मीडिया के चलते आधा घंटे में समाचार और सीएम साहब आपका संबोधन देश भर के अखबारों को मिल जाना चाहिए था। राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त एक नेताजी द्वारा वाट्सएप पर जो समाचार भेजा गया उसमें अनेकों गलतियां थी।

नवीन नहीं अतुल प्रधान है व्यापार संघ का अध्यक्ष

मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने की मांग को लेकर सीएम से मिले संयुक्त व्यापार के प्रतिनिधि मंडल की जो विज्ञप्ति सूचना जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी की गयी उसमें नवीन गुप्ता के स्थान पर सपा के नेता अतुल प्रधान को संयुक्त व्यापार संघ का अध्यक्ष दर्शा दिया गया और इससे भी बड़ी बात यह रही कि प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के समय वरिष्ठ राजनेता और कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चैधरी वहां मौजूद थे, लेकिन उनका नाम सूचना विभाग की विज्ञप्ति से गायब था। सीएम साहब आलसी हो रहे सूचना विभाग के अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गयी तो प्रदेश सरकार की छवि किसी भी समय इनके द्वारा जारी विज्ञप्तियों के कारण काफी खराब हो सकती है।
समाचार के लिये पत्रकार रवि कुमार विश्नोई को विशेष आभार 

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