Dec 27, 2015

=> महिलाओं के लिए मिशाल बनती किरण जाटव

समय की चाल और कद्दावर नेताओं की रस्साकसी के बीच विरोधियों की विसात और थाप को पहचानकर अपने रास्ते को वक्त की नियति से पहले ही बदल लेने वाली वह महिला कोई साधारण नहीं है और न ही खद्दर-धारियों की तरह जाति मजहब और धर्म की सियासत करने वाली कोई आम नेता। बल्कि किरन आरसी जाटव वह महिला हैं जिन्हें अपने विश्वास और कर्तव्यपरायणता के बल पर आगे बढ़ने की हर चाल मालूम है। जिंदगी की कबाहतों और समाज की कलुषित विचारधाराओं से ऊबकर खुदको दलित, मजलूम और निरीह जीवों के लिये समर्पित करने वाली किरन जाटव अपने परिवार से बगावत कर समाज सेवा की डोर पकड़ चुकी हैं और जब भी समाज को शालीन नेता की जरूरत पड़ी है, किरन आरसी जाटव सदैव वहां खड़ी मिली हैं।

त्रिनाथ मिश्र मेरठ

आज पूरे देश को एक धागे में पिरोने की जरूरत आन पड़ी है इस बात की महत्ता को समझते हुये उत्तर प्रदेश सरकार में ‘एससी-एसटी आयोग की सदस्य’ किरन आरसी जाटव ने अपने जीवन को समाज एवं देश के लिये समर्पित कर दिया है, बकौल किरन अब वे समाज की उन बुलंदियों को छूने का ख़ाका तैयार कर रही हैं जिसके माध्यम से मेरठ ही नहीं अपितु पूरे देश की जनता को ग़रीबी और बेरोज़गारी से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा...

पहले कदम में वृद्धा पेंशन बनवाई

किरन बताती हैं कि उनका अब तक का सफर कांटो भरा रहा है जहां एक तरफ घर में उनकी उच्च-शिक्षा की तरफ बढ़ रहे कदम का विरोध हो रहा था तो कन्या विद्या धन से मिले बीस हजार रूपये से किरन ने बीए में चुपके से एडमिशन करा लिया तब वहीं दलित बस्ती में एक फार्म भरने की चर्चा ने किरन को रातों-रात ख्याति की ओर बढ़ा दिया। दरअसल किरन आरसी जाटव कॉलेज में शिक्षा हासिल करने के दौरान एक दिन अपनी बहन के यहां जयभीम नगर जा रही थी उसी समय रास्ते में एक वृद्ध महिला ने उनसे एक फार्म भरने की प्रार्थना की। किरन ने रुक कर उस महिला का फार्म लिया और फिर अपनी बहन के यहां चली गई। शाम के वक्त इनकी बहन के यहां महिलाओं का समूह जमा होने लगा, उनके वहां आने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि किरन ने जिस महिला का फार्म भरा था उसकी वृद्धा पेंशन बननी तय हो गई, अब हम सब अपनी वृद्धा पेंशन किरन के जरिये ही बनवायेंगे। इस बात को सुनकर किरन ने ऐसा होना इत्तेफाक की बात कही। लाख समझाने के बाद भी वे महिलायें नहीं मानी और अन्ततः उन्हें वृद्धा पेंशन बनवाने का अश्वासन देना पड़ा।

नियमों के मकड़जाल में उलझ गई कहानी

वृद्धा पेंशन उन बूढ़ी लाचार और बेसहारा महिलाओं के लिए कितना बड़ा सहारा है किरन को इस बात का एहसास तब हुआ जब महिलाओं का एक समूह पेंशन दिलाने के लिए किरन के सामने गिड़गिड़ाने लगा, कांपती लरज़ती मिन्नतों ने किरन को ये फैसला करने पर मजबूर कर दिया कि अब चाहे जो हो, वो इन महिलाओं को इनका हक¸ दिला कर ही रहेंगी, लेकिन एक साथ जब इतने सारे फॉर्म भरकर किरन पेंशन बनवाने पहुंची तो सरकारी तंत्र में फंस कर खुद को बड़ा असहाय महसूस करने लगी उस समय एहसास हुआ था की सरकार भले ही आम जनता के लिए कितनी योजनायें निकाल दे लेकिन उनको हासिल करना ‘नामुमकिन’ जितना मुश्किल काम है लेकिन किरन अब भी अपने फैसले पर अटल थी यानी जो ठान लिया उसको पूरा करना है।

मां-बाप ने किया किनारा

किरन का साहस देख कर जहां सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने उनको अपनी बेटी बना लिया वहीं उनको अखिलेश यादव के रूप में एक भाई भी मिल गया था, इतनी बड़ी ख़ुशी किरन को मिली लेकिन उसके साथ ये विपदा भी थी कि उनका अपना परिवार उनके साथ नहीं था। आयेदिन धरना प्रदर्शन करने और प्रशासन के दबाव से आजिज आकर किरन के परिवार ने उनसे किनारा कर लिया। एक साहसी लड़की को सहयोग देने के बजाय उसके मनोबल पर गहरी चोट की गई, लेकिन चट्टान की तरह सख्त¸ इरादों वाली इस दुबली-पतली लड़की ने गरीबों की समस्याओं को लेकर अपने कदमों को हमेशा आगे बढ़ाती रही।

ये थीं किरन की छह मांगें, जिनसे बढ़ा कद

1- गरीबों के लिये उच्च शिक्षा का कर्ज ब्याजमुक्त किया जाये 2- गरीब छात्राओं को अगल अलग डिग्री के लिये प्रोत्साहन राशि दी जाये 3- गरीब विवाह अनुदान राशि 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार की जाये 4- विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन गरीबी के आधार पर तय की जाये, न कि बालिग पुत्र के आधार पर 5- प्रत्येक कस्बा, तहसील एवं ब्लॉक स्तर पर बालिका इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज खोला जाये 6- प्रदेश के सभी प्राइवेट एवं सरकारी स्कूलों में प्राइमरी से लेकर इंटर तक की कक्षा का पहला पीरियड समाचार पत्रों की खबरें पढ़ाकर शुरु की जाये

जायज मांगो के एवज में मिली थी जेल

अपनी मांगो को पूरा कराने और बेसहारों को उनका हक¸ दिलाने के लिए किरण ने नवम्बर 2008 को मेरठ से लखनऊ की पदयात्रा की। मेरठ से लखनऊ तक साइकिल यात्रा कर मुख्यमंत्री से मिलने का निश्चय किया, उनको लगता था की तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलकर वो उन महिलाओं का काम कराएंगी जो बेसहारा हैं और सरकारी तंत्र की कार्यशैली से भी उनको वाकिफ कराएंगी लेकिन ‘दलितों की मसीहा’ कही जाने वाली बहुजन समाज पार्टी की सर्वेसर्वा और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने एक अकेली और जांबाज़ दलित लड़की को जायज मांगो के एवज में जेल भेजवा दिया। कुछ दिनों के बाद पुनः मुख्यमंत्री से मिलने का संकल्प लेकर किरन लखनऊ के लिये रवाना हो गईं इस बात से क्षुब्ध तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किरन को अपराधिक धाराओं में फिर जेल भेजवा दिया।

किसी ने नहीं की मदद

दलितों की मसीहा ने एक दलित लड़की को जेल में डलवा दिया, जिसके मां-बाप बेहद गरीब थे और जिसके समाज में पुलिस का खौफ इस कदर था कि लोग थाने की तरफ देखने से ही डर जाते थे। किरन के जेल से छुड़ाने में उनकी मदद के लिये कोई नहीं आया। करीब 15 दिनों के बाद कुछ अनजान लोगों ने किरन की जमानत कराई।

सपा सुप्रिमों बने मसीहा

मांगों के एवज में जेल जाने के बाद मदद के नाम पर निराशा भाव लिये किरन को 15 दिनों तक जेल में ही बिताना पड़ा, इसके बाद उनकी जमानत हुई और बाद में किरन को पता चला कि उनकी मदद करने वाला कोई और नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के पुरोधा लोकनायक मुलायम सिंह यादव थे। इस बात का पता चलते ही वे स्तब्ध रह गईं और अपने मसीहा से मिलने कृतज्ञता के भाव से उनके आवास पर पहुंच गई। इनके हौसलों को देखते हुये बाद में मुलायम सिंह यादव ने इन्हें ‘एससी-एसटी आयोग का सदस्य’ बनाया।
किरन ने दुश्वारियों भरा एक लम्बा सफर छोटी सी उम्र में ही तय कर लिया है समाज में अच्छे बुरे अनुभव किये है, सरकारी तंत्र और आम आदमी की सभी समस्याओं को बहुत करीब से देखा है, इन सारे अनुभवों के बाद अब किरन का लक्ष्य है की एक ऐसे समाज का निर्माण हो जहाँ युवा पीढ़ी बेरोज़गारी की समस्या से निजात पा सके क्योंकि बेरोज़गारी जहाँ देश की सबसे ज्वलंत समस्या है वही ज्यादातर युवा वर्ग के मन की असली पीढ़ा भी यही है, किरन के ज़ेहन में इस समस्या को लेकर बहुत ही महत्वपूर्ण खाका बना हुआ है लेकिन उसको मूर्त रूप देने के लिए उनके प्रयास और कोशिशें जारी है, उनका कहना है की वो जल्दी युवा-वर्ग के लिए कुछ अच्छा संदेश देंगी जो देश से बेरोज़गारी को खत्म कर एक साधन सम्पन्न युवा-भारत का निर्माण करने में सहयोग करेगा।

