Jan 12, 2016

=> सड़कें क्यों हो गईं हत्यारी

संतराम पाण्डे
भा  रत में हर एक मिनट में एक सडक हादसा होता है और हर साल पांच लाख सडक दुर्घटनायें होती हैं, जिनमें हर साल लगभग 60 करोड रूपये का नुकसान होता है, जो जीडीपी का 3 फीसद है। इन दु्घटनाओं में तीन लाख लोग स्थायी रूप से अपंग होते हैं। इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा और दुखद पहलू यह है कि सडक हादसों में हर साल 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इन आंकडों¸ की जानकारी दी है मेरठ के सीनियर अधिवक्ता मुनेश त्यागी ने। उनका कहना है कि दुर्घटनाओं का सबसे प्रमुख कारण सड़कों की दुर्दशा है।
        केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कहते हैं- केंद्र की राजग सरकार ने इस आंकड़े पर चिंता जताई है जिसमें हर साल सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और उसकी वजह से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में 1.38 लाख लोगों की मौत हो जाती है, जिसकी कुल लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपए बैठती है। सड़क दुर्घटनाओं के चलते होने वाली 63 फीसदी मौतें राष्ट्रीय और राजमार्गों पर होती हैं। मंत्रालय के अनुसार पुराने कानून में कारगर सड़क इंजीनियरिंग के अभाव में दोषपूर्ण डीपीआर तैयार की गईं, जिसके कारण सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि सड़क सुरक्षा के अलावा शहरी क्षेत्रों में जिस सबसे बड़ी समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है, वह है वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी। इस वजह से जहां एक ओर सड़कों पर अक्सर जाम लग जाता है, वहीं दूसरी ओर सड़क यातायात के नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
        दुर्घटनाओं पर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं। पिछले साल सड़क हादसों में हर घंटे 16 लोग मारे गए। दिल्ली रोड पर होने वाली मौतों के मामले में सबसे आगे रही और उत्तर प्रदेश सबसे घातक प्रांत रहा। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो ने दुर्घटनाओं पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में 2014 में साढ़े चार लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 1 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। पिछले दस साल की अवधि में सड़क हादसों में होने वाली मौतों में साढ़े 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में आबादी में सिर्फ साढ़े 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ज्यादातर मौतें टू-व्हीलर की दुर्घटना में हुई हैं और तेज और लापरवाह ड्राइविंग उनका कारण रही है। ब्यूरो के अनुसार साढ़े चार लाख सड़क दुर्घटनाओं में 1 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए, इनमें से एक तिहाई की मौत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हुई लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश का रहा।
        सड़कों की खराब हालत काफी हद तक दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। सडकों पर दो वाहन को बचाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है ऐसे में वाहन को बचाने में वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। यदि चालकों की लापरवाही और सडकों की हालात को सुधार किया जाये तो सङक दुर्घटनाओं की संख्या में निश्चित रूप से कमी लाई जा सकती है। वैसे तो दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह है, हयूमन एरर या इंसान कीे जल्दबाजी या मशीनरी जिसको वह चला रहा है। किसी भी प्रकार की लापरवाही को कम करने के लिए ड्राइवर को चाहिए कि वह गाड़ी चलाते समय अपनी आंखों और तकनीक जो उसकी हेल्प कर रही है उस पर ध्यान दे, तभी दुर्घटनाओं में कमी आ पायेगी।
        जैसे-जैसे आबादी और वाहन बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे सड़क दुर्घटनाओं में भी तेजी से बढोतरी हो रही है। सडकों पर बढ़ी भीड़ ने वाहन चालकों की मुश्किलों को बढा दिया है। वाहन चलाते समय कुछ सावधानियां बरती जायें तो दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। वाहन चलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, जैसे- वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें न करें, वाहन चलाते समय नशीली चीजों का इस्तेमाल न करें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें, ओवर लोडिंग और गलत ओवरटेकिंग से बचें, गतिसीमा निर्धारित ही रहे आदि।

हाल ही में वेस्ट यूपी में हुई प्रमुख सड़क दुर्घटनाएंः- 

11 जनवरी को गाजियाबाद जनपद में थाना मसूरी अंतर्गत दिल्ली की ओर जा रही तेज रफतार स्कार्पियो बेकाबू होकर बाइकों से भिड़ गई। इसमें सात लाग मारे गए। इसके पहले आगरा नोएडा मार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में दो दिन पहले ही 5 लोग मारे गए थे।
बहसूमा छोटा मवाना बाईपास मार्ग पर बाइक सवार युवक को बिजनौर से मेरठ जा रही एम्बुलेंस के चालक ने टक्कर मार दी। टक्कर में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका 11 वर्षीय गंभीर रूप से घायल हो गया। एम्बुलेंस लेकर चालक मौके से फरार हो गया।
नवंबर 2015 में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी दुर्गा चरण मिश्रा की पुत्री मुजफ्फरनगर में एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गई। आगरा में आइजी के पद पर तैनात दुर्गा चरण मिश्रा की पुत्री सौम्या तथा उनकी गाड़ी का चालक घायल हो गया। उनकी इनोवा को एक अन्य इनोवा ने टक्कर मार दी थी। सौम्या मेरठ के सुभारती कॉलेज में पढ़ती है। वह इनोवा कार से सुबह देहरादून जा रही थी। नेशनल हाई वे 58 पर मंसूरपुर थाना के सिंघावली गांव के पास उनकी इनोवा से दूसरी की आमने-सामने की टक्कर हो गई। 
अगस्त 2015 को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी एक दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनकी कार रोड़ डिवाईडर से टकराकर पलट गई। वे मेरठ में ही सफर कर रहे थे। हादसे में वाजपेयी घायल हो गए थे। वाजपेयी को अस्पताल में उपचार दिया गया।

सड़क सुरक्षा पखवाड़े की प्रासंगिकताः

सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए जाने वाले अभियान में तरह-तरह की घोषणाएं की जाती हैं लेकिन उन बुनियादी तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता जो हादसों का सबब बनते हैं। सड़कों पर अतिक्रमण, बेकाबू रफतार आदि। पुलिस देखती है लेकिन टोकती नहीं। चालकों के हौसले बढ़ते हैं जो खुद उनके लिए ही भारी पड़ते हैं। सड़क सुरक्षा अभियान में इन बातों पर भी गौर किया जाना चाहिए। वेस्ट यूपी की बात करें तो मेरठ या अन्य जनपदों में कचहरी के आसपास जाकर देखिए। सड़कें घिरी होती हैं लेकिन कोई नहीं टोकता।
-लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं 

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