Jan 29, 2010

=> स्वस्थ के प्रति सचेत रहे.....


Jan 20, 2010

=> हींग का सेवन रखे कई रोगों से दूर

आमतौर पर घरों में मसाले के रूप में प्रयोग की जाने वाली हींग, कई मायनों में एक अच्छी औषधि भी है। हींग पेट, कब्ज, शुगर और दांतो के लिए अधिक फायदेमंद होती है।


हींग के औषधि गुण :-

बदहजमी- पके हुए केले में एक चुटकी हींग पाउडर डालकर खाने से बदहजमी जैसी समस्या से छुटकारा मिलता है।
डायबिटीज- करेले के रस में एक चौथाई चम्मच हींग पाउडर डालकर दिन में दो-तीन बार पीने से शरीर में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
पेट का दर्द- एक कप गर्म पानी में एक चम्मच हींग का पाउडर घोलें। इस घोल में सूती कपड़े को भिगोकर पेट के उस हिस्से की सिंकाई करें जहां दर्द हो रहा है। थोड़ी ही देर में दर्द से राहत मिलेगी।
किडनी संबंधी समस्या- किडनी से संबंघित समस्याओं में दो चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच हींग पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर इस घोल को नियमित पीएं। किडनी संबंधी समस्या में काफी लाभ मिलेगा।
दांतों में दर्द - दो चम्मच नींबू के रस में आधा चम्मच हींग पाउडर डालकर इस घोल को गुनगुना कर लें । इसे रूई में भिगोकर दांतों में लगाने से दर्द में आराम मिलेगा। नियमित इस उपचार को करने से दांत सफेद तथा मसूड़े स्वस्थ रहेंगे।

=> हरिद्वार में कुंभ मेले का आध्‍यात्मिक पक्ष

कुंभ मेला विश्‍व भर में धार्मिक उद्देश्‍यों से लगने वाला सबसे बड़ा मेला है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केवल हिंदू ही नहीं, अन्‍य धर्मों के अनुयायी भी इसकी प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन सच तो यह है कि कुंभ केवल एक साधारण धार्मिक मेला ही नहीं है। वास्‍तव में कुंभ का मेला अमृत का एक भंडार है। यह तभी लगता है जब अंतरिक्ष में कुछ खास ग्रह जैसे चंद्रमा, सूर्य और वृहस्‍पति एक खास अवस्‍था में होते हैं।

ये ग्रह एक खास दिशा में घूमते हैं, जिससे एक विशेष प्रकार की ऊर्जा निकलती है और यह ऊर्जा एक खास समय पर खास स्‍थानों पर पहुंचती है। इस ऊर्जा का संचार हर 12 साल में तय स्‍थान पर होता है, जिसमें हरिद्वार, उज्‍जैन, इलाहाबाद और नासिक शामिल हैं। यह अंतरिक्षीय ऊर्जा एक साथ 45 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में प्रवाहित होती है।



साल 2010 में कुंभ का मेला हरिद्वार में लग रहा है। पानी ऊर्जा के संचार का सबसे तेज माध्‍यम है, इसलिए कुंभ के मेले में स्‍नान का विशेष महत्‍व है। ऊर्जा का यह अमृत 45 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में आने वाले सभी झील, तालाब और नदियों में प्रवाहित होता है।

कुंभ के दौरान बह्मकुंड का पानी भी ऊर्जा से भरा होता है। हरिद्वार में दो ब्रम्‍हकुंड हैं। नीलधारा हरिद्वार का सबसे पुराना बह्मकुंड है, जबकि हर की पौड़ी नया लेकिन सबसे लो‍कप्रिय बह्मकुंड है। ऊर्जा का यह अमृत इन स्‍थानों पर लगातार प्रवाहित होता रहता है। यह खुद आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे ग्रहण करते हैं। प्रकृति या भगवान के इस अद्भुत देन को ग्रहण करने की क्षमता यहां काफी मायने रखती है।

आम लोगों में यह धारणा प्रचलित है कि हर की पौड़ी भगवान तक पहुंचने का एक दरवाजा है। गंगा नदी में स्‍नान करने वाला हर श्रद्धालु इसी विश्‍वास के साथ कुंभ के दौरान हरिद्वार पहुंचता है।
नीलधारा के बारे में प्रचलित विश्‍वास यही है कि भगवान विष्‍णु ने यहीं पर देवताओं के बीच 'विश्‍वमोहिनी' अमृत का वितरण किया था।