Dec 14, 2015

=> Banger Khurd Election Report


ग्राम सभा बांगर में कुल नौ प्रत्याशियों में शीर्ष क्रम में 48 वर्षीय रामउजागिर पुत्र चीलू मात्र एक वोट से विजयी हुये। कमला देवी पत्नी रामदवर पाल से कांटे की टक्कर में यह जीत हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बना है। मगर आपसी खींचतान और गहरी राजनीति का यह नतीजा ही है यह चुनाव अपने आप में अलग हो गया। तीसरे क्रम में मंजू पत्नी योगेंद्र विश्वकर्मा से भी जनता को बहुत उम्मीदें थी मगर कुछ वोटों से हुई यह हार हरहाल में एक नई उम्मीद जगायेगी, योग्यता को नकारना भी जनता के लिये बहुत बड़ी चुनौती बन सकती है। बहरहाल नये ग्राम प्रधान राम उजागिर से यही उम्मीद है कि ग्राम बांगर खुर्द को एक नये विकास के रास्ते पर ले जायें और अन्य प्रत्याशियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे रामउजागिर को उनके कार्यों में सहयोग प्रदान कर गांव को नई दिशा देने में सहयोग करें। अधिक जानकारी के लिये नीचे ईमेज पर क्लिक करें-

Nov 29, 2015

=> डीएसओ ने बनाया आरटीआई का मजाक

जन सूचना अधिकार की उड़ रही धज्जियां
  •  संयुक्त खाद्य आयुक्त ने डीएसओ को किया तलब
  •  बिना एनओसी के ही बना दिया राशनकार्ड

संवाददाता                                                                                                                    
मेरठ। कुछ विभागों के अधिकारियों ने आरटीआई (जनसूचना अधिकार अधिनियम) को मजाक बना लिया है। मांगी गई सूचना उपलव्ध कराने के बजाए विभाग में घुमाते रहना उनका शगल बन गया है। मेरठ के जिला पूर्ति अधिकारी से एक आरटीआई कार्यकर्त्ता द्वारा कुछ जरूरी सूचनाएं मांगी गईं। सूचना तो मिली नहीं लेकिन आरटीआई कार्यकर्त्ता का पत्र विभाग में ही घूमता रहा। सूचना पत्रक अंततः संयुक्त खाद्य आयुक्त के पास पहुंचा तो उन्होंने अब डीएसओ को अपने कार्यालय में तलब कर लिया है। 
RTI Act 2005
         आरटीआई कार्यकर्त्ता तथा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ने 28 अगस्त 2015 को जनसूचना अधिकार के तहत डीएसओ को एक पत्र भेजा जिसमें उनके विभाग से संबंधित कुछ सूचनाएं मांगी गईं। उन्होंने पत्र के तहत मांगी गई सूचनाएं उपलव्ध कराने के बजाए शिथिलता बरती। इसके बाद संयुक्त खाद्य आयुक्त के पास अपील की गई। दरअसल, डीएसओ कार्यालय ने शास्त्रीनगर सेक्टर चार के मकान संख्या 203 और 204 पर रामपूजन को राशन कार्ड जारी कर दिया जबकि मकान किसी और का है। सूचना मांगी गई कि क्या विभाग ने पूरी तरह जांच पडताल के बाद राशन कार्ड बनाया है, यदि हां, तो राशन कार्ड धारक से मकान स्वामी सिद्ध करने का प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं, क्या किसी के मकान पर कोई भी राशन कार्ड बनवा सकता है, क्या इसके लिए मकान स्वामी के अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं पडती, ऐसे में यदि राशन कार्ड धारक किसी आपराधिक कार्य में संलिप्त पाया जाए तो संपत्ति स्वामी की जिम्मेदारी होगी या पूर्ति विभाग की। यदि ऐसा है तो राशन कार्ड धारक के खिलाफ किस नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। 
         बने राशन कार्ड के बारे में आरटीआई के तहत सूचना मांगे जाने का पत्र मिलने पर भी डीएसओ कार्यालय ने प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया। अमूमन होता यह है कि कार्यालय में ही बैठकर विभाग के निरीक्षक खानापूर्ति कर लेते हैं और राशन कार्ड बना देते हैं लेकिन जब कोई मामला फंसता है तो जवाब देते नहीं बनता। संयुक्त खाद्य आयुक्त ने 27 नवंबर को डीएसओ को आवेदक द्वारा मांगी गई सूचना सहित तलब किया है। अब यह तो वक्त ही बताएगा कि विभाग के पास क्या सूचना है।

 जिला पूर्ति अधिकारी हुये तलब

  • आरटीआई का जवाब न देने पर संयुक्त खाद्य-आयुक्त ने किया तलब
  • 2 दिसम्बर तक का दिया समय

मेरठ। जन सूचना अधिकार का मखौल उड़ाने एवं अधिनियम के अन्तर्गत मांगी गई सूचना समय से न देने पर जिला पूर्ति अधिकारी डीएन श्रीवास्तव को संयुक्त आयुक्त खाद्य ने तलब कर लिया। उनकी तरफ से एआरओ को दो दिसम्बर तक का समय देकर सम्पूर्ण सूचना देने का आदेश दिया गया है। संयुक्त आयुक्त-खाद्य ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी प्रकार की अनदेखी कतई बर्दास्त नहीं की जायेगी और अगर जिला पूर्ति विभाग की अनदेखी से आरटीआई की अवहेलना हुई तो नियमानुसार फाइन भी आवेदक को दिलाया जायेगा।

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=> स्मार्ट बनें अधिकारीः आयुक्त

  • स्मार्ट सिटी फैक्टर
  •  आधुनिक तकनीक एवं सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करें अधिकारी

संवाददाता                                                                                                   
मेरठ/गाजियाबाद। गाजियाबाद को स्मार्ट सिटी में परिवर्तित करने के लिये आयुक्त सभागार में मंडलायुक्त आलोक सिन्हा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। आयुक्त आलोक सिन्हा ने अधिकारियों से कहा कि वह स्वंय स्मार्ट बने, स्मार्ट विचार रखें और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिये व्यापक दृष्टिकोण सदैव रखें और सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करें। 
स्मार्ट सिटी पर अधिकारियों को
दिशा-निर्देश देते मंडलायुक्त।
         बैठक में आयुक्त आलोक सिन्हा ने निर्देशित किया कि गाजियाबाद व मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये मार्किंग पैरामीटर ठीक होना चाहिए तथा विजन एवं लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने बताया कि सिटी प्रोफाइल के अन्तर्गत लिविंग ऑफ पब्लिक इन्फ्रास्ट्रख्र स्पष्ट होना चाहिए। आयुक्त ने निर्देशित किया कि सम्बंधित जनपदों में वेन्डिग जोन भी बनाया जाये। आयुक्त ने कहा कि ट्रांसपोर्ट विद्युत, सफाई व्यवस्था, ठोस अपस्षि्ट प्रबधन आदि विषयों को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट सबमिट की जाये। 
         बैठक में नगर आयुक्त गाजियाबाद अब्दुल समद ने बताया कि स्मार्ट सिटी बनाने के लिये रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 15 दिसम्बर निर्धारित कर दी गयी तथा डाटा अपलोड कर दिया गया है जिस पर लोगो की प्रतिक्रिया आ रही है। उन्होनें बताया कि गाजियाबाद बहुत ही विकासशील शहर है  और उसके स्मार्ट सिटी बनने की सम्भांवना अधिक है। उन्होंने बताया कि एनसीआर डिपार्टमेंट बोर्ड गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र को अलग से विकसित किया जा रहा तथा हम शहर का सर्वांगीण विकास करेंगे। 
         इस अवसर पर अपर आयुक्त गया प्रसाद, मुख्य नगर नियोजक ए0के0 बोस, मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव कुमार विनीत, अधीक्षण अभियन्ता सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

=> हाईस्कूल और इंटरमीडएट की परीक्षा तिथि घोषित



  •  18 फरवरी से शुरू होंगी परीक्षा

संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होंगी। यूपी बोर्ड सचिव शैल यादव ने बताया कि परीक्षाएं लगभग डेढ़ महीने तक चलेंगी।
18 फरवरी से शुरू होने पर हाईस्कूल के सीमित विषयों की परीक्षाएं लगभग 10 दिन में पूरी हो जाएंगी। इस बार होली मार्च के अंतिम पखवाड़े 23-24 मार्च को पड़ेगी। इससे परीक्षार्थियों को छुट्टी के दौरान परेशान नहीं होना पड़ेगा। परीक्षा इससे पहले पूरी कर ली जाएगी। इंटरमीडिएट में गिनती के विषयों की परीक्षा ही होली बाद करानी पड़ सकती है। 2015 में बोर्ड परीक्षा 19 फरवरी से शुरू हुई थी। डिबार विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने पर रोक के बाद भी अधिकारी मनमाने तरीके से ब्लैक लिस्टेड विद्यालयों को केन्द्र बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में बिना नकल के परीक्षा कराने का संकल्प पूरा होने में संदेह बना है।

