'No candle looses its light while lighting up another candle'So Never stop to helping Peoples in your life.

test

Post Top Ad

https://2.bp.blogspot.com/-dN9Drvus_i0/XJXz9DsZ8dI/AAAAAAAAP3Q/UQ9BfKgC_FcbnNNrfWxVJ-D4HqHTHpUAgCLcBGAs/s1600/banner-twitter.jpg

Jul 29, 2011

=> सावन आया रे.......



Teej utsav manaati Bharatiya Naari
                          भारत में त्योंहारों की परम्परा बहुत अनोखी और मनोरंजक तरीके से आगे बढ़ती हुई संपूर्ण विश्व में अपनी पैठ मजबूत करती जा रही है! यहाँ मनाये जाने वाले पर्वों में सभी का महत्वपूर्ण स्थान हैं मगर सावन का मौसम आते ही भारतीय परंपरा अपना पंख फर्फराते हुए हरे-भरे सावन की फुहारों का आनंद लेनें लगते है ! जी हाँ, सावन का त्यौहार आता है रंगीन खुमार और खुशियों की सौगात लेकर और इसी माह में एक अत्यंत खुशनुमा त्यौहार आता है तीज का, जो होता है विवाहित जोड़ों के लिए और उन सखिओं के लिए जिन्हें अपने लिए वर की तलाश है, यह समय होता उन दम्पत्तियो के लिए जो एक-दूसरे के साथ फेरे लेकर जीवन के सुख-दुःख बाटने व साथ निभाने की कसमें  उठा चुके हैं!
                              "झूलों के त्यौहार" के नाम से जाना जाने वाला यह मौषम विवाहित जोड़ों के मन में कशमकश पैदा कर उन्हें मजबूर करती हैं अपने प्रिय के प्रति प्रेम जाहिर करने को ! इस मौसम में जहाँ गीत-संगीत एवं पारंपरिक कजरी व तीज सॉन्ग की मधुर आवाज व कोयल की कूकती गूँज कानो में मिठाश घोलती हैं वहीँ "आल्हा" की तर्ज हमारे रोंगटों को वीर रश से भर देता है और क़ातिल हवाओं की मंद-मंद मुस्कान हमारे रिश्तों एवं परम्पराओं के बीच सामंजश्य स्थापित कर दिलों को रिझाने की कोशिश करती हैं !
                              सावन के मौसम में झूला झूलने का अपना अलग ही मज़ा है, सभी सहेलियां सज-धज कर, हरे-भरे सावन की उमंग में सरावोर हो, पारंपरिक गीतों की तान छेड़ते हुए, झूलों पर सवार हो खुशियाँ मनाती हैं, मगर जिनके प्रियतम उनसे दूर हैं उनकी बिरह-बेदना मानो बढ़ सी जाती हैं और वो अपने साजन की याद में खो जाती हैं लेकिन ठीक उसी समय हवा का एक झोंका आता है और उनके दुपट्टे को धक्का देते हुए छेड़ता है तो वहीँ पर हलकी-हलकी बारिश की फुहार उस दर्द को कम करने की कोशिश करती हैं और अचानक सभी सखियाँ एक-दूसरे के हांथो पर लगे मेहंदी के रंग को देखकर उनके प्यार के नाप-तौल में लग जाती हैं इसी बीच कब शाम हो जाती हैं पता ही नहीं चलता ! 
                                पत्नियां इस दिन सोलह श्रृंगार कर के अपने हुश्न की नुमाइश में अपने दिल के टुकड़े यानी प्यारे साजन का इंतजार करती हैं और उनकी लम्बी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं ! 


    तीन तरह की होती है तीज-
पति-पत्नी के डोर के शुरूआती रिश्तों का त्यौहार तीज तीन तरह का होता है-


१- हरियाली तीज-
               इस तीज पर सभी विवाहित जोड़ों पर हरे रंग की      प्रधानता होती है, यह सावन माह के शुक्लपक्ष में मनाई जाती है जिसमे महिलायें चन्द्रमा की पूजा करती हैं !
२-कजरी तीज-   
               इस तीज का आनंद बादलों की काली घटा का आनंद उठाते हुए सावन महीने के कृष्ण पक्ष तृतीय के दिन मनाई जाती है, जिसमे महिलायें कजरी गीत गाती हैं एवं नीम वृक्ष की पूजा करतीं हैं !
३- हरतालिका तीज-
              यह तीज भादव प्रथम पक्ष तृतीय को मनाई जाती है, महिलायें निर्जला व्रत के साथ पति की लम्बी उम्र के लिए पार्वती माता की पूजा करती हैं !








3 comments:

smshindi By Sonu said...

बहुत ही सुन्दर,शानदार और उम्दा प्रस्तुती

smshindi By Sonu said...

मेरे इस ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है-

Trinath Mishra said...

thanks

Post Top Ad

Your Ad Spot

Pages