हर की पौड़ी हालांकि बाद में निर्मित हुआ है, लेकिन यहां सत, रज और तम अर्थात बह्मा, विष्‍णु एवं महेश, तीनों की शक्तियां एक साथ मिलती हैं। इसका असर हमारे शरीर, मस्तिष्‍क एवं हमारी आत्‍मा पर पड़ता है। यदि हम इस दौरान पानी में योग एवं साधना करें, तो हमारी आत्‍मा में ये तीनों शक्तियां एक साथ प्रवाहित हो सकती हैं।


लाखों-करोड़ों लोग इस कुंभ के दौरान स्‍नान के लिए यहां जमा हो रहे हैं। हरिद्वार तपस्‍या की भूमि है। कुंभ के दौरान यहां आकर, हर की पौड़ी में स्‍नान कर आप भी अपनी आत्‍मा में अद्भुत शक्तियों का संचार करने में सफल हो सकते हैं।

Jan 10, 2010

=> पंकज उदास

पंकज उदास एक ऐसे गजल गायक, जिनकी गजलें हमेशा से महफिलों की शान बनती रही हैं, फिर चाहे वह नशे में माफी मांगते किसी युवा की दरख्वास्त हो या फिर बेवतनों को अपनी मिट्टी की याद दिलाती चिट्ठी।
आइये जानते हैं इस प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक के बारे में......


     राजकोट के नजदीक "चरकरी" नाम की जागीर उदास परिवार की थी। उदास परिवार में मेरे दादा जी डोसा भाई ऐसे पहले व्यक्ति थे, जो स्कूल गए। हमारे गांव के पास ही गोंडल स्टेट था दादा जी वहां पढ़ने जाते थे। गोंडल महाराजा की शिक्षा में विशेष रुचि थी। उन्होंने पूना स्थित प्रसिद्ध फ‌र्ग्यूसन कॉलेज को एक बड़ी रकम डोनेशन के रूप में इस शर्त के साथ दी थी कि कॉलेज की चार सीटें गोंडल स्टेट के लिए रिजर्व रहेंगी। मेरे दादा जी गोंडल महाराज से मिले और फग्र्यूसन कालेज में पढ़ने की इच्छा जताई। 1902 में जब उन्होंने वहां से बीए पूरा किया तो सौराष्ट्र के वह पहले स्नातक थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे घर आए, तो उन्होंने जमींदारी से अनिच्छा जताते हुए नौकरी करने को प्राथमिकता दी। भावनगर के महाराजा कृष्ण कुमार सिंह ने उन्हें अपने स्टेट का कलेक्टर नियुक्त किया। दादा जी के साथ मेरे पिताजी का भी आना-जाना भावनगर पैलेस में होता था। महाराजा कृष्ण कुमार के दरबार में अब्दुल करीम खां साहब बीनकार थे। मेरे पिता उनसे बहुत प्रभावित हुए और खां साहब से दिलरुबा ( सारंगी जैसा वाद्य यंत्र) सीखने की इच्छा जताई। धीरे-धीरे मेरे पिता इस साज के साथ ही संगीत के अच्छे जानकार हो गए। परिवार में भी संगीत का माहौल बनने लगा। यही वजह रही कि मनहर, निर्मल और फिर मेरा जुड़ाव संगीत से हुआ। मेरे पिता जी ज्यादा सामाजिक नहीं थे। शाम को जब घर आते तो रियाज में जुट जाते। ऐसे माहौल में हम लोग बड़े हुए तो संगीत से लगाव होना लाजिमी था।

=> मंगल मुरत मारुतिनंदन हे बजरंगबली

जै श्री हनुमान जै श्री हनुमान

मंगल मूरती मारुत नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन
पवनतनय संतन हितकारी, ह्रदय विराजत अवध बिहारी
जै जै जै बजरंगबली ...३
महावीर हनुमान गौसाई,
महावीर हनुमान गौसाई,
तुम्हरी याद भली ......