=> जिला पूर्ति अधिकारी हुये तलब


  • आरटीआई का जवाब न देने पर संयुक्त खाद्य-आयुक्त ने किया तलब
  • 2 दिसम्बर तक का दिया समय

मेरठ। जन सूचना अधिकार का मखौल उड़ाने एवं अधिनियम के अन्तर्गत मांगी गई सूचना समय से न देने पर जिला पूर्ति अधिकारी डीएन श्रीवास्तव को संयुक्त आयुक्त खाद्य ने तलब कर लिया। उनकी तरफ से एआरओ को दो दिसम्बर तक का समय देकर सम्पूर्ण सूचना देने का आदेश दिया गया है। संयुक्त आयुक्त-खाद्य ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी प्रकार की अनदेखी कतई बर्दास्त नहीं की जायेगी और अगर जिला पूर्ति विभाग की अनदेखी से आरटीआई की अवहेलना हुई तो नियमानुसार फाइन भी आवेदक को दिलाया जायेगा।
वेबसाइट बंदः मोबाइल द्वारा राशन कार्ड के लिये रजिस्ट्रेशन करने वाली वेबसाइट भी आजकल बंद चल रही है। इसके बंद रहने का समय २४ नवंबर को दोपहर १२ बजे तक ही था।

=> नए सियासी समीकरणों की आहट

बिहार में महागठबंधन सरकार के सत्तारूढ़ होते ही सामाजिक राजनीति की एक नई आधारशिला भी रख दी गई। इसका कारण महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार की जदयू और लालू यादव की राजद के साथ कांग्रेस का साझेदार होना है। यह साझेदारी सामाजिक समीकरणों की एक नई तस्वीर पेश कर रही है। नीतीश ने इसके पहले भी साझा सरकार चलाई, लेकिन ये सरकार पिछली साझा सरकारों से कई मायनों में भिन्न् है। एक समय नीतीश और लालू अलग सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ अलग सोच और भिन्न् तौर-तरीकों वाली राजनीति का नेतृत्व करते थे। 
         दोनों के मिलन ने बिहार के राजनीतिक व सामाजिक परिदृश्य को बदलने का काम किया। नीतीश 17 साल तक भाजपा के सहयोगी रहे। उन्होंने लगभग नौ वर्षों तक उसके साथ गठबंधन सरकार भी चलाई। वह 2005 में भाजपा के सहयोग से ही लालू की बिहार में मजबूत राजनीतिक पकड़ को खत्म करने में सफल रहे थे। तब उन्होंने राजद के कुशासन को मुख्य मुद्दा बनाया। लालू के 15 साल के शासन में बिहार विकास की दौड़ में पिछड़ता जा रहा था। नीतीश ने लोगों को भरोसा दिलाया कि वह बिहार की तकदीर बदल देंगे। उनकी बातों पर बिहार की जनता ने इस हद तक भरोसा किया कि दो बार भाजपा-जदयू गठबंधन को सत्ता सौंपी। नीतीश ने 2013 के अंत में जब नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर भाजपा से नाता तोड़ा था तो शायद उन्होंने भी यह नहीं सोचा होगा कि अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने के लिए उन्हें अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी लालू का सहारा लेना होगा, लेकिन बिहार के जनादेश ने यह साबित कर दिया कि नीतीश के फैसले को जनता ने स्वीकार कर लिया। बिहार के इन चुनावों पर नीतीश की तरह लालू का भी राजनीतिक अस्तित्व दांव पर था। लगातार चुनाव हारकर राजनीतिक रूप से हाशिए पर पहुंच गए लालू के लिए कुशासन और जंगलराज की अपनी छवि से अकेले दम पर उबर पाना लगभग असंभव था। 
         अगर राजद जदयू और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव में न उतरता तो संभवत: लालू को एक और करारी हार का सामना करना पड़ता। बिहार में जो महागठबंधन बना, उसके पीछे तीनों घटक दलों जदयू, राजद व कांग्रेस की अपनी-अपनी सियासी मजबूरी थी, लेकिन इसकी कल्पना शायद इन दलों को भी नहीं रही होगी कि उनका यह प्रयोग इतना सफल रहेगा। नीतीश की महागठबंधन सरकार में उम्मीद के मुताबिक लालू प्रसाद के दोनों बेटों को कोई राजनीतिक अनुभव न होने के बावजूद प्रमुख मंत्रालय मिले हैं। दोनों को तीन-तीन मंत्रालय मिले हैं। छोटे बेटे को तीन मंत्रालयों के साथ उपमुख्यमंत्री पद भी मिला है। इससे यह साबित हो जाता है कि नई सरकार में राजद, विशेषकर लालू के परिवार का खासा प्रभाव है। नीतीश के मंत्रिमंडल पर निगाह डालने से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि मंत्रियों के चयन में लालू प्रभावी रहे, क्योंकि वित्त मंत्रालय भी राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी को मिला है। साझा सरकारों में शामिल दलों को समझौते करने ही पड़ते हैं। यह साफ है कि नीतीश को भी समझौते करने पड़े हैं। इस सबके बावजूद उनकी सरकार व्यापक सामाजिक जनाधार से लैस दिखती है। महागठबंधन सरकार अलग-अलग सामाजिक घटकों के मिलन का परिचायक है। महागठबंधन सरकार का नेतृत्व संभालने के पहले तक नीतीश की राजनीति यादवों के वर्चस्व वाली राजद की सामाजिक न्याय और नजरिए वाली राजनीति से अलग किस्म की रही। उन्होंने पिछड़ी जातियों के साथ-साथ अति पिछड़ी जातियों को भी अपनी राजनीति के केंद्र में रखा और उस जनाधार का भी नेतृत्व किया जिसका प्रतिनिधित्व भाजपा विकास के नारे के साथ करती थी। 
         
विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से विकास के अपने मूल मुद्दे से हटकर जो राजनीति की गई, उससे महागठबंधन को स्वत: ही समाज के ज्यादा बड़े वर्ग का साथ मिल गया। अलग-अलग और यहां तक कि एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी तबके भी एक साथ इसलिए आ मिले, क्योंकि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की जो जरूरत जताई उसे लालू-नीतीश अच्छे से भुनाने अर्थात अपने-अपने लोगों को यह संदेश देने में सफल रहे कि आरक्षण बचाने के लिए एकजुट होने की जरूरत है। नतीजा यह हुआ कि राजद के यादव मतदाताओं के साथ पिछड़े, अति पिछड़े, दलित, महादलित व मुस्लिम मतदाता मिल गए और महागठबंधन को निर्णायक जनादेश प्राप्त हुआ। अब महागठबंधन सरकार के लिए राजनीतिक और साथ ही सामाजिक रूप से अलग-अलग खेमों में रहे इन जातीय समूहों को एकजुट बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं, क्योंकि जो अलग-अलग समूह एक साथ आ मिले, उनमें कई पारंपरिक तौर पर एक-दूसरे के विरोधी भी रहे हैं।

=> ‘ऊंची पढ़ाई और अंधी कमाई’ की औकात


  • A Talk with Jain Sadwi         

महापर्व पर बहस छिड़ गई कि मांस विक्री की पाबंदी नहीं होनी चाहिये। टीवी चैनलों पर राष्ट्रीय चैनलों में लगातार खबरें चलने कि, ‘रोजी-राटी का सवाल है’ और ‘कोर्ट का फैसला बाध्य नहीं’ एवं ‘जैन समाज को अलग से बढ़ावा नहीं देना चाहिये’ आदि आदि नाना प्रकार के तर्क दिये गये। एनसीपी ने महाराष्ट्र में तो छोटे-छोटे बेजुबान जीवों को लेकर क्रूरमापूर्व प्रदर्शन भी किया। क्या ये सब महज वोटों के लिये है? क्या अब राष्ट्रीयता का कोई महत्त्व नहीं है?

         राष्ट्र का निर्माण किस बात पर निर्भर करता है? धर्म, संस्कृति और यहां के रहने वालों लोगों से। भारत के धर्म एवं संस्कृत, सभ्यता में यह बात शामिल है कि मांस बेचकर रोजी-रोटी कमाया जाये। इस प्रकार देखा जाये तो चोरी को जुल्म नहीं कह सकते क्योंकि वह हिंसा से छोटा पाप है। और यह भी सत्य है कि वह चोरों की रोजी-रोटी है। जितने तरह के हिंसात्मक कार्य हैं चाहे वह नक्सलवाद हो, आतंकवाद हो सभी कार्यों में लोग रोजी-रोटी से जुटे हैं तो क्या उन्हें ऐसा करने की संवैधानिक छूट दी जानी चाहिये?

