Feb 16, 2016

=> गोली मारकर लूटे 6.5 लाख

निजी स्कूल के सुपरवाइजर को मारी गोली, भर्ती
लालकुती थानाक्षेत्र में कमाण्ड हाउस के सामने हुई घटना
बैंक से कैश निकालकर स्कूल ले जा रहा था युवक

सियासत संवाददाता, मेरठ। 
लालकुर्ती थाना इलाके में एनसीसी के ऑफिस के पास और कमाण्ड हाउस के सामने दिनदहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने एक युवक को गोली मार दी और साढ़े छह लाख रूपये लूटकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही एसएसपी डीसी दूबे समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। घायल युवक उमेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उमेश आइपीएस स्कूल का सुपरवाइजर बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि युवक बैंक से कैश लेकर घर जा रहा था, तभी ये वारदात हुई। पुलिस अधिकारी मौके पर थे और बदमाशों की तलाश पुलिस टीमें गठित कर दी है। इस घटना के बाद पुलिस बदमाशों की तलाश कर रही है।

‘उमेश एक्सिस बैंक से पैसा निकालकर गढ़ रोड स्थित आईपीएस स्कूल ले जा रहा था, तभी ये वारदात हुई। घायल का इलाज अस्पताल में चल रहा है, उसे गोली कंधे को छूते हुए निकली है। बदमाशों का पता जल्द लगा लिया जायेगा।’ -एसएसपी दिनेश चन्द्र दूबे 


लापरवाही अधिकारियों को क्यों दी जाती है कमान?

बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हो गये हैं कि अब वे दिन दहाड़े वारदात को अंजाम देकर तमंचा लहराते हुये फरार हो जाते हैं और करोड़ों रूपये खर्च करने के बाद भी ‘हाईटेक-पुलिस’ की घेराबंदी में महज कुछ फैंटमकर्मी और एक-आध थाने की पुलिस ही हाथ लगती है। असली मुद्दा तो हाथ ही नहीं लगता और यही नहीं इस पूरे खेल में ‘बदमाशों और पुलिस की आपसी समझ’ की तरफ भी कभी-कभी गंभीर इशारा होता दिखाई पड़ता है। बहरहाल पूरे मेरठ में कमोवेश यही हाल है, हाइटेक नौचंदी थानाक्षेत्र में जब ‘झपट्टामार’ चेन या मोबाइल छीनकर भागने की फिराक में होते हैं तो सामने खड़े दरोगा जी मोबाइल पर बात करते नजर आते हैं। कई बार तो ‘प्रार्थनापत्र पर मोहर लगवाने के बदले राजनीतिक पहुंच’ बहुत जरूरी हो जाती है। लालकुर्ती थानाक्षेत्र में भी अब ऐसा ही कुछ है। दरअसल लालकुर्ती और नौचंदी थानाक्षेत्र में कुछ विशेष कनेक्शन है यानी लापरवाह अफसरों का जमावड़ा। कुछ साल पहले नौचंदी के ‘कड़क थानेदार’ को उनकी मगरूरी के चलते एसपी सिटी ओमप्रकाश ने लताड़ लगाई थी तो वहीं तत्कालीन आईजी आशुतोष पाण्डे ने लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया था।
          अब यही ‘दरोगा जी’ लालकुर्ती क्षेत्र की कमान को पकड़ चुके हैं। पिछले दिनों इनकी नाकामियों के चलते ही लालकुर्ती में संप्रदायिक तनाव हुआ था। और मामला दोनो संप्रदायों के बीच सुलगने लगा, जैसे-तैसे मामला शांत हुआ और अब क्षेत्र शोहदों, मनचलों और अपराधियों की धमक से कांप रहा है। सवाल यह है कि जनता की सुरक्षा में ऐसे लापरवाह पुलिसकर्मियों को थाने की कमान क्यों दी जाती है जो पूर्व में ही अपनी लापरवाही के कारण पुलिस की किरकिरी करा चुके हैं?

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