जै जै जै बजरंगबली .....२

साधु संत के हनुमत प्यारे, भक्त ह्रदय श्री राम दुलारे .....२
राम रसायन पास तुम्हारे, सदा रहो तुम राम द्वारे,
कृपा से हनुमत वीरा .....२
सगली विपत्त टली .......
जै जै जै बजरंगबली .....२

महावीर हनुमान गौसाई....
तुम्हरी याद भली .......

जै जै जै बजरंगबली ...२

जय जय श्री हनुमान २...

जै जै जै बजरंगबली. ..
तुम्हरी शरण महा सुखदाई, जय जय हनुमान गौसाई ...२
तुम्हरी महिमा तुलसी गाई, जगजननी सीता महा माई,
शिव शक्ती की तुम्हरे ह्रदय, ज्योत महान जली ...
जै जै जै बजरंगबली ...२
महावीर हनुमान गौसाई....२
तुम्हरी याद भली.......
जै जै जै बजरंगबली....२

जय जय श्री हनुमान ......२
जै जै जै बजरंगबली. ....

Jan 7, 2010

=> पुलिस प्रशासन और न्याय की बिसंगति देती है भ्रस्टाचार का जन्म

                          आज जब प्रगतिशील भारत अपने बिभिन्न पहुलओं को मजबूत करने में जुटा है तो पूरे भारत में इसकी पहचान बन रही है, चाहे रूस के साथ परमाणु समझौता हो या कोपेनहेगन का जलवायु समझौता! मगर आबादी की नजर से दूसरा स्थान प्राप्त भारत आज अपनी पहचान बनाने के बावजूद गरीब व शक्तिहीन जान पड़ता है! यहाँ की बड़ी मछालियाँ,छोटी मछालियों को न तो बढ़ने देती है और न ही मरने ही देती है अपितु उनका खून चूस कर उन्हें तड़पता देख आनंद की अनुभूति करती हैं!
                 पृथ्वी पर उपस्थित हर आदमी शरीफ, इमानदार होता है, यहाँ की परिस्थितियां उसे चोर, निकम्मा व पथभ्रस्त बना देती हैं!यदि समय-परक उचित-न्याय की व्यवस्था ठीक तरह से काम करने लगे तो ज्यादातर आबादी गलत रास्ते पर जाने से रूक सकती है! सवाल यह है की आम आदमी हत्यारा कैसे बनता है?? तो सबसे पहले यही उत्तर आता है की न्याय नहीं मिला जिसके चलते वह ऐसा करने पर मजबूर हो गया!!!
                   आज अधिकतर लोग जुर्म सहने के बावजूद भी थान्हे पर रिपोर्ट लिखवाने से कतरातें है क्योंकि वो जानते हैं की समाज की बड़ी मछालियाँ न्याय नहीं होने देंगी! इन बड़ी मचलियों का बहुत बड़ा समूह है जो अबिरत एक दूसरे को सहायता पहुंचाते रहते है और गरीब माँ बहनों की इज्जत व मान सम्मान से खेल कर मुस्कुराते है!
आज न्याय ब्यवस्था और पुलिस प्रशासन व सरकार सभी पैसे पर बिक रहे है अंतर है तो इनके  रेट का और इशी रेट  की मार में आम आदमी पिस रहा है!

आज हर सख्श टेंशन में जी रहा है चाहे बच्चा हो, बुजुर्ग हो या युवा! जहाँ बच्चे पढाई के टेंशन में है वही युवा करियर व बुजुर्ग अपनी हालात के चलते टेंशन में है! टेंशन में होते हुए भी कोई दुनिया की दौड़  में पीछे नहीं होना चाहता! हर कोई अचानक और कम समय में दुनिया के नामचीन लोंगो में शुमार होना चाहता है! जब लोग इशी भागदौड़ में दूसरे से पीछे हो जाते हैं तो शार्टकट का सहारा लेते हैं और यही शार्टकट देता है भ्रस्टाचार रुपी राक्षश का जन्म! इसके लिए हम सभी को आगे आने की जरूरत है तभी यह कुछ कम हो सकता है!!वैसे ज्यादातर परिस्थितिओं में हम खुद ही अपनी समस्यानो के जन्मदाता है......कवि दिनकर की ये पंक्तिया हमें हमारी औकात बता देती है----
      रात यूँ  कहने लगा हमसे गगन का चाँद
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है
उलझने अपनी बनाकर आप ही फंसता
और फिर बेचैन हो जगता न सोता है......