         महानुभाव जब किसी का कत्ल कर दिया जाये तो वह कभी दुआ नहीं देता, वह कभी खुश नहीं होता, उसकी आत्मा छटपटायेगी, आह निकलेगी। यदि निर्बलों को दबाकर, मारकर खाओगे तो उनके आत्मा से निकलने वाली आह से तुम आहत होगे।
         ‘हाय लीजिये दुःखिया की, तो फाट कलेजा जाये’ अपनी करनी भुगतनी पड़ेगी। निबंलों को मत सताओ। बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू आदि सब इसी का उदाहरण है। जब भी हिंसा का शंखनाद होगा तो धरती कांप उठेगी, प्रलय की सुनामी आयेगी। वोटों की राजनीति ने बनारस में मूर्ति विसर्जन करने को आमादा साधु-संतो पर लाठी चार्ज करवा दिया। कत्लखानों एवं फैक्टि्रयों का मैला और गंदगी गंगा में लगातार प्रवाहित हो रही है इस ओर किसी ने तनिक भी ध्यान नहीं दिया।
         सोचना आपको है ‘ऊंची पढ़ाई और अंधी कमाई’ से क्या राष्ट्र का विकास होगा? धर्म-संस्कार विहीन पढ़ाई और छल-कपट की कमाई से समाज में विषैली गंध जन्म लेगी जिसकी बदबू से पूरे समाज के जीवों कों दो-चार होना पड़ेगा। मेरा मानना है कि दया-करूणा और उपकारों के धार्मिक संस्कार अवश्य पढ़ना होगा तभी राष्ट्र का स्वस्थ्य विकास होगा। राष्ट्र का विकास होगा अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह और शील से। ‘झूठ और कत्ल पर आधारित रोजी रोटी’ और राजनीतिक रोटी खाकर कभी भी राष्ट्र का विकास नहीं होगा।
         अदालतों के फैसलों का विरोध करना हम सभी के हित की बात नहीं है फिर भी एक बात जरूर कौंधती है कि क्या आज के अधिवक्तागण इतने धर्मज्ञ हैं कि वे अदालत के सम्मुख किसी भी धर्म का पक्ष मजबूती से रख सकें। क्या उन्हें भगवान राम, महावीर व ऋषि-मुनियों का मर्म मालूम है जो वे इतनी कुशलता से जज के सम्मुख पक्ष रखने में कामयाब होते हैं? या फिर अदालत में बैठे न्यायाधीश महोदय धर्म के सिद्धातों के पीछे का सत्य समझकर निर्णय दे पाने में सक्षम होंगे?
         सीधी सी बात है कि, ‘एक साधू भूखा-प्यासा रहकर, सर्दी गर्मी का एहसास कर के भी खुश रहता है जबकि एक चोर सब सुखों को भोगकर भी डरा सहमा सा रहता है।’ आखिर क्यों? हत्या किसी भी जीव की हो हत्या तो हत्या है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘गुड आतंकवाद- बैड आतंकवाद’ इसका क्या मतलब है आतंकी तो आतंकी हैं बस, निजका काम है मानवों की हत्या करना, देश को तबाह करना है। इसमें गुड और बैड की बात कहां है? शिव-सेना रूपी संगठन का कहना है कि जैन समाज को इतना बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है? जब तक जैन समाज है, दिगम्बरत्व और दिगम्बर है तक तक ही मानवता है। जब तक इस धरा पर संघ सहित यथाजात रूप (जैसे जन्में उसी रूप)  में साधु विचरण करते रहेंगे तब तक प्रेम, अहिंसा, मानवता, करूणा, दया, का अलाव जलता रहेगा अन्यथा ‘हिंसा-तांडव’ देखने को तैयार रहें। अपनी विरासत को नष्ट करने के लिये मानव-मानव का खून पियेगा। कहीं आज के सिंहों के सिंहासन पर गीदड़ तो विराजमान नहीं हो गये हैं। अमर तो कोई नहीं है मगर हम अपने कर्मों से पूरे देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व को एक स्वस्थ्य और सुलभ मार्ग दिखा सकते हैं जिसके बल पर मानवा का कल्याण हो सकेगा?

Oct 5, 2015

=> माधुरी सा फिगर और त्वचा पाने के लिए जानिये पानी के ये गुण

हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए गर्म पानी एक बेहतरीन औषधि का काम करता है. यदि आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चुके हैं, तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें. आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व चमकने लगेगी...

  • हर वक्त थके-थके रहते हैं और कुछ भी काम करने के बाद थकान हो जाती है तो रोज सुबह गुनगुना पानी पीएं. इससे शरीर में रक्त का संचालन बढ़ेगा और रक्त की गति में आ रहे अवरोध दूर होंगे.
  • सुबह-सुबह एक गिलास गुनगुना पानी पुरानी से पुरानी कब्ज को जड़ से खत्म कर देता है. बस इसे सुबह उठने के साथ ही लेना है.
  • स्किन पर रैशेज पड़ गए हैं या त्वचा सिकुड़ रही है तो रोज सुबह गुनगुना पानी आरंभ कर दें. इससे त्वचा का सिकुडऩा बंद होगा और रैशेज में आराम मिलेगा.
  • मुंहासों और ब्लैकहैड्स से परेशान हैं तो रोज सुबह गुनगुना पानी पीएं. इससे त्वचा के रोमछिद्र खुल जाएंगे और त्वचा खुलकर सांस ले सकेगी.
  • सर्दी ज़ुकाम में गुनगुना पानी रामबाण है. इसके होने पर सबसे पहले गुनगुना पानी पीना शुरू कर देना चाहिए. इससे गले की नसे खुलती है और खराश इत्यादि में आराम मिलता है.
  • अगर कई दिनों से भूख न लग रही हो और जी मितलाया सा रहता हो तो गुनगुने पानी में काली मिर्च, नमक और नींबू डालकर शिकंजी बनाएं और रोज पीएं. इससे भूख खुल जाएगी और मितली आना बंद हो जाएगी.
  • गुनगुना पानी सबसे बढिय़ा डाइट है. रोज सुबह गुनगुना पानी नींबू के साथ पीएंगे तो शरीर पर जमी अतिरिक्त चरबी खत्म हो जाएगी. इससे वजन घटता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
  • मूत्र संबंधी सभी परेशानियों में डॉक्टर गुनगुना पानी पीने की सलाह देते हैं.
  • दमा, हिचकी, खराश आदि रोगों में और तले भुने पदार्थों के सेवन के बाद गर्म पानी पीना बहुत लाभदायक होता है.
  • रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिए एक गजब के टॉनिक का काम करता है. यह सिर की त्वचा को हाइड्रेट करता है, जिससे स्किन ड्राय होने की प्रॉब्लम खत्म हो जाती है.
  • लड़कियों को पीरियड्स के दौरान यदि पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है. दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है.
  • चरक संहिता के अनुसार बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए. गर्म पानी ही पीना चाहिए. इससे बुखार में राहत मिलती है.
  • यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है.
  • अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित पानी से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पिएं तो पेट की अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी.
  • भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है. एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पिएं. इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा.
  • गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है. दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है. पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं। makingindia.co से साभार 

Oct 4, 2015

=> जब सपनों को जीते हैं...

  • अशोक रावत
उम्मीदों के साये में ख़तरों को जीते हैं,
अच्छा तो लगता है जब सपनों को जीते हैं.
ऐसे ही मुझमें जीता है मुद्दत से कोई,
जैसे आँगन तुलसी के गमलों को जीते हैं .
याद वही आते हैं मंजि़ल पालेने के बाद,
मंजि़ल से पहले हम जिन रस्तों को जीते हैं.
हम भी ऐसे ही जीते है तेरे होने को,
गंगा के तट ज्यों पावन लहरों को जीते हैं.
आसमान में उडऩे की ख़्वाहिश में लगता है,
रिश्तों के बंधन में हम पिंजरों को जीते हैं.
वो ही शायर जि़ंदा रह जाते हैं दुनिया में,
हर आँसू में जो अपनी गज़़लों को जीते हैं.
अपनी आँखों में जीते हैं हम तेरे सपने,
चहरे पर अपने तेरी नजऱों को जीते हैं.
कितने अनजाने से हो जाते हैं वो एक दिन,
हर पल धडक़न में हम जिन चेहरों को जीते हैं.

Oct 2, 2015

=> ट्विटर पर 'निकाह' की बात से भडक़ी तस्लीमा नसरीन

नई दिल्ली. बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर एक शख्स ने बेहद अजीब डंग से शादी का प्रस्ताव भेजा। ट्विटर पर आए इस शादी के प्रस्ताव से तसलीमा बुरी तरह भडक़ गईं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तस्लीमा को प्रस्ताव भेजने वाले व्यक्ति का नाम मोहम्मद मसूद आलम है। इस शख्स ने ट्विटर पर शादी के प्रस्ताव  में लिखा, 'मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं और तुम्हें सुरक्षा भी दूंगा। करोगी?'
वहीं तस्लीमा ने इस शख्स के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'सुरक्षा के लिए मैंने एक कुत्ता पाल रखा है।' उनके इस जवाब से तस्लीमा का गुस्से को भांप गया वह व्यक्ति दोबारा कोई ट्विट करने के लायक ही नहीं बचा। हां, लेकिन तस्लीमा के ट्वीट के बाद उनके प्रशंसकों के ट्वीट का तांता जरूर लग गया।
 तस्लीमा नसरीन के इस जवाब के बाद कई लोगों ने इस पर उनकी प्रशंशा भी की। कई लोगों ने लिखा कि इससे बढिय़ा जवाब नहीं हो सकता। तस्लीमा के इस जवाब के सराहते हुए राज कमल ने लिखा, मैं अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा हूं, इसका शायद इससे बेहतर जवाब नहीं हो सकता था।

=> दादरी कांड पर केंद्र ने यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट, गांव छोडऩे की तैयारी में परिवार

नई दिल्ली. गौमांस खाने की अफवाह से दादरी में भीड़ द्वारा एक शख्स की पीट-पीटकर जान लिए जाने की घटना पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही उससे सुनिश्चित करने को कहा है कि इस तरह की कोई घटना फिर नहीं होनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ इस वारदात के बाद पीडि़त परिवार गांव छोडऩे की तैयारी कर रहा है।
गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को भेजे एक संदेश में कहा है कि 50 वर्षीय शख्स की पिटाई से मौत के मामले में जल्द से जल्द रिपोर्ट केंद्र को भेजी जानी चाहिए और दोषियों का पता लगाने और उन्हें दंडित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी देनी चाहिए।
  • गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक परामर्श भी भेजा है
  • सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में राज्य में कहीं भी इस तरह की घटना नहीं घटनी चाहिए।
 ग्रेटर नोएडा के दादरी में सोमवार की रात को करीब 200 लोगों ने 50 वर्षीय इखलाक के घर में घुस कर उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसमें उसका 22 साल का बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया। इस तरह की अफवाह थी कि परिवार ने गौमांस खाया है। उत्तर प्रदेश में गौकशी और गौमांस खाना प्रतिबंधित है।

=> राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के अंदर चली गोली

राजधानी दिल्ली की मेट्रो स्टेशन अकसर अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सचेत रहती थी लेकिन मेट्रो के सुरक्षा तंत्र को एक 22 साल के लड़के ने चैलेंज कर दिया।

Raju Tripathyनई दिल्ली | संवाददाता

दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा पर सवाल, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के अंदर चली गोली
राजधानी दिल्ली की मेट्रो स्टेशन अकसर अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सचेत रहती थी लेकिन मेट्रो के सुरक्षा तंत्र को एक 22 साल के लड़के ने चैलेंज कर दिया।
जी हां, बीते दिन दिल्ली के सबसे व्यस्त राजीव चौक मेट्रो स्टेशन में एक युवक ने रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। जिसके बाद उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
ख़बर है कि इस 22 साल के लड़के का नाम शि‍वेश है जो यूपी के फतेहपुर का रहने वाला है। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर एक किनारे खड़े होकर इस लड़के ने खुद पर गोली चला दी। वह खुद की जान ले लेना चाहता था लेकिन निशाना चूक गया और गोली उसके कंधे पर जा लगी।
इस घटना ने दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सोचने वाली बात यह है कि इतनी चेकिंग के बावजूद मेट्रो स्टेशन के अंदर रिवॉल्वर कैसे पहुंच गया। वह लड़का अपने मकसद में कामयाब कैसे हो गया?

Sep 28, 2015

=> सूचना विभाग की मनमानी कर सकती है सरकार की किरकिरी


अव्यवस्था:
समाचारों में हो रही गलतियों की अधिकता
व्यक्ति विशेष पर केंद्रित हो रहा सूचना विभाग
मेरठ। सूचना विभाग की भ्रष्टाचारयुक्त परिवेश में अब सांस लेना भी मुस्किल हो गया है, अधिकारियों के रवैये से जहां पत्रकारों में नकारात्मक भावना जाग्रति हो रही है वहीं विभाग के बाबुओं की मनमानी से पत्रकारों में रोष व्याप्त हो रहा है। छोटे-छोटे कार्यों के लिये भी विभाग के कर्मचारी तकरीबन मुंहमागी रकम लेने से नहीं कतराते। असमर्थता जताने पर काम न होने देने का भी ठेका लेते हैं। यही नहीं प्रदेश सरकार के कार्यों को ठीक से प्रसारित न कर पाना भी सूचना विभाग की एक बड़ी कमी है। समाचारों में गलतियां होना तो आम बात हो गई है।2017 का विधानसभा चुनाव सर पर है लेकिन सरकार की आंख कान कहा जाने वाला सूचना विभाग लगातार निष्क्रिय होता लग रहा है। क्योंकि 23 सितंबर को बिहार पटना में सपा की हुई रैली की सूचना समय से प्रदेश/देश के मीडिया को प्राप्त नहीं हुई लोगों को जबकि अब तो सोशल मीडिया के चलते आधा घंटे में समाचार और सीएम साहब आपका संबोधन देश भर के अखबारों को मिल जाना चाहिए था। राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त एक नेताजी द्वारा वाट्सएप पर जो समाचार भेजा गया उसमें अनेकों गलतियां थी।

नवीन नहीं अतुल प्रधान है व्यापार संघ का अध्यक्ष

मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने की मांग को लेकर सीएम से मिले संयुक्त व्यापार के प्रतिनिधि मंडल की जो विज्ञप्ति सूचना जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी की गयी उसमें नवीन गुप्ता के स्थान पर सपा के नेता अतुल प्रधान को संयुक्त व्यापार संघ का अध्यक्ष दर्शा दिया गया और इससे भी बड़ी बात यह रही कि प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के समय वरिष्ठ राजनेता और कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चैधरी वहां मौजूद थे, लेकिन उनका नाम सूचना विभाग की विज्ञप्ति से गायब था। सीएम साहब आलसी हो रहे सूचना विभाग के अधिकारियों पर लगाम नहीं कसी गयी तो प्रदेश सरकार की छवि किसी भी समय इनके द्वारा जारी विज्ञप्तियों के कारण काफी खराब हो सकती है।
समाचार के लिये पत्रकार रवि कुमार विश्नोई को विशेष आभार 

Sep 23, 2015

=> एसपी क्राइम ने लगाई फटकार:

NANHI KALAM नन्ही कलम: => एसपी क्राइम ने लगाई फटकार: सीओ सिविल लाइन्स और एसओ नौचंदी हुये चुस्त, चार दिन में ही भेज दिया अधूरा जवाब मेरठ। दैनिक ‘सियासत दूर तक’ के 19 सितम्बर के अंक में छपी...

=> मोदी के दौरे से पहले अमेरिका से 15800 करोड़ के हेलिकॉप्टर खरीद की मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार से शुरू होने वाले दौरे से पहले भारत ने अमेरिका से अरबों रुपए के हथियार सौदे को मंजूरी दे दी है। भारत अमेरिकी एविएशन कंपनी बोइंग से 2.5 बिलियन डॉलर (करीब 15800 करोड़ रुपए ) की डील के तहत 22 अपाचे और 15 शिनूक हेलिकॉप्टर खरीदेगा। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी ने मंगलवार को इस डील को मंजूरी दी।
इन हेलिकॉप्टरों को खरीदने की प्रॉसेस 2009 में शुरू हुई थी। माना जा रहा था कि पूरी डील दिसंबर 2012 तक पूरी हो जाएगी। लेकिन लालफीताशाही और डिफेंस मिनिस्ट्री के बाद वित्त मंत्रालय से मंजूरी न मिलने के कारण डील में देरी हुई। कीमतों में 13 बार सुधार के बाद भी यह डील अटकी थी।

डील को लेकर क्या था अमेरिका का रुख?

अमेरिकी आर्मी सिक्युरिटी असिस्टेंस कमांड ने कहा था कि इन हेलिकॉप्टरों की प्राइस 30 सितंबर के बाद 40 फीसदी तक बढ़ा दी जाएगी। इसके बाद पिछले दिनों रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, एनएसए अजीत डोभाल और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच इस डील को लेकर बातचीत हुई। सरकारी अफसरों के मुताबिक, डील को लेकर वित्त मंत्रालय ने ‘नो-ऑब्जेक्शन’ का मैसेज दे दिया। इसके बाद कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्युरिटी अफेयर्स (सीसीएस) ने भी इसे मंजूरी दे दी।

हेलिकॉप्टरों की खासियत

अपाचे एएच६४डी हेलिकॉप्टर सभी मौसम में काम आते हैं। एक मिनट में 128 टारगेट को ट्रैक करने और 16 पर निशाना लगाने की क्षमता। रडार और मिसाइल सेंसर से छिपने की क्षमता। नाइट विजन कैपेबिलिटी। जासूसी के काम के लिए बेहतर।
शिनूक ट्विन रोटर हेलिकॉप्टर है। अमेरिका ने इसी हेलिकॉप्टर से अफगानिस्तान और इराक में अपने ऑपरेशन किए हैं। खासकर ऊंचाई वाली जगहों पर जवानों को पहुंचाने के लिए यह काफी कारगर है।

=> उम्मीदवारों को फेसबुक के लाइक पड़ सकते हैं भारी

उम्मीदवारों के फेसबुक पोस्ट को अप्रत्याशित तौर पर पसंद (लाइक) किया जाना भारी पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने इस माध्यम पर अपनी निगाहें तिरछी कर दी है। आयोग की एक टीम बिहार विधानसभा चुनाव में फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों की निगरानी के लिए तैयार है। जो सिर्फ राजनीतिक ऑनलाइन विज्ञापनों पर ही नहीं, लाइक पर भी नजर रखेगी। 
निर्वाचन आयोग को दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद तमाम शिकायतें मिली थीं कि सोशल साइटों पर खुद को सबसे बेहतर साबित करने में उम्मीदवारों ने भारी खर्च किया है। यह खर्च सोशल मीडिया में पोस्ट को लाइक करने पर किया गया था। 
आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक इसके बाद तकनीकी दल को इस संबंध में जानकारी हासिल करने को कहा गया। इससे पहले सभी राष्ट्रीय और राज्य के राजनीतिक दलों को आयोग ने अक्तूबर, 2013 में वेबसाइट प्रचार के संबंध में निर्देश जारी किए थे।
आयोग ने निर्देशों में फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, विकिपीडिया और मोबाइल एप से किए जाने वाले प्रचार के बारे में प्रत्याशियों की ओर से सूचित किए जाने को कहा गया था। जबकि अब आयोग की नजर इस पर भी रहेगी कि सोशल साइट पर किए गए पोस्ट को अप्रत्याशित तौर पर पसंद तो नहीं किया जा रहा है।

फेसबुक बेचता है लाइक 

दरअसल फेसबुक की ओर से लाइक की बिक्री होती है, जो दिल्ली के चुनावी दौर में प्रति लाइक की खरीद छह रुपये तक गई थी। हालांकि तब आयोग को इसका सटीक अंदाजा नहीं था कि प्रचार के इस खेल पर कैसे पकड़ बनाई जाए। सूत्रों के मुताबिक तकनीकी टीम बिहार चुनाव के बाद इस बारे में अपनी रिपोर्ट देगी। 

बढ़ जाती है लाइक की कीमत

कंपनियों के प्रचार पर बड़ी तादाद में लाइक करने की जुगत को नेता चुनाव में अपनाते हैं। बीते तीन साल में सोशल साइटों पर यह कारगुजारी बढ़ी है। हालांकि इस मामले में सबसे आगे फेसबुक ही है। आमतौर पर प्रति लाइक 70 पैसे कीमत की रहती है पर चुनाव के दौरान यह पांच से छह रुपये तक जाती है।

कैसे मिलता है फायदा 

चुनावी माहौल में उम्मीदवार की ओर से पोस्ट डालने पर एक सीमा तक लोगों का लाइक करना आम बात है। लेकिन यह अप्रत्याशित तब है, जबकि आंकड़ा हजारों और फिर लाखों में पहुंच जाए। तब संभवाना प्रबल है कि फेसबुक से लाइक खरीदी गई है। वहीं सोशल मीडिया पर हाजिरी लगाने वाले यह समझते हैं कि बड़ी तादाद में लोग प्रत्याशी को पसंद कर रहे हैं।

=> डॉक्टरों की सूची मांगने पर खामोश हो गये सीएमओ

सीएमओ ऑफिस की सांठ-गांठ से मौत बांट रहे हैं झोलाछाप, पंजीकृत डॉक्टरों की सूची देने से कतराये अधिकारी

हाय रे सिस्टम--------------------------------------------------------
कर्मचारियों की मनमानी बता, नहीं देते कोई जानकारी

सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर पलीता लगा रहे अधिकारी

बिजनौर। शासन द्वारा जनमानस को स्वास्थय सुविधायें उपलब्ध कराने के लिए जनपद मुख्यालय से लेकर गांव तक सरकारी व्यवस्था उपलब्ध हैं परन्तु जन मानस को उन स्वास्थय सुविधाओं को प्रदान करने के लिये डॉक्टर द्वारा किये जा रहे लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण आम जन को लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही डॉक्टरों के अभाव में झोलाछाप डॉक्टरों पर आत्मनिर्भर होना पड़ रहा है। जबकि जिला मुख्यालय स्वास्थ विभाग के पास जनपद में मकड़ी की तरह अपना जाल बिछाये इन झोलाछाप डॉक्टरों का कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं हैं। साथ ही विभाग इस मामले को गम्भीरता से न लेकर जन मानस के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
शासन द्वारा नगर व ग्रामीण अंचलों में स्वास्थय सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये जगह-जगह प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र सामुदायिक केन्द्र एंव उपकेन्द्र खोल रखे हैं। वर्तमान में जनपद बिजनौर के 11 विकास खण्डों में बने प्राथमिक स्वास्थय केन्द्र सामुदायिक केन्द्र एवं उपकेन्द्रों की हालत बद से बदतर हो गई है। इन केन्द्रों पर डॉक्टरों की जगह कही ंवार्डवाय तैनात हैं तो कहीं फार्मेसिस्ट, जो कि डॉक्टरों की जगह इन केन्द्रों को संचालित कर रहे हैं। यह जनमानस के स्वास्थय के साथ सरासर खिलवाड़ है तथा गांव-गांव, नगर, गली, मोहल्लों में यह झोलाछाप डॉक्टर बडी़-बड़ी डिग्रियों के बोर्ड लगाकर उनपर विभिन्न बीमारियों के उपचार करने संबंधी स्लोगन अंकित कराकर जनमानस का उपचार कर रहे हैं। 
वर्तमान में जनपद बिजनौर में लगातार चल रही एक अज्ञात बुखार की बीमारी से न जाने अब तक कितनी मौतें हो चुकी हैं। इन मौंते का कारण जिला स्वास्थय विभाग जनपद में मौजूद झोलाछाप डॉक्टरों के सर पर ठीकरा फोड़ रहा है। साथ ही स्वास्थय विभाग द्वारा न तो इन झोलाछाप डॉक्टरों की चेकिंग की जाती हैं और की भी जाती है तो चेकिंग के नाम पर स्वार्थ सिद्धी पूरी कर ली जाती है।

स्टॉफ मेरी कुछ नहीं सुनता: सीएमओ मनमोहन अग्रवाल

इस मामले में दैनिक सियासत की टीम ने सीएमओ मनमोहन अग्रवाल से झोलाछाप डॉक्टरों की पंजीकरण
सूची मांगी तो उन्होने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया उनके कार्यालय के बाबू इस मामले में उनका कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। जल्द ही चिन्हित कराकर इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ  कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। मजे की बात यह है कि जब सीएमओ को भी अपने कर्मचारियों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है जो कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर रहते हुए भी अपने कर्मचारियों पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब स्वास्थ विभाग के पास झोलाछाप चिकित्सकों की कोई जानकारी नहीं है तो दूसरी ओर आम जनमासन कैसे झोलाछाप व डिग्री धारक डॉक्टरों में अन्तर कर पायेगें। जनमानस के साथ हो रहे घिनौने खिलवाड का आखिर जिम्मेदार कौन है?

मेरठ में भी झोलाछाप की अधिकता

बिजनौर ही नहीं स्वास्थ्य सेवाओं के लिये जाना जाने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्थान मेरठ भी झोलाछाप के चंगुल में बुरी तरह फंस चुका है। यहां भी हर गली नुक्कड़ पर तमाम तरह के डॉक्टरों के वेशभूषा में बैठे झोलाछाप दिखाई पड़ जाते हैं जहां पर पहुंचकर आम आदमी अपने सेहत को बुरे दौर में ले जाने का निमंत्रण तो देता ही है साथ में अपनी जेब को भी ढ़ीला करने पर मजबूर हो जाता है। सिर्फ डॉक्टरों की ही बात नहीं यहां पर तो चिकित्सकों ने बकायदा अस्पतालों पर मौत बांटने वाले रेडियेशन का भी बंदोबस्त कर रखा हैै।

=> एसपी नहीं मानते एसएसपी का आदेश

सूचना अधिकार की उड़ रही धज्जियां

कैसे रूकेगा भ्रष्टाचार जब पुलिस करेगी अत्याचार, अधिकारी होगा उपेक्षा का शिकार

मेरठ। पुलिस विभाग को वैसे तो अपनी दबंगई से आम जनता को पराजित करने में ‘सिद्ध प्राप्त’ है मगर अब ऐसा लगता है कि बिजनौर के सीएमओ की तरह मेरठ की पुलिस भी अपने हाकिम के आदेशों का बॉयकाट करती है। यही नहीं अपने झूठे अहम को दिखाने के लिये सरकार द्वारा स्थापित नियमों की भी धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत वैसे तो पुलिसकर्मी जानकारी देने से कतराते हैं मगर जिले के आलाकमान और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को भी अगर ताक पर रख दें तो इसे आप क्या कहेंगें?
आरटीआई के तहत मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ने डीआईजी को दिये गये प्रार्थनापत्र की प्रमाणित प्रतिलिप एवं उसपर अभी तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा। डीआईजी ने उक्त प्रार्थनपत्र को एसएसपी को स्थानांतरित कर सूचना देने का आदेश देते हुये पत्र भेजा, एसएसपी कार्यालय को सूचना देने हेतु प्रेषित पत्र का जवाब एक माह बीत जाने के पश्चात भी नहीं आया तो पत्रकार ने पुन: कप्तान(प्रथम अपीलीय अधिकारी) को पत्र लिख सूचना न देने वाले पुलिसकर्मियों पर नियमसंगत कार्रवाई कर जवाब देने हेतु आदेश पारित करने की प्रार्थना की गई। इसके बाद एसएसपी ने सुनवाई करते हुये आदेश एसपी क्राइम को आदेश दिया की सूचनाधारक से सूचना एकत्र कर जवाब को फौरन प्रेषित करें। मगर लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी एसपी साहब के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा। इसे एसपी क्राइम की बेफिक्री कहें, लापरवाही कहें या फिर अधिकारी के आदेशों की अवहेलना करने का तरीका?

=> एसपी क्राइम ने लगाई फटकार

सीओ सिविल लाइन्स और एसओ नौचंदी हुये चुस्त, चार दिन में ही भेज दिया अधूरा जवाब

मेरठ। दैनिक ‘सियासत दूर तक’ के 19 सितम्बर के अंक में छपी खबर ‘एसपी नहीं मानते एसएसपी का आदेश’ को संज्ञान में लेते हुये एसपी क्राइम ने एसओ नौचंदी और सीओ सिविल लाइन्स को सख्त चेतावनी देते हुये जल्द से जल्द जवाब प्रेषित करने का आदेश दिया और साथ ही प्रत्येक आरटीआई पर समयसीमा के अन्दर ही जवाब भेजने की भी बात कही। गारैरतलब है कि पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ने आरटीआई के जरिये व्यक्ति विशेष द्वारा डीआईजी को दिये गये प्रार्थनापत्र पर हुई कार्रवाई का व्यौरा मांगा था। जिसका जवाब देने में एसओ नौचंदी आनाकानी करतेे रहे और आरटीआई के नियमों के तहत निर्धारित समयसीमा समाप्त हो गई। इसके बाद त्रिनाथ ने प्रथम अपील करते हुये एसएसपी से सूचना प्रेषत करने की मांग की थी, इसके बाद एसएसपी और एसपी क्राइम ने पत्र लिख सीओ सिविल लाइन्स और एसओ नौचंदी को फौरन जवाब भेजने का आदेश प्रेषित किया। मगर सीओ सिविल लाठन्स और एसपी क्राइम के आदेशों के बावजूद एसओ नौचंदी हरशरण शर्मा सूचना देने में आनाकानी कर रहे थे। यह खबर दैनिक ‘सियासत दूर तक’ ने प्रमुखता से छापी थी जिसे संज्ञान में लेते हुये एसपी क्राइम ने एसओ हरशरण को फटकार लगाई और जवाब भेजने को कहा। इसपर गुस्से से बिलबिलाये थानाध्यक्ष महोदय ने आरटीआई का जवाब बना प्रेषित कर दिया। मगर अभी भी पूरी जानकारी नहीं है। पत्रकार त्रिनाथ मिश्र का कहना है कि वो द्वतीय अपील राज्य सूचना अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

May 29, 2015

=> शारीरिक आकर्षण को प्रेम समझते युवा

youth infatuationपार्कों में या किसी अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आपने अकसर किशोरवय प्रेमी जोड़ों को देखा होगा. वह अपने प्रेम में इस हद तक डूबे हुए होते हैं कि उन्हें आसपास की दुनियां की कोई फिक्र नहीं होती. इनको देखकर आपको बहुत अजीब लगता होगा और यह भी सोचते होंगे कि जब आप अपने किशोरावस्था से गुजर रहे थे तो ऐसा कुछ करने के बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं था.
भले ही किशोरावस्था में किसी भी प्रकार के शारीरिक संबंध बनाने से परहेज रखने की बात की जाती हो लेकिन अकसर यही देखा जाता है कि हमारी युवा पीढ़ी स्कूल-कॉलेज में साथ पढ़ने के दौरान ही गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड के चक्कर में पड़ जाती है. ऐसा नहीं है कि उन्हें एक-दूसरे से प्रेम हो जाता है, इस आयु में वह केवल एक दूसरे के प्रति शारीरिक रूप से ही आकर्षित होते हैं. यही कारण है कि आधुनिकता से ग्रस्त हमारी युवा-पीढ़ी किशोरावस्था में ही शारीरिक संबंधों में लिप्त हो जाती है. वैसे तो वैज्ञानिक तौर पर यह स्पष्ट किया जा चुका है किशोरावस्था में संबंध स्थापित करने से सेहत को भी नुकसान पहुंचता है, लेकिन एक नए अध्ययन ने यह बात भी स्थापित कर दी है कि जो महिलाएं किशोरावस्था में शारीरिक संबंध बनाती हैं, उनका आगामी जीवन सफल नहीं हो पाता.
      यूनिवर्सिटी ऑफ इवोआ के शोधकर्ताओं ने पाया कि शादी से पहले किसी अन्य व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना महिलाओं के वैवाहिक जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकता है. उनके अपने पति से मनमुटाव और संबंधों में दरार पड़ने की संभावनाएं अपेक्षाकृत बढ़ जाती हैं. हैरान कर देने वाली बात यह है कि जहां महिलाओं के लिए ऐसे संबंध तलाक का कारण बनते हैं वहीं पुरुषों के वैवाहिक जीवन में इससे कोई खास अंतर नहीं पड़ता. किशोरावस्था में शारीरिक संबंध बनाने के बावजूद वह एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जीते हैं.
      सर्वेक्षण में शामिल 31% प्रतिशत महिलाएं, जिन्होंने किशोरावस्था में ही शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए थे, वैवाहिक जीवन के पांच वर्ष के भीतर और 47% महिलाएं विवाह के 10 वर्ष के भीतर ही अपने पति से तलाक ले चुकी हैं.

इस शोध की रिपोर्ट में पति-पत्नी में मनमुटाव के कारण और उनके तलाक की वजहों के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ वर्णित नहीं किया गया है. लेकिन मात्र इसी वजह से तलाक हो जाने की बात थोड़ी अटपटी लगती है. क्योंकि वैवाहिक संबंध का निर्वाह करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जिसमें भावनाओं और आपसी समझ का होना बहुत जरूरी है. विवाह से पहले संबंध बनाया जाना विदेशों में मात्र एक प्रचलन के रूप में देखा जा सकता है. महिलाएं हो या पुरुष दोनों ही ऐसे संबंधों को स्थापित करने में कोई गुरेज नहीं करते. लेकिन हां, वहां वैवाहिक संबंधों में आपसी भावनाओं का महत्व बहुत कम है. शायद यह एक वजह हो सकती है तलाक की.
      भारतीय समाज में विवाह से पहले शारीरिक संबंध स्थापित करना पूर्णत: अनैतिक माना जाता है. लेकिन फिर भी व्यक्ति अपनी शारीरिक इच्छाओं और जिज्ञासाओं को पूरा करने के लिए विवाह से पहले या फिर किशोरावस्था में ही ऐसे संबंधों के प्रति आकृष्ट होने लगते हैं. उनका मानना है कि शारीरिक संबंध ही प्रेम-संबंधों को अपने मुकाम तक पहुंचा सकते हैं. जबकि वास्तविकता यह है कि प्रेम को निभाने के लिए शारीरिक संबंधों की स्वीकार्यता व्यक्ति को भोगी बना देती है. प्रेम अपने आप में एक संपूर्ण शब्द है जिसे तब तक किसी अन्य आकर्षण की जरूरत नहीं पड़ती जब तक वह सच्चा हो. हां, अगर प्रेम संबंध का आधार ही केवल शारीरिक आकर्षण है तो बिना संबंध स्थापित किए अफेयर को स्थायी नहीं रखा जा सकता.   -jagranjunction

May 23, 2015

=> हाईटेक इन्टरनेट से लुप्त होते डाकिया

डाकिया डाक लाया खुशी का पैगाम लाया बीते जमाने की बात होगई। जी हॉ कुछ सालो पहले डाकघर के पोस्टमेन कॉ लोगो का बेसब्री से इंतजार करना पडता था। वही डाकियो को सैकडो की संख्या मे पत्र बांटने पडते थे। लोग डाकघर का इस्तमाल पहले किसी त्यौहार राखी, भैयादूज, ईद आदि के मोके पर अपने परिवार वालो को पैसा भेजने के मनीआर्डर का इस्तमाल किया जाता था। लेकिन आज के हाईटेक युग के चलते डाकघर का इस्तेमाल केवल रजिस्ट्री भेजने या सरकारी पत्र भेजने तक ही सीमित होकर रह गया है। लोगो ने त्यौहारो पर पैसा भेजने के लिय सीबीएस ब्रांच का प्रयाग करना तो पत्र भेजने के लिये एसएमएस या ईमेल से काम चलाना षुरू कर देने से जहॉ लोगो की बात साथ साथ होजाती है। वही पैसा जमा करने के तुरंत बाद ही मिलने से लोगो को एक एक सप्ताह का लम्ंबा इंतजार नही करना पडता। कसबे व दैहात के डाकियो के हाथ मे पहले जहा सैकडो की सख्ंया मे पत्रो का जमवाडा रहता था वही अब पोस्टमेन को सिर्फ सरकारी पत्रही बांअने पडते है। लोगों का कहना है कि पहले के समय मे पोस्टमेन के इंतजार मे पहले डाकघर से पत्र लाने का मजा कुछ और ही था। घर पर पोस्टमैन के  इंतजार मे दरवाजे पर खडे रहना अच्छा लगता था।

May 18, 2015

=> ​​सितम भी सहना दुआ भी देना वो बेबसी का गया जमाना...


मॉय सिटी इंफो पत्रिका के कार्यक्रम में मचा धमाल, खूब की मस्ती

त्रिनाथ मिश्र के मंच संचालन से गूंज उठा हॉल, सदस्यों ने दी बधाई

मेरठ। यूनिवर्सिर्टी रोड स्थित होटल वेलकम आलिव्ज में 'मॉय सिटी इंफोÓ पत्रिका के  सदस्यों के सम्मान समारोह एवं 'गेट टू गेदर'
का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेविका मंजू जैन ने पत्रिका के प्रयासों को सराहते हुए समाज के प्रति एक सकारात्मक प्रयास बताया और उन्होंने अपने अनुभवों से इस पत्रिका को और भी आगे ले जाने की बात कही। विशिष्ट अतिथि व्यूटी एक्सपर्ट नीलम सिंह एवं नेहा सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया कि 'मॉय सिटी इंफो' पत्रिका न केवल समाज की बल्कि पूरे शहर की आवाज बनकर उठेगी और आने वाले समय में यह पत्रिका जानकारी एवं सामाग्री के लिहाज से भी बेहतरी की तरफ अग्रसर होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पत्रिका की संरक्षिका पूनम सैनी ने की और उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि यह पत्रिका ललित सैनी के संपादन में नई उंचाइयों को प्राप्त करेगी और एक नई दिशा प्रदान करने का भी कार्य करेगी। इस दौरान ओम वक्र्स डांस एकेडमी की असिस्टेंट डायरेक्टर ज्योतिका विजय ने सभी अतिथियों को मोंमेंटों देकर सम्मानित किया और मंच पर आसीन कराया।
              कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से आए पत्रकार नितिन द्विवेदी और उत्तराखण्ड से पधारे आरके शर्मा व अंजू सैनी ने पत्रिका के कंटेंट और गुंणवत्ता की तारीफ करते हुए कुशल प्रकाशन पर हर्षित हो पत्रिका को सहयोग करने की बात कही। इस दौरान सैकड़ों की सेख्या में पत्रिका के सदस्यों ने शिरकत की और अपने अनुभव का बेहतरीन और अनोखा बताया।
              इस दौरान पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र में योगदान देने वाले पत्रकारों एवं समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया। कवि एवं पत्रकार संतोष त्रिपाठी, लियाकत मंसूरी, वरूण शर्मा, विजय मिश्र, नितिन द्विवेदी, सहजाद खान अािद के कार्यों को देखते हुए सम्मानित किया गया।
               'मॉय सिटी इंफो' पत्रिका के संपादक ललित सैनी ने सभी को धन्यवाद एवं कार्यक्रम में समय से पहुंचने पर आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन त्रिनाथ मिश्र ने किया और संयोजन ओम वक्र्स डांस एकेडमी के डॉयरेक्टर पंकज वर्मा ने किया। 
कार्यक्रम में पियूष वशिष्ठ, अनुराग, अम्बुज रस्तोगी, सचिन शर्मा(हापुड़), शिखा गुप्ता, कुशल अग्रवाल, कु. पायल कश्यप, बबिता नागपाल, पदमराज सैनी, विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे। 

Feb 15, 2015

=> शिवरात्रि में करें उपाय

 
एक समय था जब भारतीय संस्कृति में 365 त्योहार हुआ करते थे। दूसरे शब्दों में हर दिन उत्सव मनाने के लिए उन्हें बस एक बहाने की जरूरत होती थी। जीवन के अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर ये 365 त्योहार मनाए जाते थे। लेकिन महाशिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है।


 
कृष्ण पक्ष में हरेक चंद्र मास का चौदहवां दिन या अमावस्या से एक दिन पूर्व शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक पंचांग वर्ष में होने वाली सभी बारह शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि जो फरवरी-मार्च के महीने में पड़ती है, सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी गई है।   
                    इस रात्रि में इस ग्रह के उत्तरी गोलार्ध की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है।
                     यह एक ऐसा दिन होता है जब प्रकृति व्यक्ति को उसके आध्यात्मिक शिखर की ओर ढकेल रही होती है। इसका उपयोग करने के लिए इस परंपरा में हमने एक खास त्योहार बनाया है जो पूरी रात मनाया जाता है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस त्योहार का मूल मकसद यह निश्चित करना है कि ऊर्जाओं का यह प्राकृतिक चढ़ाव या उमाड़ अपना रास्ता पा सके।
               वे लोग जो अध्यात्म मार्ग पर हैं उनके लिए महाशिवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण है। योग परंपरा में शिव की पूजा ईश्वर के रूप में नहीं की जाती बल्कि उन्हें आदि गुरु माना जाता है, वे प्रथम गुरु हैं जिनसे ज्ञान की उत्पति हुई थी। 


 
कई हजार वर्षों तक ध्यान में रहने के पश्चात एक दिन वे पूर्णतः शांत हो गए, वह दिन महाशिवरात्रि का है। उनके अंदर कोई गति नहीं रह गई और वे पूर्णतः निश्चल हो गए। इसलिए तपस्वी महाशिवरात्रि को निश्चलता के दिन के रूप में मनाते हैं।
              पौराणिक कथाओं के अलावा योग परंपरा में इस दिन और इस रात को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि महाशिवरात्रि एक तपस्वी व जिज्ञासु के समक्ष कई संभावनाएं प्रस्तुत करती है।
             आधुनिक विज्ञान कई अवस्थाओं से गुजरने के बाद आज एक ऐसे बिंदु पर पहुंचा है जहां वे यह सिद्ध कर रहे हैं कि हर चीज जिसे आप जीवन के रूप में जानते हैं, वह सिर्फ ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों करोड़ों रूप में व्यक्त करती है।

=> स्त्री का स्त्रैण होना, उसका माधुर्य है...

स्त्रियों की सहनशक्ति पुरुषों से कई गुनी ज्यादा है। पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर है। लेकिन पुरुष एक ही शक्ति का हिसाब लगाता रहता है, वह है मसल्स की। क्योंकि वह बड़ा पत्थर उठा लेता है, इसलिए वह सोचता रहा है कि मैं शक्तिशाली हूं। लेकिन बड़ा पत्थर अकेला आयाम अगर शक्ति का होता तो ठी‍क है, सहनशीलता भी बड़ी शक्ति है- जीवन के दुखों को झेल जाना।

स्त्रियां देर तक जवान रहती हैं, अगर उन्हें दस-पंद्रह बच्चे पैदा न करना पड़ें। तो पुरुष जल्दी बूढ़े हो जाते हैं: स्त्रियां देर तक युवा और ताजी रहती हैं।
          लड़कियां पहले बोलना शुरू करती हैं। बुद्धिमत्ता लड़कियों में पहले प्रकट होती है। लड़कियां ज्यादा तेज होती हैं। विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा में लड़कियां आगे होती हैं।
     जो भी स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है। अगर कोई स्‍‍त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो तुम घबरा जाओगे तुम भागोगे। क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है, स्त्रैण नहीं है। स्त्री का स्त्रैण होना, उसका माधुर्य इसी में है कि वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है।
वह तुम्हें उकसाती है, लेकिन आक्रमण नहीं करती। वह तुम्हें बुलाती है, लेकिन चिल्लाती नहीं। उसका बुलाना भी बड़ा मौन है। वह तुम्हें सब तरफ से घेर लेती, लेकिन तुम्हें पता भी नहीं चलता। उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं। वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से तुम्हें सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता।



स्त्री अपने को नीचे रखती है। लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया। नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है। मगर तुम्हें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है। और लाओत्से उसी कला का उद्‍घाटन कर रहा है। कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता। दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है,तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, ‍क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है। वह जीवन का राज समझती है।
स्त्री अपने को नीचे रखती है, चरणों में रखती है। और तुमने देखा है कि जब भी कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है। रखती चरणों में है, पहुंच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर। तुम चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो। छोड़ देती है अपने को तुम्हारे चरणों में, तुम्हारी छाया बन जाती है। और तुम्हें पता भी नहीं चलता कि छाया तुम्हें चलाने लगती है, छाया के इशारे से तुम चलने लगते हो।
स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है। वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है।



लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है। और उसकी शक्ति क्या है? क्योंकि वह दासी है। शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गई है। बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं, और एकदम अशक्त हो जाते हैं।